चूहों और कुत्तों का खतरा और कितना भुगतेंगे एयर पैसेंजर ?
हवा में उड़ते हुए विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से मौत हो जाना, लैंड करते समय दुर्घटना होना या फिर उड़ने के लिए रनवे पर जाते समय दुर्घटना होना, एयर पैसेंजरों के लिए यह आम बात होती है। कहा जाता है कि दुर्घटनाएं सफर का हिस्सा हैं, लेकिन इन दुर्घटनाओं से अलग अब एयर पैसेंजरों को कुत्तों-चूहों से भी जूझना पड़ रहा है। शेष रह गया है हवाई यात्रा के दौरान सांप निकलना या फिर किसी वीवीआईपी के आने पर कोई बड़ी घटना का होना। हालत इतनी खराब है कि खुद मानवाधिकार आयोग को संज्ञान में लेना पड़ रहा है। उसकी टिप्पणी देखिए- इज़रायली पर्यटक पर श्वान का हमला अशोभनीय है तथा पर्यटकों का स्वागत कुत्तों के हमलों से हो यह ठीक नहीं है। अब इसके बाद और कौन सी टिप्पणी तथा हादसा देखने के लिए शेष रह गया है, जिससे एयर पैसेंजर वंचित हैं?
जयपुर के सांगानेर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 15 फरवरी, 2026 को दिल्ली से आयी महिला पर्यटक को एयरपोर्ट से बाहर आते समय अराइवल एरिया में एक आवारा कुत्ते ने काट लिया। बाद में उसे फौरी तौर पर उपचार के दौरान टांके लगाए गए। सितम्बर 2025 में इंदौर, जिसे देश के पहले स्वच्छ शहर का दर्जा प्राप्त है, में भी ऐसी ही घटना घटित हुई। यहां के एयरपोर्ट पर भोपाल निवासी अरुण मोदी को उस वक्त चूहे ने उनकी पैंट में घुसकर काट लिया था, जब वह एयरपोर्ट के ग्राउंड फ्लोर पर डिपार्चर हाल में अपनी पत्नी के साथ इंतजार कर रहे थे। यहां की भी हालत देखिए, अरुण मोदी को टिटनेस का टीका लगाने के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ी।
एयरपोर्ट पर डाग, रैट बाइट के ये दो मामले उसकी सुरक्षा व्यवस्था के साथ ही साफ-सफाई की कहानी बताने के लिए काफी हैं। कुत्तों से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट सीधा कह चुका है कि उन्हें सार्वजनिक स्थानों से हटाया जाए और उनकी नसबंदी की जाए। इस आदेश का कितना पालन हो रहा है, यह भी जयपुर में देखा जा सकता है। जब एयरपोर्ट पर कुत्ता विदेशी महिला को काट रहा था, तब यहां के दो पशु चिकित्सक कुत्ता नसबंदी में घप्पलेबाजी के लिए 15 लाख रुपए की मांग कर रहे थे। इसे सीधा ऐसे पढ़ लीजिए कि एक कुत्ते की नसबंदी को दस बताने और उसके लिए सरकारी भुगतान में रिश्वत। अब भला कैसे कुत्ता आतंक मुक्त होंगे शहर और वीवीआईपी सुरक्षा से लैस एयरपोर्ट।
भारत में एयरपोर्ट और एयरलाइंस अब यात्रियों के लिए सरदर्द से ऊपर माइग्रेन बनती जा रही हैं। आम यात्रियों की बात छोड़ दीजिए यह देश-प्रदेश के मुखियाओं के लिए भी सुरक्षित नज़र नहीं आ रहीं। 28 जनवरी 2026 को महाराष्ट्र के बारामती में हुए प्लेन क्रैश में वहां के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन आज तक रहस्यों के पर्दे में है। अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि इस दुर्घटना के पीछे क्या कारण था? वैसे यह बात समझनी होगी कि जब एक आवारा कुत्ता कई स्तरीय सुरक्षा के बाद एयरपोर्ट में आकर काट सकता है और उसके पीछे कौन जिम्मेदार है यह ही तय नहीं हो पाता है, तो यह कैसे पता चल पायेगा कि प्लेन लैंड होते समय कैसे क्रैश हुआ?
