कर्नाटक से चुनाव लड़ सकती हैं प्रियंका गांधी

यह अनुमान तेज़ हो गए हैं कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा कर्नाटक के बेलारी या कोपल्ल से चुनाव लड़ सकती हैं। हालांकि 1999 के आम चुनावों के दौरान सोनिया गांधी ने भाजपा की सुषमा स्वराज के खिलाफ बेलारी से जीत प्राप्त की थी, परन्तु तेलंगाना कांग्रेस आगे देख रही है और चाहती है कि प्रियंका को मेढक लोकसभा क्षेत्र से चुनाव मैदान में उतारा जाये, जिसे 1980 में इंदिरा गांधी ने चुना था। 2023 के विधानसभा चुनावों में कर्नाटक तथा तेलंगाना में व्यापक प्रचार करने वाली प्रियंका गांधी ने हमेशा याद रखा कि प्रदेश के साथ उनकी पारिवारिक निकटता है। यदि पार्टी प्रियंका को या प्रियंका स्वयं कर्नाटक से मैदान में उतरने के लिए सहमत हो जाती हैं तो वह प्रदेश से चुनाव लड़ने वाली नेहरू-गांधी परिवार की तीसरी पीढ़ी होंगी। 
नितीश 94 लाख परिवारों को देंगे सहायता राशि 
आगामी लोकसभा चुनाव से पहले अपने ई.बी.सी., ओ.बी.सी. तथा दलित वोट बैंक को मज़बूत करने के लिए बिहार में नितीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने हाल ही में करवाए गए जातीय सर्वेक्षण के दौरान पहचान किए गए 94 लाख से अधिक परिवारों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाने का प्रस्ताव पारित किया है। मंगलवार को प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान इस संबंध में प्रस्ताव लाया गया। आर्थिक तौर पर कमज़ोर पृष्ठभूमि वाले 94,33,312 परिवारों को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने के प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई। राज्य सरकार तीन किस्तों में दो-दो लाख रुपये की राशि देगी, जिसमें पहली किस्त 25 प्रतिशत, दूसरी किस्त 50 प्रतिशत तथा तीसरी किस्त 25 प्रतिशत होगी। इस दौरान जनता दल (यू) सामाजिक न्याय के मुद्दे को नये सिरे से बढ़ाने हेतु बिहार में कपूरी की जयंती व्यापक स्तर पर मनाने की तैयारी कर रही है। कपूरी की जयंती मनाने के लिए 22-24 जनवरी को विभिन्न समारोह करवाए जाएंगे, जिनमें पटना के साथ-साथ उनका गांव पितौंझिजा भी शामिल होगा, जिसे अब समस्तीपुर ज़िले में कपूरी ग्राम का नाम दिया गया है। इसमें से कुछ समारोहों में नितीश कुमार शामिल होंगे। 
कामाख्या मंदिर के दर्शन करेंगे राहुल गांधी
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व वाली ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ इस समय देश के पूर्व-उत्तर राज्यों में से गुज़र रही है और कहा जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान 22 जनवरी को, जिस दिन अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह होगा, वह गुवाहाटी में प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर के दर्शन कर सकते हैं। विपक्ष के नेताओं में से तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घोषणा की थी कि इस दिन वह कोलकाता के काली घाट मंदिर में होंगी और सर्व-विश्वास प्रार्थना सभा आयोजित करेंगी जबकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह 22 जनवरी को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद अपने परिवार सहित अयोध्या जाएंगे। 
विपक्ष के वरिष्ठ नेताओं मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी तथा अधीर रंजन चौधरी, शरद पवार, लालू प्रसाद यादव तथा उद्धव ठाकुर ने यह कहते हुए इस समारोह के निमंत्रण को ठुकरा दिया कि भाजपा ने एक निर्माणाधीन मंदिर को स्थापित करने के लिए बहुत जल्दबाज़ी दिखाई है और उस पर अपने वोट बैंक को मज़बूत करने का आरोप लगाते हुए उसकी आलोचना भी की है। 
सपा व कांग्रेस के मध्य दूरियां 
उत्तर प्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी व कांग्रेस के बीच तब एक बार फीके संबंधों की बात सामने आई, जब सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने संकेत देते हुए कहा कि वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व वाली ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ में भाग नहीं ले सकते, क्योंकि उन्हें न तो कांग्रेस और न ही भाजपा द्वारा करवाए जा रहे किसी भी कार्यक्रम का निमंत्रण भेजा गया है। 
दूसरी ओर अखिलेश यादव ने पार्टी की ‘संविधान बचाओ, देश बचाओ समाजवादी पी.डी.ए. (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) यात्रा’ को हरी झंडी दिखाई जिसका उद्देश्य डा. भीम राव अम्बेदकर, डा. राम मनोहर लोहिया तथा मुलायम सिंह यादव की विचारधारा को गांव-गांव तक पहुंचाना है। इस दौरान कांग्रेस तथा सपा ने लोकसभा चुनाव को लिए सीटों के विभाजन पर चर्चा के लिए बुधवार को बैठक की, परन्तु कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ। हालांकि दोनों पक्षों ने जल्द ही एक सार्थक समझौते पर पहुंचने की उम्मीद जताई। सूत्रों के अनुसार समाजवादी पार्टी प्रदेश में कांग्रेस के लिए 12 से अधिक सीटें छोड़ने को तैयार नहीं थी, परन्तु दूसरी ओर कांग्रेस सीटों के विभाजन के लिए 2009 को आधार बनाना चाहती थी। 
आंध्र प्रदेश में भाई-बहन के बीच टक्कर 
2024 के लोकसभा चुनाव तथा आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रैड्डी की बेटी वाई.एस. शर्मिला को आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष नियुक्त किया है जबकि शर्मिला राज्य में अपने भाई तथा मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रैड्डी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी। हालांकि दोनों राजशेखर रैड्डी की विरासत के सच्चे वारिस होने के दावों के लिए जम कर मुकाबलेबाज़ी करेंगे। 
जगन ने शुरुआत में प्रदेश की लगभग प्रत्येक योजना का नाम अपने पिता के नाम पर रखा था। अब शर्मिला अपने पिता का सच्चा घर कहलाने का दावा कांग्रेस में वापस लाने की उम्मीद कर रही है। कांग्रेस नेतृत्व ने दृढ़ता से विश्वास जताया है कि शर्मिला कांग्रेस को अपना पुराना सम्मान प्राप्त करने में मदद करेगी। उल्लेखनीय है कि 2004 तथा 2009 में लगातार विधानसभा चुनाव जीतने के बाद से पार्टी के पास वर्तमान समय में प्रदेश में एक भी विधायक नहीं है। 
(आई.पी.ए.)