तमिलनाडु—चुनाव चर्चा

अप्रैल माह में तीन दक्षिण राज्यों तमिलनाडु, केरल तथा केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में चुनाव हो रहे हैं। पिछले दिनों द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (डी.एम.के.) ने अपना चुनाव मैनिफैस्टो (चुनाव घोषणा पत्र) भी जारी किया और इसके साथ ही अपने तथा अपने सहयोगियों की सीटों का विवरण भी दिया है। इस बार भी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस डी.एम.के. के साथ मिल कर चुनाव लड़ रही है। जहां तक इस राष्ट्रीय पार्टी का संबंध है, इस महत्वपूर्ण दक्षिणी राज्य में यह लगातार यत्नों के बावजूद विगत लम्बी अवधि से अपना बड़ा प्रभाव बनाने में असमर्थ रही है। दशकों पहले इन दक्षिणी राज्यों में कांग्रेस की तूती बोलती थी, परन्तु डी.एम.के. तथा ए.आई.ए.डी.एम.के. (आल इंडिया अन्ना द्राविड़ मुन्नेत्र कड़गम) आदि प्रांतीय पार्टियों के उभार के बाद इन दोनों पार्टियों के बीच ही चुनाव के माध्यम से सत्ता हस्तांतरित होती रही है।
करुणानिधि तथा जय ललिता जैसे शीर्ष नेताओं का आपसी राजनीतिक विरोध एक प्रकार से निजी दुश्मनी में बदलता रहा है। कांग्रेस लगातार यहां छोटे राजनीतिक खिलाड़ी के रूप में ही मैदान में उतरती रही है। पिछली बार यहां चुनाव 2021 में हुए थे। उस समय भी कांग्रेस डी.एम.के. की सहयोगी थी। डी.एम.के. ने राज्य की कुल 234 सीटों में से 188 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे 133 सीटों पर जीत मिली थी। कांग्रेस को मात्र 25 सीटें मिली थीं, जिनमें से वह सिर्फ 18 सीटों पर ही जीत प्राप्त कर सकी थी। इस बार डी.एम.के. 164 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। शेष 70 सीटों पर उसकी दर्जन भर सहयोगी पार्टियां चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस को इस बार भी मात्र 28 सीटों पर लड़ना पड़ रहा है। दूसरी ओर ए.आई.ए.डी.एम.के. भी अपनी सहयोगी पार्टियों के साथ मिल कर चुनाव लड़ रही है। उसे 169 सीटों, भाजपा को 27 सीटों और उसकी आधा दर्जन सहयोगी पार्टियों को बाकी बची सीटों पर चुनाव लड़ना पड़ेगा। 
इस बार इन चुनावों में एक तीसरी पार्टी भी दाखिल हो गई है, जिसे किसी भी तरह दृष्टिविगत नहीं किया जा सकता। तमिलनाडु के लोकप्रिय अभिनेता विजय ने इन चुनावों में उतरने की घोषणा की है। उन्होंने कुछ समय पहले अपनी पार्टी तामिलगा वेतरी कड़गम (टी.वी.के.) बनाई थी। उन्होंने सभी 234 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है। विगत लम्बे समय से तमिलनाडु की राजनीति में जो बड़े रुझान सामने आए हैं। वे हैं अधिकतर पार्टियां के नेताओं द्वारा परिवारवाद को लगातार उत्साहित करना तथा मुफ्त की योजनाओं की घोषणा करके चुनाव जीतने का यत्न करना। अभिनेता विजय ने भी अपने चुनाव घोषणा पत्र में युवाओं से लेकर महिलाओं तक को मुफ्त की रेवड़ियां बांटने की घोषणा की है। ऐसा उन्होंने डी.एम.के. के नक्श-ए-कदम पर चलते हुए किया है, क्योंकि डी.एम.के. नेता तथा मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने भी रविवार को अपने चुनाव घोषणा पत्र में महिलाओं को पहले ही प्रत्येक माह दी जाती हज़ार रुपये की राशि बढ़ा कर 2000 करने, किसानों को मुफ्त बिजली देने, बुज़ुर्गों को 2000 रुपये पैंशन देने के अलावा अन्य अनेक मुफ्त के तोहफे देने की घोषणा की है। ए.आई.ए.डी.एम.के. ने भी ऐसी मुफ्त की घोषणाओं की सूची और लम्बी कर दी है। 
सबसे पहले मुफ्त की रेवड़ियां बांटने का काम इस राज्य से ही शुरू हुआ था, जिसकी जाग धीरे-धीरे देश के सभी राज्यों को लग चुकी है और इसने चुनाव-राजनीति के इस नकारात्मक रुझान को और भी उजागर कर दिया है। यही कारण है कि आज देश के अधिकतर राज्यों की आर्थिकता बुरी तरह डावांडोल  हो चुकी है। आधारभूत ढांचा छलनी-छलनी हो रहा है। इसके साथ ही बेरोज़गारी तथा गरीबी ने आज अधिकतर राज्यों को एक तरह से ग्रहण लगा दिया है। नि:संदेह इस वोट-राजनीति के कारण देश का भविष्य और भी धूमिल होता प्रतीत होने लगा है। राजनीति में चल रहा नकारात्मक रुझान कब थमेगा, अभी इस संबंध में कुछ कहा नहीं जा सकता। 

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द 

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