जाना था माहिलपुर और जाना पड़ा मैक्स मोहाली 

यह सबब की बात है कि मैं अपने खालसा कॉलेज माहिलपुर जाने के लिए तैयार हो रहा था कि मेरी तबीयत खराब हो गई और मुझे मोहाली के मैक्स अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। 19 फरवरी से 27 फरवरी तक वहीं रह कर घर लौटा था। मैक्स अस्पताल पहले ही चंडीगढ़ के पास के अस्पतालों से बड़ा है, लेकिन अब इसके प्रबंधक यहां 210 बिस्तरों, 210 पूरे समय के लिए डॉक्टरों और 1000 नर्सिंग स्टाफ का प्रबंध कर रहा है। अस्पताल में मुझे सारी सुविधाएं मिलीं, लेकिन हमेशा घर की याद आती रही। अफसोस है कि मैं अपने पुराने कॉलेज नहीं जा सका, जहां तीन दिवसीय कला उत्सव और पुस्तक मेले की चहल-पहल रही। इस उस्तव में पोस्ट ग्रेजुएट विभाग के कई पुराने विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया, जिनसे मैं नहीं मिल पाया।  खालसा कॉलेज माहिलपुर के पोस्ट ग्रेजुएट पंजाबी विभाग द्वारा बब्बर अकाली लहर के 100 साल के साहकिर इतिहास को समर्पित तीन दिवसीय कला उत्सव और पुस्तक मेला करवाया गया, जिसमें 26 से 28 फरवरी तक ऐतिहासिक और मिथिहासिक कार्यक्रम चलते रहे। इन्हें बहुत पसंद किया गया।
उद्घाटन सत्र में संत साधु सिंह कुहारपुरी की अध्यक्षता में शब्द संगीत गायन बहुत बढ़िया रहा और पुस्तक धर्म तथा अध्ययन से अपने संबंधों को उजागर करने वाले सत्र के लिए पर्चा प्रे. अपिन्द्र सिंह माहिलपुरी ने पेश किया और अध्यक्षता बाबा बलबीर सिंह जत्थेदार बुड्ढा दल ने संभाली। इसके मुख्याथिति संत अमीर सिंह जवद्दी टकसाल थे और मुख्य वक्ता भगवान सिंह जौहल और डॉ. मनमोहनजीत सिंह थे।
26 फरवरी को बाद दोपहर राजविंदर समराला द्वारा रचित नाटक ‘राहां विच्च अंगियार बड़े सी’ का मंचन किया गया, जिसके मुख्य मेहमान पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना थे और विशेष मेहमान डॉ. धर्मजीत सिंह थे। 27 फरवरी को हुए संगीत कार्यक्रम में सन् सैंतालीस की त्रासदी से जूझ रहे पंजाबियों की बात की गई। इसमें मानव जीवन के मूल्यों को उभारा गया है। इसमें सांवल धामी, अजमेर सिद्धू, भगवंत रसूलपुरी द्वारा विचार पेश किए गए जिनके सूत्रधार योगराज अंगरीश थे। इसके मुख्य मेहमान इशांक कुमार विधायक  चब्बेवाल थे।
सिख एजुकेशनल कौंसिल, माहिलपुर की देख-रेख में हुए इस तीन दिवसीय कार्यक्रम ने न सिर्फ  क्षेत्र की संगत को निहाल किया, बल्कि दूर-पास और सात समंदर पार से आए मेहमानों को भी निहाल किया। इसका श्रेय सिर्फ  प्रिंसिपल परविंदर सिंह को ही नहीं जाता, इसमें डॉ. जंग बहादुर सिंह राय, इंदरजीत सिंह भारटा, अपिंदर सिंह माहिलपुरी, डॉ. जे. बी. सेखों का भी विशेष योगदान है। 
इनके अतिरिक्त स. जय किशन सिंह रोड़ी, अमनप्रीत सिंह कोटफतूही, जसवंत सिंह ज़फर, प्रिंसिपल जगमोहन सिंह, सुरिंदर सीहरा यू.के., मदन वीरा और अन्यों का भी योगदान रहा। 
अंतिका
—दो शे’अर—
1. ऐ गर्दश ऐ अयाम तेरा शुक्रिया
हमने हर पहलू से दुनिया देख ली
2. शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तकाज़ा है
जिस शाख पे बैठे हो वो टूट भी सकती है।
ई-मेल : sandhugulzar@yahoo.com

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