कांग्रेसी नेता शमशेर सिंह सूरजेवाला का निधन


नरवाना, 20 जनवरी (विकास  जेठी) : किसान खेत मजदूर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री चौधरी शमशेर सिंह सुरजेवाला का सोमवार सुबह निधन हो गया। वह पिछले कई दिनों से बीमार थे। उन्होंने सुबह दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस ली। उनके शव को नरवाना लाया गया जहां दोपहर बाद दाह संस्कार किया गया। दाह संस्कार में अनेक लोगों ने भाग लिया। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी व अन्य नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया। चौधरी शमशेर सिंह सुरजेवाला के दाह संस्कार पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस अध्यक्षा कुमारी शैलजा, पूर्व इस्पात मंत्री बिरेन्द्र सिंह,  अशोक अरोड़ा, पूर्व विद्यायक रामपाल माजरा, पूर्व विद्यायक जयप्रकाश, पूर्व विद्यायक बच्चन सिंह, पूर्व विद्यायक परमबीर सिंह, पूर्व विद्यायक कुलदीप शर्मा, कर्ण दलाल, पूर्व सांसद दीपेन्द्र हुड्डा, प्रोफेसर विरेन्द्र सिंह , अफताफ अहमद, प्रलाहद गिल्ला खेड़ा, विद्या रानी दनौदा, पिरथी नम्बरदार, कैलाश सिंगला , जियालाल गोयल, अनिल आर्य सहित शहर की क ई सामाजिक व राजनीतिक दलों के नेता व कार्यकर्ताआें ने श्रद्धांजली दी। शमशेर सिंह सुरजेवाला के निधन के बाद उनके निवास स्थान सुरजेवाला भवन पर हजारों लोग जमा थे। पूरे प्रदेश के राजनीतिक व सामाजिक लोग उनके निवास स्थान पर श्रद्धाजंलि देने पहुंचे थे। बता दे कि कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीपसिंह सुरजेवाला के पिता शमशेरसिंह सुरजेवाला का जन्म नरवाना हलके के गांव सुरजाखेड़ा में 24 मार्च 1932 में हुआ था। शमशेर सिंह छह भाईयों में सबसे बडे थे। शमशेर सिंह सुरजेवाला चार बार नरवाना विधानसभा से और एक बार कैथल विधान सभा से विधायक रहे। चौधरी भजनलाल और बंसीलाल की सरकारों में वरिष्ठ मंत्री रहे। शमशेरसिंह सुरजेवाला ने हरियाणा बनने के बाद 1967 में हुए पहले चुनाव में नरवाना हलके से चुनाव लडा और जीतकर राव वीरेंद्रसिंह के मंत्री मंडल में मंत्री बने। दूसरी बार 1977 में वह जनता पार्टी की लहर में नरवाना से विधायक बने। 1982 में फि र विजयी रहे। 1991 में फिर विधान सभा में पहुंचे। उसके बाद कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा में भेजा। 2005 में वह कैथल विधान सभा से विधायक बने। सुरजेवाला ने ताउम्र किसानों व कमेरे वर्ग के लोगों के हित में लड़ाई लडी। जब भी कांग्रेस का ग्राफ  गिरा उन्होंने लोगों के बीच में रहकर दोबारा से पार्टी की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई। सुरजेवाला इस बात के उदाहरण रहे हैं कि राजनीति को विनम्रता, सौभ्यता, तहजीब और लियाकत के साथ भी संचालित किया जा सकता है।