ज़ीरो से विश्व कप के हीरो बने संजू सैमसन
एक समय था जब संजू सैमसन को भारत की टी-20 विश्व कप टीम की प्लेयिंग 11 के लायक भी नहीं समझा जा रहा था। लेकिन फिर वक्त ने करवट बदली और सैमसन ज़ीरो से हीरो बने और उन्हें 2026 आईसीसी टी-20 विश्व कप (पुरुष) का प्लेयर ऑ़फ द टूर्नामैंट घोषित किया गया, विशेषकर इसलिए कि उन्होंने वेस्टइंडीज (97 नाबाद), इंग्लैंड (89) और न्यूज़ीलैंड (89) के विरुद्ध क्रमश: वर्चुअल क्वार्टरफाइनल, सेमीफाइनल व फाइनल में अविस्मरणीय पारियां खेलीं। हालांकि वह तीनों बार शतक लगाने से चूक गये, लेकिन लगातार तीन अर्द्धशतक लगाना भी रिकॉर्ड रहा। इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि भारत की खिताबी जीत के सैमसन सबसे बड़े हीरो बनकर उभरे, उन्होंने कुल 321 रन बनाये और प्रतियोगिता में सर्वाधिक स्कोर करने के संदर्भ में वह सिर्फ पाकिस्तान के साहिबज़ादा फरहान (383 रन) और न्यूज़ीलैंड के टिम सिफर्ट (326 रन) से ही पीछे रहे। सैमसन की कहानी किसी परिकथा से कम नहीं है क्योंकि ज्यादा पुरानी बात नहीं है जब केरल का यह बैटर खराब फॉर्म से जूझ रहा था और तब किसी ने भी यह कल्पना नहीं की थी कि वह अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) को अहमदाबाद में फाइनल के बाद टोस्ट ऑ़फ द नेशन हो जायेंगे।
वेस्टइंडीज के विरुद्ध मैच से पहले सैमसन तेज़ रन बनाने का प्रयास तो कर रहे थे, लेकिन कुछ खास योगदान नहीं कर पा रहे थे। फिर ईडन गार्डंस में उनका बल्ला ऐसा चला कि अहमदाबाद तक उसने रुकने का नाम ही नहीं लिया। कोलकाता में वेस्टइंडीज ने 195 रन का कठिन लक्ष्य भारत के सामने रखा था और अब से पहले विश्व कप के किसी मैच में इतने बड़े स्कोर को पार नहीं किया गया था लेकिन सैमसन के इरादे कुछ और थे। उन्होंने 97 रन की नाबाद यादगार पारी और वह भी बहुत तेज़ रफ्तार से खेली व भारत के लिए मुश्किल लग रही सेमीफाइनल की राह को आसान किया। मुंबई में इंग्लैंड के विरुद्ध सेमीफाइनल में सैमसन ने न सिर्फ जोफ्रा आर्चर के भूत को अपने सिर से दूर किया (कि वह अक्सर सस्ते में उन्हें आउट कर देते थे) बल्कि ताबड़तोड़ 89 रन की ऐसी पारी खेली कि भारत ने 253 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। इसी तरह अहमदाबाद में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ फाइनल में सैमसन ने एकबार फिर 89 रन की पारी खेली और भारत के स्कोर को 255 तक पहुंचाया। उनकी बदौलत भारत ने दोनों सेमीफाइनल व फाइनल में 250 प्लस के स्कोर किये, जोकि विश्व कप रिकॉर्ड है (और इसमें जिम्बाब्वे के खिलाफ 256 रन को जोड़ा जाये तो भारत पहली ऐसी टीम बन जाती है जिसने एक टी-20 विश्व कप में 250 प्लस के रिकॉर्ड तीन स्कोर खड़े किये)।
