रंग बदलते फूल
बच्चो! आज मैं आपको जिस प्रयोग के बारे में बताने जा रही हूं उसमें आप देखेंगे कि रंगीन पानी को सोखने से फूलों का रंग कैसे बदल जाता है। यह केपिलरी एक्शन को समझने का बहुत अच्छा तरीका है, जिसमें पौधे अपनी जड़ों से पानी लेते हैं और फिर वह पानी तनों से होता हुआ पत्तियों तक पहुंचता है। जब आप रंग बदलते हुए देखेंगे तो जान जायेंगे कि पौधों के अंदर पानी किस तरह से ट्रांसपोर्ट होता है। इस प्रयोग के लिए हम सफेद फूल लेगें और साथ ही गुलदान व फूड कलरिंग भी।
* सबसे पहले सफेद फूलों के तनों को पानी के अंदर एक खास कोण पर ट्रिम कर लें।
* इसके बाद अलग-अलग गुलदानों को आधा पानी से भर लें और हर गुलदान में अलग-अलग रंग के फूड कलर की कुछ बूंदें डाल दें।
* अब एक एक फूल आधे पानी से भरे गुलदानों में रख दें। इस सेटअप के बाद फूलों को रंग बदलता हुआ देखें।
* आप देखेंगे कि सुंदर सफेद फूल गुलाबी, नीले या हरे रंग के फूल बन गये हैं।
* यह सब कैसे हुआ? आप सोचें।
फूल ट्रिम किये हुए अपने तनों से रंगीन पानी को सोखने लगते हैं। यह पानी तनों में ऊपर उठकर फूलों व पत्तियों तक पहुंचता है। पौधों में जो सूक्ष्म ट्यूब होती हैं, उनके ज़रिये पानी केपिलरी एक्शन की वजह से ऊपर को चढ़ता है। गुलदानों के पानी में रंगीन डाई डालने की वजह से हम केपिलरी एक्शन को होता हुआ देख लेते हैं।
केपिलरी एक्शन क्या है?
लिक्विड (हमारे प्रयोग के संदर्भ में रंगीन पानी) में जो पतली जगहों (फूल के तने या स्टेम) से बहने की क्षमता होती है, बिना किसी बाहर के बल के जैसे ग्रेविटी (गुरुत्वाकर्षण) के, उसे केपिलरी एक्शन कहते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि केपिलरी एक्शन या केशिक क्रिया वह प्रक्रिया है, जिसमें कोई तरल पदार्थ, जैसे पानी, गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध किसी पतली नली या सूक्ष्म छिद्रों (जैसे तौलिये, मिट्टी) में ऊपर उठता है। यह मुख्य रूप से कोहिज्व (संसंजन- तरल अणुओं के बीच)) व एडहेसिव (आसंजन-तरल व नली की दीवार के बीच) बलों के संयुक्त प्रभाव की वजह से होता है।
जब पानी पौधे से वाष्पीकरण के कारण बाहर निकलता है, तो वह अपने तने से अधिक पानी ऊपर की ओर खींचता है, जिससे ज्यादा पानी उसके साथ आने लगता है। इसे ट्रांसपाइरेशन और कोहिज़न कहते हैं।
केपिलरी एक्शन पानी के मॉलिक्यूल्स के कोहिज़्व (संसंजन) व एडहेसिव (आसंजन) गुणों पर निर्भर करता है। पानी के मॉलिक्यूल्स एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं (कोहिज़न) और केपिलरी की दीवारों को भी (एडहेसिव)। इन गुणों की मदद से पानी गुरुत्वाकर्षण के विपरीत और पतली जगहों में बहता है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर




