अंदरूनी खींचतान: तीसरे फ्रंट के गठन पर प्रश्नचिन्ह



जालन्धर, 12 फरवरी (मेजर सिंह) : कांग्रेस व अकाली-भाजपा गठजोड़ को हराने के लिए यत्नशील पांच राजनीतिक संगठनों द्वारा तीसरा फ्रंट बनाने के हो रहे प्रयासों पर अंदरूनी खींचतान के कारण सवालिया चिन्ह लगना शुरू हो गया है। सुखपाल सिंह खैहरा की अध्यक्षता में पंजाबी एकता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, अकाली दल टकसाली व बैंस ब्रदज़र् की लोक इंसाफ पार्टी और डा. धर्मवीर गांधी के पंजाब द्वारा लोकसभा चुनाव हलके ढूंढने के लिए पंजाब जम्हूरी गठजोड़ कायम करने के लिए 4-5 बैठकें हो चुकी हैं, परंतु उक्त पक्षों के नेता अभी तक न तो कोई राजनीतिक विचारधारक एकजुटता का ही प्रकटावा कर सके हैं और न ही सीटों के बंटवारे संबंधी किसी सहमति पर वापिस आ सकें। यत्नशील पक्षों के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार बैठकों में सीटों के बंटवारे का मामला आए दिनों और उलझता जा रहा है। पहली दो बैठकों में तो आनंदपुर साहिब की सीट को लेकर टकसालियों और बसपा के पेंच फंसे हुए हैं। टकसाली इस सीट पर पार्टी में नए शामिल नेता पूर्व स्पीकर वीरदविन्द्र सिंह को उम्मीदवार बनाने के लिए अटल हैं, जबकि बसपा इस सीट पर ‘आप’ को छोड़़कर आए गायक जस्सी जसराज को चुनाव लड़ाने के लिए अड़ी हुई है। बावजूद यत्नों के बीच यह सीट बड़ी रुकावट बनी हुई थी, परंतु पिछले दिनों खैहरा की गांव रामगढ़ वाली रिहायश पर पांचों पार्टियों के नेताओं की बैठक में बैंस ब्रदज़र् द्वारा पांच सीटों लुधियाना, फतेहगढ़ साहिब, संगरूर, अमृतसर और एक अन्य सीट पर दावा जताने के साथ फ्रंट निर्माण का मामला भी असमंजस में नज़र आता लग रहा है। अकाली दल टकसाली भी माझे की अमृतसर व गुरदासपुर सीटें छोड़कर आनंदपुर साहिब व संगरूर की ओर हाथ मार रहा है। बताया जाता है कि संगरूर से तो टकसालियों ने दावा ढीला कर लिया है, परंतु आनंदपुर साहिब छोड़ने के लिए तैयार नहीं। बसपा द्वारा जालन्धर, होशियारपुर, आनंदपुर साहिब व फिरोज़पुर सीट मांगी जा रही है। 
सूत्रों का कहना है कि फिरोज़पुर सीट तो वह छोड़ सकते हैं, परंतु बाकी तीन सीटें लेने के लिए बसपा नेता लकीर खींची बैठे हैं। दिलचस्प बात यह है कि गठबंधन के लिए केन्द्रीय बिन्दु के तौर पर सरगर्म सुखपाल सिंह खैहरा की पंजाबी एकता पार्टी को सिर्फ दो बठिंडा तथा फरीदकोट हलके ही बच रहे हैं। बसपा व टकसालियों के बीच आनंदपुर साहिब की सीट के झगड़े के साथ बैंस भाईयों द्वारा पांच सीटों पर किया दावा फ्रंट को अधिक करंट मारने वाला हो सकता है। एक महीने के यत्नों के बावजूद तीसरा फ्रंट खड़ा न हो सकने के कारण जहां आम लोगों में सवाल उठने शुरू हो गए हैं तथा तीसरा विकल्प उभरने के बारे बना माहौल ढलना शुरू हो गया है, वहां इन पार्टियों के अंदर भी अविश्वसनीयता का माहौल बनने जैसे हालात बन रहे हैं। बसपा नेता सरेआम कहने लग गए हैं कि यदि टकसाली आनंदपुर सीट छोड़ने के लिए न माने तो वह टकसालियों को छोड़कर बाकी गुटों के साथ गठजोड़ को प्राथमिकता देंगे। इसी तरह बैंस भाईयों द्वारा पांच सीटों के लिए दावा जताने का कदम खैहरा तथा डा. गांधी के शिविरों को हज़म नहीं हो रहा। पता लगा है कि इस सारे माहौल में सक्रिय रोल अदा कर रहे खैहरा गुट के विधायक व नेता घुटन महसूस करने लगे हैं। ऐसे नेताओं का कहना है कि करीब एक माह का समय गठजोड़ निर्माण में ही समाप्त कर देने से लोगों के अंदर उनके बने अक्स को नुक्सान पहुंचा है तथा अब और समय बर्बाद करना आत्मघाती होगा। सूत्रों का मानना है कि यदि सब गुटों की सहमति न भी बनी तो सहमति ज़ाहिर करने वाले गुटों द्वारा अपने फ्रंट की भी घोषणा हो सकती है।