12 मई 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रहा बोईंग 787-8 ड्रीमलाइनर उड़ान भरने के बाद जब क्रैश हो गया था तो उसके बाद दुर्घटनास्थल पर भी ऐसी ही मारामारी थी। जहां पर यह दुर्घटना हुई थी वहां पर तमाम आवारा कुत्ते आ गए थे। चूंकि मामला अत्यधिक गंभीर था, इसलिए इन कुत्तों को पुलिस ने एनीमल रेस्कयू टीम की सहायता से हटाया था। घटनाएं और आंकड़े भरे पड़े हैं, इस तरह की लापरवाहियों से और प्रश्न वही है कि आखिर कब तक तथा किस-किस तरह की दुर्घटनाएं एयर पैसेंजर देखेंगे? तकनीक के कारण हुई घटना तो समझी जा सकती है पर मानवीय त्रुटि से घटना क्यों? एयरपोर्ट सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि कुत्ते, चूहे, कॉकरोच, चिड़िया, बिल्ली, गिद्ध, सांप जैसे जीव-जन्तु हवाई जहाज यात्रा के लिए बहुत बड़े खतरे हैं। अगर कुत्ता किसी रनवे में हवाई जहाज से टकरा जाए तो विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना से इंकार नहीं कर सकते। टेक ऑफ या लैंडिंग भी रोकनी पड़ सकती है। अगर जरा सी चूक हो गई तो सैंकड़ों यात्रियों की जान जाने का भी खतरा है। यह न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान है बल्कि जिन सुरक्षा एजेंसियों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उनके प्रशिक्षण तथा कार्यक्षमता पर भी प्रश्न है।
यहां एक बात यह भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि अगर कभी किसी दूसरे देश के राष्ट्राध्यक्ष के दौरे के समय या फिर किसी अन्य वीवीआईपी की यात्रा के दौरान किसी कुत्ते के काटने या उनके विमान में चूहे आदि के घुस जाने की घटना होती है, तो क्या होगा? और कौन जिम्मेदार होगा? क्या इससे भारतीय एयर सर्विस की बदनामी के साथ ही कार्यक्षमता भी संदेहास्पद नहीं हो जाएगी? यह बात कही जा सकती है कि कोई भी राष्ट्राध्यक्ष खुद के प्राइवेट विमान से आता है, तो ऐसी घटना होना संभव नहीं है। लेकिन जब एयरपोर्ट पर आवारा जानवर आना आम हो तो क्या गारंटी है कि वह वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान नहीं आएगा?
यह बात मानी जा सकती है कि देश की हवाई यात्रा व्यवस्था इस समय कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है, क्र-मेंबर्स तथा पायलट काम के बोझ से मानसिक तनाव में हैं, ड्यूटी टाइम को लेकर रोज झगड़े होते हैं, एयरकर्मी गिरती सेहत के कारण चिड़चिड़े हो रहे हैं, वेतन काम के आधार पर आधा है, जॉब सिक्योरिटी में झोल है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था बस अड्डों जैसी हो जाए। अभी बहुत दिन नहीं हुए हैं जब यात्रियों ने इंडिंगो की दादागीरी झेलकर यात्राएं कीं। पूरे देश में हवाई अड्डों का जाल बिछ रहा है, भारत का सबसे बड़ा जेबर का हवाई अड्डा भी जल्दी ही आरंभ होगा। ऐसे में यात्रियों के मंहगी यात्रा करने के बाद भी अगर एयरपोर्ट आवारा जानवरों से यात्रियों को महफूज नहीं रख सकते, तो एयर पैसेंजर एयरपोर्ट पर कैसे पढ़ पाएंगे- ‘मुस्कुराइये कि आप एयरपोर्ट पर हैं’?
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर

