रेगिस्तान में नमक का दरिया सांभर झील


राजस्थान में जोधपुर से जयपुर की ओर रेलमार्ग से आते हुए सांभर झील दिखायी देती है। यह झील चारों तरफ  से अरावली पर्वतमाला से घिरी हुई है। दूर से देखने पर यहां नमक के बड़े-बड़े धवल टीले दिखायी देते हैं, दरअसल इस झील के लवणीय पानी को क्यारियों में सुखाकर इनसे नमक बनाया जाता है। सांभर झील भारत की खारे पानी की दूसरी सबसे बड़ी झील है। भारत की खारे पानी की सबसे झील चिल्का झील है जो ओड़िसा राज्य में स्थित है, यह झील जयपुर, अजमेर और नागेर की सीमा बनाती है।प्रकृति का यह अद्भुत करिश्मा ही है कि इस झील का पानी इतना खारा है कि इससे नमक उत्पादित होता है। भूगोलविदो का मानना है कि ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली दक्षिणी पश्चिमी हवाओं के कारण कच्छ की खाड़ी से सोडियम क्लोराइड के हवा से उड़कर आने वाले कण यहां गिरते हैं और बाद में यह पानी में घुलकर, इस खारे पानी की झील में तब्दील हो जाते हैं। झील में टेथिस सागर के अवशेष पाये जाते हैं। राजस्थान में स्थित सांभर झील से उत्तम किस्म का नमक उत्पादित किया जाता है और यहां राज्य के कुल उत्पादन का 80 प्रतिशत नमक यहीं पर तैयार होता है। समुद्रतल से 1,200 फुट की ऊंचाई पर स्थित यह झील जब भरी रहती है तब इसका क्षेत्रफल 90 वर्ग मील तक रहता है। इसका अपवाह लगभग 500 वर्ग मीटर में फैला है, यह झील पूर्व से उत्तर पश्चिम की ओर लगभग 32 किलोमीटर लंबी तथा 12 किलोमीटर तक चौड़ी है। गर्मी के दिनों में वाष्पीकरण की प्रक्रिया तीव्र होने के कारण इसका आकार बहुत कम रह जाता है। अनुमान है कि इस झील में प्रतिवर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 6000 टन नमक होता है, इसका क्षेत्रफल लगभग 140 वर्ग किलोमीटर है। यह झील जयपुर व नागौर जिले की सीमा पर स्थित है। यह जयपुर की फुलेरा तहसील में जयपुर से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां नमक का उत्पादन सांभर साल्ट्स लिमिटेड कंपनी द्वारा किया जाता है, जिसकी स्थापना 1964 में की गई थी और यहां सोडियम सल्फेट संयंत्र भी स्थापित किया गया है जिससे 50 टन सोडियम सल्फेट प्रतिदिन बनाया जाता है। भारत के कुल नमक उत्पादन का 8.7 प्रतिशत नमक अकेले सांभर झील से उत्पादित किया जाता है। सांभर झील में चार प्रमुख जल धाराएं- रूप नगर, मेघना, खारी और खांडेल आकर गिरती हैं जो वर्षाकाल में झील को जल से भर देती हैं। इस नदी का अपवाह क्षेत्र उत्तर में कांतली नदी, बेसिन से पूर्व में बाण्डी नदी प्रवाह क्रम, दक्षिण में मासी नदी बेसिन और पश्चिम लूनी नदी बेसिन से घिरा हुआ है।  झील में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में उत्तरी एशिया से फ्लेमिंगो प्रवासी पक्षी हर साल आते हैं, इन पक्षियों को देखने और इस झील का दीदार करने के लिए पूरे साल पर्यटक यहां आते हैं