गेहूं के गुल्ली डंडे पर पीएयू की सिफारिशें बेअसर


कौहरियां, 13 जनवरी (अ.स) : खेती में किसान के लिए हर रोज नई मुश्किलें ले सामने आ रही है, जिसके साथ किसान आर्थिक तौर पर लगातार टूटता जा रहा है। गेहूं की फसल में पैदा हुए नदीन गुल्ली डंडा, बूईं आदि ने फसल को भारी नुक्सान पहुंचा रहे हैं और जिसके साथ किसान का आर्थिक घाटा बढ़ता जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि किसानों को गुल्ली डंडे के लिए पंजाब कृषि यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों द्वारा सुझाई नदीननाशक दवा बिल्कुल बेअसर हो चुकी है। किसान अपने तजुर्बे साथ तीन एकड़ की दवा को घोल तैयार कर एक एकड़ में छिड़काव कर रहा है। इस संबंधी किसान कमिकर सिंह हरीगढ़, गुरजंट सिंह उभा, नछतर सिंह ऊभा, निंदर सिंह आदि ने बताया कि कई खेतों में गुल्ली डंडा गेंहू के ऊपर से हो चुका है दो स्प्रे करने पर काबू नहीं हो रहा। हर वर्ष यह नदीन फसलों का नुक्सान कर रहा है। गत वर्ष पीएयू के माहिर भी दो बार हमारे खेतों का दौरा कर गए थे परंतु नदीन खत्म नहीं हुए। इस बार पीएयू के माहिर ट्रायल के तौर पर स्प्रे देकर गए थे। परंतु नदीन खत्म नहीं हुए। उक्त दवा का प्रयोग करने पर नदीन ओर हराभरा दिखने लग गया है। किसानों ने कहा कि खेती विज्ञानी सिर्फ खेतों के दौरे कर गोगलूयां से मिट्टी झाड़ रहे है। जबकि परिणाम सफल है। किसानों ने कहा कि कुछ खेतों में नदीन बिल्कुल मर गए थे। परंतु पानी लगाने पर फिर हरा हो गया है और दवा की जांच की मांग की। क्योंकि किसान तीन एकड़ की दवा एक एकड़ पर छिड़काव कर रहे हैं, जिसके साथ किसान की जेब खाली हो रही है। इस संबंधी डा. सुखदेव सिंह सिद्धू ज्वाइंट डायरैक्टर कृषि विभाग के साथ बातचीत की तो उन्होंने कहा कि नदीन प्रभावित खेतो में पीएयू की टीम के साथ मिल दौरा करेंगे और नदीन न मरने के कारण का पता लगाया जाएगा।