राष्ट्रीय मतदाता दिवस : मज़बूत लोकतंत्र का आधार है मतदाता
आज के लिए विशेष
एक लोकतांत्रिक राज्य की अवधारणा में आम जन को आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति के समान अवसरों की उपलब्धता एवं क्रियान्वयन को प्रमुखता दी गई है। शिक्षा, स्वास्थ्य एवं संस्कृति के विकास के लिए प्रत्येक नागरिक एवं समाज को स्वतंत्रता होती है। जन-कल्याणकारी राज्य की अवधारणा भारत वर्ष के लिए नवल विचार नहीं है क्योंकि यहां राज व्यवस्था में यह चिंतन प्राचीन काल से ही प्रभावी रहा है।
वास्तव में जन-कल्याणकारी राज्य का पथ लोकतांत्रिक निर्वाचन प्रक्रिया की भूमि से ही गुजरता है, क्योंकि लोकतंत्र में तानाशाही और निरंकुश सत्ता अधिनायक के लिए कोई जगह नहीं होती। इस प्रणाली में जनता को जनहितैषी प्रतिनिधि चुनने एवं जन-हितकारी सत्ता स्थापित करने का अधिकार होता है। साथ ही अपेक्षानुरूप प्रदर्शन करने में अक्षम होने पर जनता सत्ता के परवर्तन करने का हक भी रखती है। यह सम्भव होता है चुनाव से, जो गोपनीय मतदान प्रक्रिया द्वारा होता, जिसका संचालन भारत निर्वाचन आयोग करता है। मतदान के प्रति जन जागरूकता एवं मतदाता भागीदारी बढ़ाने हेतु प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है।
लोकतंत्र के बारे में अब्राहम लिंकन का वह कथन प्रकाश स्तंभ बन चुका है जिसमें कहा गया है कि लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा चुनी गयी शासन प्रणाली है। यह प्रणाली तभी सार्थक सिद्ध होगी जब समाज लोकतांत्रिक प्रक्रिया से अवगत होते हुए मतदान के महत्व को समझे। अत: मतदाताओं में मतदान करने के प्रति उत्साह जगाने, निर्भय होकर मतदान करने,18 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके युवक-युवतियों का पंजीकरण कर नये मतदाता बनाते हुए फोटोयुक्त मतदाता पहचान पत्र उपलब्ध कराने तथा प्रत्येक मतदान केंद्र एवं बूथ में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए 25 जनवरी को प्रति वर्ष राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। समाज जागरण के लिए इस दिन विविध कार्यक्रमों का आयोजन सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं एवं संगठनों द्वारा किया जाता है। स्कूलों, कालेजों एवं विश्वविद्यालयों में वाद-विवाद प्रतियोगिता, निबंध लेखन, क्विज प्रतियोगिता, रंगोली, चित्रकारी एवं रेखांकन, भाषण एवं संगोष्ठियों का आयोजन करके मतदान के महत्व से आम जन को परिचित कराते हुए अपने मत के उचित प्रयोग हेतु जागरूक किया जाता है। मतदाता दिवस के आयोजन हेतु हर वर्ष एक थीम निर्धारित कर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वर्ष 2026 की थीम है—मेरा भारत, मेरा वोट, जो सामयिक एवं प्रेरक है।
उल्लेखनीय है कि 25 जनवरी, 1950 को भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था के रूप में की गयी थी। आयोग की 61वीं वर्षगांठ के अवसर पर 25 जनवरी, 2011 को प्रथम राष्ट्रीय मतदाता दिवस का शुभारंभ तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल द्वारा किया गया था। तब से प्रत्येक वर्ष सम्पूर्ण देश में इस दिवस को उत्सव की तरह मनाते हुए व्यापक स्तर पर विविध कार्यक्त्रम आयोजित किये जाते हैं। ध्यातव्य है कि चुनाव आयोग के कार्यों में लोक सभा, राज्य सभा, विधान सभाओं सहित राष्ट्रपति एवं उप-राष्ट्रपति के चुनाव करवाना शामिल है। सहयोग के लिए प्रत्येक प्रदेश में राज्य निर्वाचन आयोग भी गठित है जो विभिन् नपंचायतों एवं नगर निकायों आदि के चुनाव कराता है। आयोग की इस 75 साल से अधिक की सांस्थानिक यात्रा में तमाम उतार चढ़ाव आये, अच्छे-बुरे अनुभवों से भी गुज़रना हुआ, लेकिन चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, गतिशील, पारदर्शी, सर्व समावेशी, लोकतांत्रिक एवं न्यायपूर्ण बनाये रखने तथा बेहतरी के लिए सतत साधनारत रहा है। इसीलिए आज हम आयोग के कार्यों में स्तरोन्नयन एवं गुणवत्तापूर्ण बदलाव महसूस कर पा रहे हैं।
बहुसदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र की जगह एकल सदस्यीय निर्वाचन बनाने, साधारण छपी हुई मतदाता सूची के स्थान पर कम्प्यूटरीकृत फोटो युक्त मतदाता सूची प्रकाशित करने, सचित्र मतदाता पहचान पत्र निर्गत करने तथा कागज़ के मतपत्र की जगह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से मतदान कराने तथा मतदाता द्वारा अपने मतदान को ईवीएम में डालने के बाद देखने हेतु विविपैट इस्तेमाल करने जैसे सुधारवादी कदम उठाये गये हैं। देश की सर्वोच्च शक्ति संविधान निर्देशित लोकतंत्र में निहित है और सुदृढ एवं समर्थ लोकतंत्र का आधार मतदाता हैं, जनता है। वास्तव में राष्ट्रीय मतदाता दिवस लोकतंत्र के प्रति आस्था एवं विश्वास की समृद्धि का पर्व है। (अदिति)



