जीवन के अंग


एक व्यक्ति महात्मा के पास गया व बोला, महाराज। इस जीवन में सबसे ज्यादा महत्व किस चीज का है, जिसके बिना यह जीवन चल ही नहीं सकता। महात्मा ने पूछा, तुम क्या काम करते हो? वह बोला—जी, वाहन चलाता हूं। महात्मा बोले, वाहन में ज़रूरी क्या चीज़ है? व्यक्ति बोला—जी, पेट्रोल। महात्मा ने कहा यदि पैट्रोल भरा हो व इंजन न हो तो वाहन चलेगा? वह बोला, नहीं महाराज। इंजन तो ज़रूरी है। यदि इंजन भी हो और बैटरी न हो तो? वह बोला— बेटरी भी ज़रूरी है। यदि ब्रेक या टायर न हों तो क्या वह वाहन चलेगा? महात्मा ने पूछा तो वह बोला— महाराज, यह सब चीजें बहुत ज़रूरी हैं। इनमें से एक भी न हो तो वाहन चल ही नहीं सकता। अब महात्मा मुस्कुरा कर बोले, यही तुम्हारे प्रश्न का उत्तर है। यह जीवन भी किसी एक चीज से नहीं चलता, इसमें कई चीजों का गहरा महत्व है व सभी का होना ज़रूरी है जोकि जीवन के महत्वपूर्ण अंग हैं। पैसा, पैट्रोल की तरह है। हमारे कर्म-सेवा इंजन हैं। दया-दान-परोपकार इसमें बैटरी की तरह हैं। धर्म-संस्कार, सत्य-अहिंसा टायर की तरह हैं जो जीवन की गाड़ी को आगे धकेलते हैं। क्रोध-लालच-वासना-बुराई-अहंकार इस जीवन में ब्रेक का कार्य करते हैं व जीवन को रोक कर विनाश की तरफ मोड़ देते हैं। निंदा-चुगली पाप का धन दु:खों की गहरी खाई में धकेल देता हैं। इसलिए जीवन में इन गुणों को धारण करो, व अवगुणों से सदा दूर रहो।

—मुकेश विग