आज विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेषर् बढ़ती जनसंख्या धरती के लिए सबसे बड़ा ़खतरा, दुनिया बढ़ रही है जनसंख्या विस्फोट की ओर



विश्व में बढ़ती जनसंख्या इस समय एक बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई है, क्याेंकि जिस गति से मानवीय आबादी बढ़ रही है। उस रफ्तार से ही मनुष्य प्राकृतिक स्रोतों का दोहन करता जा रहा है, जंगल कम हो रहे हैं, पेयजल की कमी हो रही है और इसके साथ ही पर्यावरण में तपिश भी बढ़ रही है, जिस कारण समुद्र तल की ऊंचाई भी बढ़ रही है। समझा जा रहा है कि समुद्र में बढ़ता पानी व पिघलते ग्लेशियर धरती पर जनसंख्या वाले अधिकतर क्षेत्रों को जलमग्न कर सकते हैं। चाहे विज्ञान बढ़ती जनसंख्या के लिए नए स्रोतों की खोज कर रहा है परंतु अधिकतर वैज्ञानिक यह समझा रहे हैं कि जनसंख्या की यह बेहिसाब वृद्धि धरती को मनुष्यों के रहने के काबिल नहीं रहने देगी, वह इसे जनसंख्या विस्फोट का नाम  भी दे रहे हैं। इसीलिए वैज्ञानिक मनुष्यों को बसाने के लिए अन्य धरतियों की खोज भी कर रहे हैं।
गौरतलब है कि 1987 की 11 जुलाई को विश्व की जो जनसंख्या केवल 500 करोड़ थी, अब 2018 में डेढ़ गुणा अर्थात् 763 करोड़ 48 लाख 83 हज़ार के आंकड़े को पार कर चुकी है। यह 2023 में 800 करोड़ व 2056 में 1000 करोड़ से भी अधिक हो जाएगी।
पहली बार विश्व जनसंख्या दिन ‘फाइव बिलियन डे’ के रूप में मनाया गया
बात 11 जुलाई 1987 की है, जब इस दुनिया की जनसंख्या 5 बिलियन अर्थात् 500 करोड़ पर पहुंची। इस दिन को ‘फाइव बिलियन डे’ के रूप में मनाया गया था। बाद में इसी दिन से ही प्रेरणा लेकर यू.एन.ओ. के यूनाइटेड नेशन विकास प्रोग्राम की गवर्निंग कौंसिल ने 11 जुलाई 1989 को पहला ‘वर्ल्ड पापुलेशन डे’ अर्थात् ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ मनाया। इस दिन को मनाने का उद्देश्य मानवता की तरक्की के लिए कुछ ज़रूरी विषयों से विश्व को सुचेत करना था। इन विषयों में परिवार नियोजन, महिला-पुरुष में समानता, गरीबी का खात्मा, मानवाधिकार व मां का स्वास्थ्य जैसे विषय शामिल थे।
दिसम्बर 1990 में यू.एन.ओ. की जनरल असैम्बली ने प्रस्ताव नम्बर 45/216 पारित कर 11 जुलाई को हर वर्ष विश्व जनसंख्या दिवस मनाने का फैसला कर दिया। गौरतलब है कि 11 जुलाई 1990 को 90 से अधिक देशों में यह दिन मनाया गया था। यू.एन.ओ. की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में अभी भी 69 सबसे गरीब देशों में 2250 लाख ऐसी महिलाएं हैं जो परिवार नियोजन अपनाना चाहती हैं परंतु उनकी पहुंच इस उद्देश्य के लिए बने सुरक्षित स्रोतों व तरीकों तक नहीं है। 
यू.एन.ओ. के अनुसार परिवार नियोजन में किया निवेश वास्तव में आर्थिक व अन्य मानवीय विकास के काम भी आता है। इसीलिए विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर 11 जुलाई 2017 को लंदन में परिवार नियोजन शिखर सम्मेलन करवाया गया।
महाद्वीपों की जनसंख्या
इस समय दुनिया की 59.55 फीसदी जनसंख्या तो केवल एशिया में ही रहती है, जोकि 454.5 करोड़ से अधिक है। दूसरा नम्बर अफ्रीका महाद्वीप का है, जहां बहुत गरीबी है। अफ्रीका महाद्वीप में 128.7 करोड़ से ऊपर है। इसके विपरीत अमीर व खुशहाल माने जाते क्षेत्र यूरोप में केवल 74.2 करोड़ लोग ही रहते हैं, जो विश्व की कुल जनसंख्या का पूरा 10 प्रतिशत भी नहीं बनता। दक्षिणी अमरीका देशों की आबादी 42.8 करोड़ के करीब है, जो कुल आबादी का 5.61 प्रतिशत भाग है। उत्तरी अमरीका महाद्वीप जिसमें अमरीका, कनाडा व मैक्सिको जैसे देश भी आते हैं, की जनसंख्या 58.7 करोड़ से अधिक है जोकि विश्व जनसंख्या का कुल 7.7 फीसदी ही बनता है। जबकि ओशनीया महाद्वीप के देश जिनमें आस्ट्रेलिया व न्यूज़ीलैंड के अलावा 19 और छोटे देश व टापू भी शामिल हैं, में दुनिया की कुल जनसंख्या का केवल 0.54 प्रतिशत ही रहता है जिनकी संख्या केवल 4.1 करोड़ के करीब है।
भारत, चीन, अमरीका, रूस
यहां उल्लेखनीय है कि एशिया को छोड़कर अन्य सभी महाद्वीपों से ज्यादा जनसंख्या चीन व भारत में रहती है। इस समय चीन में 141 करोड़ 50 लाख से अधिक लोगों की जनसंख्या है। जबकि भारत में इस समय 135 करोड़ 40 लाख से अधिक लोग रहते हैं, जबकि इसके विपरीत अमरीका जैसे देश की आबादी 32 करोड़ 67 लाख लोग हैं और रूस में केवल 14 करोड़ 39 लाख लोग ही रहते हैं।