बलोचिस्तान-लड़ाई जारी है
पाकिस्तान में जिस तरह जगह-जगह पर लपटें उठनी शुरू हुई हैं, उनके दृष्टिगत यह बात विश्वास के साथ कही जा सकती है कि धर्म के नाम पर बने इस देश का अनुभव बुरी तरह विफल होकर रह गया है। वर्ष 1971 में अलग बांग्लादेश बनने के बाद यह विश्वास और भी परिपक्व हो गया था कि किसी भी क्षेत्र की भाषा, सभ्याचार और मान्यताओं को धर्म की आड़ में ज्यादा समय तक छुपाया जाना बेहद कठिन है। यह बात बांग्लादेश की आज़ादी ने पूरी तरह सिद्ध कर दी थी। गत दिवस पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद पर जिस तरह आत्मघाती हमलावर ने हमला किया, उससे 70 से अधिक मौतें हुईं और सैकड़ों ही घायल हो गए। एक ही धर्म के अनुयायियों सुन्नी और शिया समुदायों में सैकड़ों वर्षों से आपसी ऩफरत की यह लड़ाई चलती आ रही है। समय-समय पर दोनों समुदायों में हुए झगड़ों में अब तक असंख्य मौतें हो चुकी हैं।
पाकिस्तान में सुन्नी समुदाय के लोग बहुसंख्या में हैं। इसलिए शिया समुदाय के लोग अक्सर उनके खूनी पंजों का शिकार बनते हैं। आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकवादियों ने भी अक्सर शिया लोगों को अपना निशाना बनाया है। तीन महीने पहले भी एक आत्मघाती हमलावर ने इस्लामाबाद की ही सैशन अदालत की इमारत में 12 लोगों की हत्या कर दी थी। यह देश लगातार अनेकों ही युद्धों में उलझा अपना अस्तित्व गंवाता नज़र आ रहा है। पाकिस्तान ने ही इस बार भी अ़फगानिस्तान की तालिबान सरकार बनाने में सहायता की थी। आज ये दोनों देश एक-दूसरे के सिर्फ दुश्मन बने ही दिखाई नहीं देते, अपितु तोपों और बमों से अक्सर इनकी सीमाओं पर रक्तिम लड़ाई के समाचार भी आते रहते हैं।
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने सीमांत प्रदेश अ़फगानिस्तान के साथ लगते ़खैबर पख्तूनख्वा पर लगातार अपने हमले जारी रखे हुए हैं, जो पाकिस्तान के लिए कड़ी चुनौती बने हुए हैं। अब इससे भी अधिक ़खतरा बलोचिस्तान ने पैदा कर दिया है। इस देश के 4 बड़े प्रांतों पंजाब, सिंध, ़खैबर पख्तूनख्वा और बलोचिस्तान में बलोचिस्तान प्रांत सबसे बड़ा है। लगभग पाकिस्तान का 40 प्रतिशत क्षेत्रफल बलोचिस्तान का है, जबकि इसकी जनसंख्या इस देश में कुछ प्रतिशत ही है। 1947 में पाकिस्तान के अस्तित्व में आने से लेकर ही बलोचिस्तान उसके लिए बड़ी सिरदर्दी बना रहा है। ब्रिटिश शासन के समय भी चाहे इस पर बड़ा दबाव बनाया जाता रहा है और इसके विरोधी स्वरों को दबाने के लिए इस पर हमले किये जाते रहे हैं। ब्रिटिश शासन ने इस क्षेत्र को कई रियासतों में भी विभाजित कर दिया था परन्तु इसके बावजूद इसने उस समय भी अपने स्वतंत्र अस्तित्व के लिए लगातार लड़ाई जारी रखी थी और यह बड़ी सीमा तक स्वतंत्र क्षेत्र के रूप में ही विचरन करता रहा है। पाकिस्तान बनने पर भी इसने अपनी आज़ाद शख्सियत स्थापित रखने का बड़ा यत्न किया परन्तु, उस समय पाकिस्तान की सेना ने पूरी तरह ताकत का इस्तेमाल करके इसे दबा लिया और यह नए देश का बड़ा प्रांत बन गया, परन्तु उसके बाद भी यहां के रियासती नवाबों ने अपनी लड़ाई जारी रखी। चाहे उन्हें लगातार इसकी बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ती रही। इन कबीलों की यह लड़ाई अभी भी लगातार जारी है।
