पाकिस्तान के हाथ से निकलता जा रहा बलोचिस्तान

बलोचिस्तान के खज़ाने को लूटने की होड़ में लगे चीन और अमरीका से पैसा ऐंठने की पाकिस्तान की नीति अब खुद उसके लिए जोखिम बनती जा रही है। बलोचिस्तान में सोना, तांबा, प्राकृतिक गैस आदि के विशाल भंडार हैं। खासकर सोना और तांबा इतनी अधिक मात्रा में हैं कि उनकी कल्पना करना भी कठिन है। कुछ चीनी कंपनियां इस क्षेत्र में हाईवे प्रोजैक्ट बनाकर इन संसाधनों का लाभ उठाना चाहती हैं। दूसरी ओर अमरीका की नज़र भी बलोचिस्तान में मौजूद दुर्लभ खजिन (रेयर अर्थ मिनरल्स) पर है। इन्हें हासिल करने के लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
1952 में डेरा बुगती में प्राकृतिक गैस का एक बहुत बड़ा भंडार मिला था, जिससे दशकों तक पाकिस्तान लाभ उठाता रहा। बलोच लोगों का आरोप है कि हमारे चूल्हे ठंडे रहे और पूरी दुनिया इस गैस से अपने रोटियां सेकती रही। दूसरी ओर रेको डिक क्षेत्र में अनुमानित 6 अरब टन सोना और तांबा दबा हुआ है, जिसमें अमरीका की सबसे अधिक रुचि है। बलोचिस्तान प्रांत में हालात अब नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं। बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ‘आपरेशन हेरोफ 2.0’ की घोषणा कर दी है। इसके परिणामस्वरूप पूरा प्रांत युद्ध भूमि में तब्दील हो गया है। बलोचिस्तान के 14 बड़े शहरों में भीषण हमले, गोलीबारी और विस्फोट हुए हैं और हो रहे हैं। पुलिस थानों और महत्वपूर्ण ठिकानों पर कब्ज़े की घटनाएं सामने आई हैं। पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कई शहरों में गृह युद्ध जैसी स्थिति बन गई है। सबसे अधिक असर प्रांतीय राजधानी क्वेटा में देखा गया है, जहां लगातार गोलीबारी और बम धमाके हो रहे हैं। बीएलए का दावा है कि इन हमलों में पाकिस्तान के बहुत-से सैनिक मारे गए हैं। क्वान, मसूंग, दलबंदीन, खारान, तूमख और बुलैदा में भी तनाव चरम पर है। चीन और अमरीका उस पर अपना भविष्य गढ़ने की कोशिश में लगे हैं।
बलोच लोगों का कहना है कि पाकिस्तान उन्हें लूट रहा है। इसी कारण विरोध और विद्रोह लगातार तीखा होता जा रहा है। बलोचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है। अधिकांश इलाका पथरीला, पहाड़ी और खनिजों से भरपूर है। कुछ चीनी कंपनियां सड़क परियोजनाओं के ज़रिए इन खनिजों तक आसान पहुंच बनाना चाहती हैं।
दूसरी ओर अमरीका की नज़र यहां के रेयर अर्थ मिनरल्स पर है। इन्हें हासिल करने के लिए वह पाकिस्तान पर लगातार दबाव बना रहा है। कुल मिलाकर चीन और अमरीका की इस पावर गेम में बलोचिस्तान फंस चुका है और पाकिस्तान के हाथ से निकलता दिख रहा है। बलोचों का आरोप है कि हमारे संसाधनों से दूसरों का विकास हुआ, हमें कुछ नहीं मिला। रेको डिक को दुनिया के सबसे बड़े खनिज खजानों में गिना जाता है।  फिलहाल एक कनाडाई कंपनी यहां खनन कर रही है, लेकिन अमरीका की नज़र यहां के रेयर अर्थ मिनरल्स पर टिकी हुई है। सैंडक क्षेत्र में भी तांबा और चांदी के बड़े भंडार हैं। यहां पहले से ही चीनी कंपनियां सक्रिय हैं, जो खनिज निकालकर सीधे चीन भेज रही हैं। बलोच लोगों को सबसे ज्यादा आपत्ति इसी बात पर है कि न उन्हें रोज़गार मिल रहा है, न ही विकास।
बीएलए सिर्फ  पाकिस्तानी सेना को ही नहीं, बल्कि चीनी परियोजनाओं को भी निशाना बना रही है। बीएलए के अलावा बलोच लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ), बलोच रिपब्लिकन आर्मी (बीआरए) और बलोच नेशनलिस्ट आर्मी जैसे संगठन भी सक्रिय हैं। ये संगठन शहरों और तटीय इलाकों में लगातार हमले कर रहे हैं। आज बलोचिस्तान सिर्फ  एक प्रांतीय विद्रोह नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति का अखाड़ा बन चुका है। चीन और अमरीका के टकराहट के बीच पाकिस्तान दोनों से लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसी खेल में वह बलोचिस्तान पर अपनी पकड़ धीरे-धीरे खोता जा रहा है।

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