विकास के नए द्वार खुलने की सम्भावना
इस बार 77वें गणतंत्र दिवस पर जिन विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है, उनमें यूरोपियन यूनियन संगठन की प्रमुख उरसुला वॉन डेर लेआन के साथ यूरोपियन यूनियन कौंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा को भी बुलाया गया है। इन दोनों के साथ यूरोपियन यूनियन की विदेश नीति के प्रमुख काजा क्लास भी शामिल हैं। इस समय यूरोपियन यूनियन में 27 देश शामिल हैं। चाहे पहले इसमें शामिल और फिर अलग हुआ ब्रिटेन यूरोप का महत्त्वपूर्ण देश है परन्तु बड़ी सीमा तक आज भी वह इस संगठन का दम भरता है। विगत दिवस स्विट्ज़रलैंड के दावोस शहर में हुई भव्य अन्तर्राष्ट्रीय कान्फ्रैंस में विगत वर्ष भर से अमरीका और यूरोपियन संगठन में सुलगते मतभेद लपटों के रूप में सामने आए थे।
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दूसरी बार अपना पद सम्भालते ही अन्य देशों के साथ व्यापार में अपनी कर (टैरिफ) संबंधी नीतियों में इस तरह के बदलाव किए थे, जिससे विश्व भर में उथल-पुथल मच गई थी। ट्रम्प की इन नीतियों पर विवाद खड़े हुए थे और उनकी स्थान-स्थान पर आलोचना होने लगी थी। जिन बहुत-से देशों ने इन नीतियों का विरोध किया था, उनमें रूस और चीन सहित यूरोपियन संगठन भी शामिल था। ट्रम्प ने इज़रायल और गाज़ा पट्टी में शांति लाने और रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करवाने के लिए बड़े बयान दिए थे परन्तु अब तक उन्हें इन यत्नों में कोई बड़ी सफलता नहीं मिल सकी। यूरोपियन यूनियन के जिन देशों ने ट्रम्प की ग्रीनलैंड हथियाने की नीति का विरोध किया था, उन पर भी ट्रम्प ने सख्त टैरिफ लगाने के प्रति कदम उठाने शुरू किए थे, जिस कारण यूरोपियन संगठन में उसका कड़ा विरोध होना शुरू हो गया। यह बात खुल कर स्विट्ज़रलैंड के दावोस में सामने आई थी। भारत को भी ट्रम्प की टैरिफ नीतियों की जकड़न महसूस होती रही है। इसलिए विश्व भर के देशों ने अपनी व्यापारिक नीतियों को नई दिशाओं की ओर मोड़ना शुरू कर दिया है। चाहे विगत 23 वर्षों से यूरोपियन संगठन और भारत में आपसी व्यापारिक और अन्य प्रत्येक तरह का सहयोग बढ़ाने संबंधी लगातार बातचीत की जाती रही है परन्तु ट्रम्प की नीतियों के कारण इन दोनों में आपसी आदान-प्रदान को क्रियात्मक और ठोस रूप देने की बात और भी तेज़ हो गई है।
26 जनवरी के समारोहों में यूरोपियन यूनियन संगठन के प्रमुख नेताओं के शामिल होने के बाद अगले ही दिन दोनों पक्षों में इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की सम्भावना है। इन समझौतों में शहरी विकास, ग्रीन ऊर्जा, डिज़ीटल आदान-प्रदान और व्यापार शामिल होंगे। भारत और यूरोपियन यूनियन में होने वाले व्यापार समझौतों की रूप-रेखा तैयार हो चुकी है। आगामी 5 वर्ष में इसे दोगुणा किए जाने की योजना बनाई गई है। 200 करोड़ की साझी जनसंख्या वाले इन देशों में 28 लाख करोड़ रुपए का व्यापारिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे दोनों पक्षों में यह समझौता विकास के नए द्वार खोलने की सम्भावना रखता है। भारत के लिए भी इस समझौते के बेहद कारगर होने की सम्भावना प्रकट की जा रही है, जिससे अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर भारत के कद और भी ऊंचा और प्रभावशाली बना दिखाई देगा, जो देश के लिए विकास के नये द्वार खोलने में समर्थ होगा।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

