कत्थक नृत्यांगना उर्मिला नागर


‘संगीत गंगा’ की संस्थापक गुरु एवं विदेशी तथा स्वदेशी मंचों का चर्चित नाम उर्मिला नागर का कहना है कि कत्थक नृत्य शैली की दो शाखाएं हैं एक है जयपुर घराना। राजस्थान के मंदिरों से उदगम स्रोत इस शैली के कत्थक का माना है। जयपुर घराने में ‘नमस्कार’ व ‘प्रणाम’ की मुद्राएं हैं जो सुर, ताल, लय के मिश्रण पर हाव, भाव, अभिनय के साथ जब मंच पर पैरों का काम प्रस्तुत किया जाता है तब ‘चक्कर’ ‘परणे’ व भाव तथा अभिनय से जो कत्थक निकल कर आता है वही सटीक व सार्थक माना जाता है।  दूसरी ओर कत्थक की नृत्यशैली मुगलकाल में जब मुगल शासकों के दरबार में पहुंची तो वहां ‘सलामी’ की प्रधानता प्रमुख रही जबकि शेष पक्ष वही हैं जो जयपुर घराने के हैं।

-सतीश शर्मा