बलोचों को इस बात की शिकायत है कि चाहे उनका क्षेत्र प्राकृतिक स्रोतों से बेहद मालामाल है परन्तु यहां लगातार ़गरीबी का प्रसार ही बना रहा है। पाकिस्तान ने चीन के साथ समझौता करके व्यापार के लिए एक लम्बी सड़क बनाने की जो योजना बनाई थी, उस सड़क का बड़ा भाग बलोचिस्तान से ही गुज़रता है। बलोचिस्तान की ही गवादर बंदरगाह को एक तरह से पाकिस्तान ने चीन के हवाले कर दिया है, ताकि वह अपनी ज़मीन का बड़ा भाग चीन को दे कर उससे अधिक से अधिक व्यापारिक और राजनीतिक लाभ ले सके। 21वीं सदी के शुरू में जनरल मुशर्रफ की सरकार के समय पाकिस्तानी सरकार ने बलोच नेता नवाब अकबर ़खान बुगती की हत्या कर दी थी। उसके बाद बलोच नैशनल मूवमैंट का और भी उभार देखने में आया था। बलोचिस्तान की सीमा ईरान और अ़फगानिस्तान के साथ लगती है। इन सीमाओं से भी बलोच गुरिल्लों को लगातार सहायता मिल रही है। बलोचों ने अक्सर पंजाबियों और सिंधियों के साथ इस कारण अपनी दुश्मनी कायम रखी, क्योंकि उन्हें यह अहसास है कि सेना में भी और संख्या के पक्ष से भी विशेष रूप से पंजाबियों के बहुसंख्या में होने के कारण उन्हें पाकिस्तान की सरकार दबाने का यत्न करती है। इसलिए ही वहां अक्सर पंजाबियों को हिंसा का निशाना बनाया जाता रहा है। चाहे पाकिस्तान की सरकार द्वारा बलोचिस्तान में गड़बड़ के लिए अक्सर भारत पर आरोप लगाये जाते रहे हैं परन्तु दशकों से बलोच विद्रोही अपने अस्तित्व को बचाने के लिए पाकिस्तान के विरुद्ध लड़ते रहे हैं। विगत दिवस इन विद्रोहियों ने 300 से अधिक पाक सैनिकों की हत्या कर दी थी और बलोच लिब्रेशन आर्मी (बी.एल.ए.) द्वारा अपने शुरू किए गए ऑपरेशन ‘हैरोफ’ (काला तूफान) के दौरान पाकिस्तान के अनेक शहरों के बैंकों, जेलों और सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए और इनमें उनकी ओर से तैयार किए गए आत्मघाती हमलावरों ने भारी विनाश किया। एक तरह से दोनों पक्षों में जारी लड़ाई को लेकर पाकिस्तान सरकार बेहद चिंतित दिखाई दे रही है।
ऑपरेशन ‘हैरोफ’ के दौरान पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ़खवाज़ा आस़िफ ने यह माना है कि पाकिस्तानी सेना बलोच विद्रोहियों के विरुद्ध स्वयं को अपाहिज महसूस कर रही है। रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि बलोचिस्तान भूगोलिक पक्ष से पाकिस्तान का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है, जिसे सम्भालना सरकार के लिए बेहद कठिन है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बलोच विद्रोही अमरीकी हथियारों के साथ लड़ रहे हैं, जबकि पाक के पास ऐसे हथियार नहीं हैं। यह बात अब स्पष्ट दिखाई देने लगी है कि पाकिस्तान सरकार बलोचिस्तान को अब ज्यादा देर तक अपने कब्ज़े में नहीं रख सकेगी। पैदा होने वाले ऐसे सम्भावित हालात पाकिस्तान के लिए बेहद विपरीत सन्देश हैं, जिससे उसकी पहले से दरपेश समस्याओं में और भी वृद्धि हो जाएगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