बहरहाल, सैमसन टी-20 विश्व कप में तीन लगातार 85 प्लस के स्कोर करने वाले पहले भारतीय बैटर हैं। वह टी-20 विश्व कप के एक सत्र में सर्वाधिक छक्के लगाने वाले बैटर भी बने। उन्होंने मात्र 5 मैचों में 24 छक्के लगाये और इसी सत्र में न्यूज़ीलैंड के फिन एलन के 20 छक्कों का रिकॉर्ड तोड़ा। सैमसन ने फाइनल में 8 व सेमीफाइनल में 7 छक्के लगाये। उनसे पहले भारतीय रिकॉर्ड रोहित शर्मा के नाम था जिन्होंने 2024 के टी-20 विश्व कप में 8 पारियों में 15 छक्के लगाये थे, जबकि शिवम दूबे ने भी इस प्रतियोगिता में 15 छक्के लगाये। अब स्थिति यह है कि सैमसन टी-20 इंटरनेशनल में 6 अर्द्धशतक व 3 शतक लगा चुके हैं लेकिन यह सब उन्हें बहुत संघर्ष के बाद ही हासिल हो सका है। एक समय ऐसा भी आया कि संजू सैमसन अपने क्रिकेट करियर को लेकर कुंठित हो गये थे; प्रतिभा होने के बावजूद उनका करियर आगे बढ़ ही नहीं रहा था। उन्हें लग रहा था कि उनका पतन हो चुका है, इसलिए उन्होंने भारत के लिए खेलने का सपना देखना बंद कर दिया था। फिर उन्होंने अपने मन के उस स्विच को ऑ़फ कर दिया जो उन्हें निरंतर नकारात्मक विचार देता था। इसलिए संभावित इंडिया कॉल-अप की प्रतीक्षा करने की बजाय सैमसन थिरुवनंतपुरम के भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र में नये खिलाड़ियों को ग्रुम करने में अपनी ऊर्जा का निवेश करने लगे। वह साथ ही व्हाट्सएप्प ग्रुप ‘एमसीजी स्पार्टंस’ के सक्रिय सदस्य बन गये, जिसमें उभरते क्रिकेटर, उनके पैरेंट्स व कुछ वरिष्ठ खिलाड़ी शामिल हैं।
जब युवा तकनीक के बारे में कुछ मालूम करते तो सैमसन उनकी मदद करते, उनसे उन्हें कॉल करने को कहते या अगले दिन ट्रेनिंग के दौरान बात करने को कहते। बच्चों की मदद करके उन्हें संतुष्टि मिलती। वह उनमें से एक हो गये। जब वह ट्रेनिंग सेंटर पर होते तो वह सिर्फ चेत्ता (मलयालम में बड़े भाई के लिए) होते, न कि संजू सैमसन। भविष्य के लिए सपने व इच्छा लिए इन बच्चों से सैमसन को भी लाभ हुआ। यह बच्चे सैमसन की तैयारी में मदद करने लगे। जब सैमसन को किसी खास किस्म के गेंदबाज़ का सामना करने की आवश्यकता होती तो वह ग्रुप में मैसेज पोस्ट करते और उन्हें तुरंत ‘थम्स अप’ मिल जाता। केंद्र में हर प्रकार के गेंदबाज़ हैं, वह भी जो रोंग फुट पर बॉल करते हैं। अगले दिन सेंटर विकेट पर सैमसन को अपनी पसंद का गेंदबाज़ मिल जाता। ट्रेनिंग के बाद सैमसन अपने प्रैक्टिस क्रिकेटरों को ट्रीट देना न भूलते। और वह ट्रीट विशेष थी जब बांग्लादेश के विरुद्ध खेलने वाली भारतीय टी-20 टीम में सैमसन को जगह मिलने पर दी गई थी। अब टी-20 विश्व कप में प्लेयर ऑ़फ द टूर्नामैंट बनने के बाद यह ट्रीट अतिरिक्त विशेष होने जा रही है। दरअसल, अब भारतीय चयनकर्ताओं को भी समझ आ गया है कि सैमसन स्पेशल टैलेंट हैं, जिनकी वैल्यू करना आवश्यक है। अगर आप इस स्पेशल टैलेंट को वैल्यू करेंगे, जैसा कि टेस्ट में निरंतर असफलता के बावजूद रोहित शर्मा को किया गया है, तो निरंतरता अपने आप आ जायेगी और अच्छे परिणाम भी सामने आयेंगे, जैसा कि अब आये हैं।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर





