कांग्रेस का अनुशासन
विगत कुछ दिवस से पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल देखी जा रही है। इस बार चर्चा का विषय कांग्रेस पार्टी है, जिसमें विगत कुछ समय से काटो-कलेश पड़ा दिखाई देता है। विगत लगभग दो मास से पार्टी के कई वरिष्ठ नेता ऐसी बयानबाज़ी करते रहे हैं, जिससे यह प्रभाव पड़ता रहा है कि एक बार फिर यह पार्टी आपसी जटिलाओं में फंस गई है। पंजाब में विधानसभा चुनावों में वर्ष भर का समय शेष है। प्रदेश से संबंधित सभी पार्टियों ने इसके लिए तैयारियां करनी शुरू कर दी हैं और अपनी-अपनी गतिविधियां भी इस दिशा में तेज़ कर दी हैं। इस बार अब तक की स्थितियों के अनुसार प्रशासन चला रही आम आदमी पार्टी का चुनावों में मुख्य मुकाबला कांग्रेस के साथ ही होने की बड़ी सम्भावना है।
प्रदेश में विधानसभा के विगत चुनाव 2022 में हुए थे। उस समय भी कांग्रेस बहुत बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में दिखाई देती थी, परन्तु चुनावों में यह आम आदमी पार्टी से बुरी तरह पिछड़ गई थी। उस हार का एक बड़ा कारण पार्टी के भीतर गुटबंदी को माना गया था। इसी ही तरह हरियाणा में हुए विधानसभा के पिछले चुनावों में भी भाजपा और कांग्रेस का मुख्य मुकाबला था। उन चुनावों में भी कांग्रेस को भारी समर्थन मिलता दिखाई दे रहा था परन्तु वहां भी पार्टी की आंतरिक फूट के कारण इसकी नमोशीजनक हार हुई और भाजपा बड़े अंतर से तीसरी बार सरकार बनाने में सफल हो गई थी। इस बार भी जब पंजाब के चुनाव नज़दीक आ गए हैं तो कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की बयानबाज़ी के कारण कई तरह की चर्चाएं छिड़ गई हैं और इस कारण बड़े विवाद भी पैदा हो गए हैं। विगत दिवस चंडीगढ़ में कांग्रेस के अनुसूचित जातियों संबंधी एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता द्वारा अनुसूचित जातियों के प्रतिनिधित्व को लेकर प्रकट किए गए विचारों से पार्टी में इतनी बड़ी चर्चा छिड़ गई है कि इसने दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान में भी चिंता पैदा कर दी है।
पहले बहुत समय से यह प्रभाव बना रहा है कि कांग्रेस हाईकमान पंजाब कांग्रेस की गुटबंदी से निपटने संबंधी या तो लापरवाह है या असमर्थ है। नि:संदेह हाईकमान पंजाब कांग्रेस की गुटबंदी से निपटने में कमज़ोरी दिखाता रहा है, परन्तु इस बार पैदा हुई स्थिति संबंधी जिस तरह केन्द्रीय नेताओं ने अपना व्यवहार धारण किया है, उससे पंजाब कांग्रेस में एक कड़ा सन्देश ज़रूर गया है। ऐसे संदेश के बाद यदि पार्टी अपने भीतर अनुशासन लाने में सफल हो जाती है तो इसका पार्टी को लाभ होगा। नि:संदेह इस सन्दर्भ में आगामी समय में प्रदेश कांग्रेस की प्रत्येक भीतरी गतिविधि को सभी की ओर से ध्यान से देखा जाएगा कि पार्टी स्वयं को किस सीमा तक बदलती है?
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

