बरसात में अमरूद की फसल लेने के लिए उपाय

पंजाब में अमरूद की काश्त के अधीन नीम्बू जाति (खट्टे फल) के बाद दूसरे नम्बर पर सभी फलों से अधिक रकबा है। ज़्यादातर किसानों ने अपने ट्यूबवेलों और उपभोक्ताओं ने अपने बगीचों में अमरूद के पौधे लगाए हुए हैं। अमरूद की काश्त का सबसे अधिक रकबा पटियाला ज़िले में है, जहां अमरूद की एस्टेट स्थापित है। जहां से किसानों को यह फल लगाने के लिए सुविधाएं और नेतृत्व दिया जाता है। 
दूसरे नम्बर पर संगरूर, मुक्तसर साहिब, बठिंडा और रोपड़ ज़िलों में भी अमरूद की बहुत काश्त होती है। अमरूद के पौधे मैदानी इलाकों के अतिरिक्त पहाड़ी क्षेत्रों पर भी लगाए जा सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार अमरूद का फल सेब से ज़्यादा गुणकारी होता है। इसमें पोटाशियम 417 मिलीग्राम, विटामिन-सी 228 मिलीग्राम, फाइबर 5.4 ग्राम होता है, जबकि सेब में ये पौष्टिक तत्व क्रमश: 107 मिलीग्राम, 4.6 मिलीग्राम और 2.4 ग्राम होते हैं। फाइबर की मात्रा अधिक होने के कारण अमरूद कब्ज़ दूर करता है और पेट की बीमारियां ठीक हो जाती हैं। यह रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को भी कम करता है, जिसकी कारण यह उच्च रक्तचाप को रोकने में प्रभावशाली है। यह वज़न भी कम करता है। मधुमेह के मरीज़ों के लिए यह बहुत ही लाभदायक है।
अमरूद लगभग पूरा वर्ष उपलब्ध होता है। यह साल में दो बार फल देता है। एक गर्म ऋतु की बरसात में और दूसरा सर्दियों में, लेकिन बरसात के मौसम वाले फल को आम तौर पर कीड़ा लग जाता है। बागवानी विभाग के पूर्व उप-निदेशक (सेवामुक्त) डॉ. स्वर्ण सिंह मान कहते हैं कि फल को कीड़ा लगना पौधे में कोई खराबी होने का कारण नहीं। इसका मुख्य कारण बरसात में जब फल पकने लगता है तो फल की मक्खी पौधे पर डंक मार कर अंडे दे देती है, जिससे फल में सुंडियां पैदा हो जाती हैं। ज़्यादातर उत्पादक गर्म ऋतु की बरसात का फल खराब हो जाने के कारण नहीं लेते। अगर उत्पादकों ने बरसात के मौसम का फल नहीं लेना तो सर्दियों का बढ़िया फल लेने के लिए अप्रैल के अंत में शाखाओं के किनारों से एक फुट तक कटाई कर देनी चाहिए। मई के अंत में जिन पौधों पर फूल आया है, उनसे फूल तोड़ देने चाहिएं। 
अमरूद के बागों में 10 प्रतिशत यूरिया का छिड़काव करना चाहिए। फल को ऑर्गेनिक और गुणवत्ता वाला पकाना हो तो पीएयू से फ्रूट फ्लाई ट्रैप खरीद कर आजकल पौधों पर लटका देने चाहिएं। इससे नर मक्खियां इस ट्रैप की तरफ आकर्षित होकर मर जाएंगी और मादा मक्खियां फलों में अंडे नहीं दे पाएंगी। एक एकड़ बाग में 16 फ्रूट फ्लाई ट्रैप लगाने की सिफारिश है। अगर बागीचों या ट्यूबवेलों पर 2-4 पौधे लगाए हैं तो एक ही ट्रैप लगाना काफी है। ये फ्लाई ट्रैप पौधों पर एक से डेढ़ मीटर की ऊंचाई पर छाया में लगाने चाहिएं। पौधों के पास पड़े खराब फलों को दूर एक फुट गहरे गड्ढे में दबा देना चाहिए या काले लिफाफे में बंद करके दूर फेंक देने चाहिएं। जुलाई के पहले सप्ताह तक तुरंत पॉलिथीन लिफाफे भी फलों पर चढ़ाए जा सकते हैं। इससे फलों की गुणवत्ता अच्छी होगी और बाज़ार में कीमत अधिक मिलेगी। इस तरह ऑर्गेनिक फल भी तैयार किए जा सकते हैं। अगर फ्रूट फ्लाई ट्रैप का इस्तेमाल नहीं करना है तो फैनवेलरेट 20 ई.सी., 2.5 मिलीलिटर दवाई प्रति लीटर पानी में मिलाकर सप्ताह-सप्ताह के बाद छिड़काव किया जा सकता है। फैनवेलरेट दवाई के छिड़काव के कम से कम तीन दिन बाद ही फल तोड़ना चाहिए। आमतौर पर अमरूद के बागों में नदीन बहुत हो जाते हैं। उन्हें उखाड़ देना चाहिए, नहीं तो मक्खियां वहां ठहर जाएंगी और नुकसान पहुंचाएंगी। जब 75 प्रतिशत मक्खियां ट्रैप में आ जाएं, तो इन मरी हुईं मक्खियों को ट्रैप से निकाल देना चाहिए। एक ट्रैप में लगभग 6000 मक्खियां आकर मर जाती हैं। 
अमरूद में पौष्टिक तत्व अधिक होने के कारण प्रत्येक व्यक्ति को अपने बाग में अमरूद के पौधे लगाने चाहिएं। पीएयू ने इलाहाबादी सफेदा, लखनऊ-49, पंजाब सफेदा, पंजाब किरण, स्वेता, पंजाब पिंक, एप्पल गुआवा, हिसार सफेदा किस्में लगाने की सिफारिश की गई है। हिसार सफेदा का फल बहुत पसंद किया जाता है। आईएआरआई की पूसा सृजन, पूसा आरुषि, पूसा प्रतीक्षा किस्में चुनी जा सकती हैं। अमरूद के पौधे अगस्त से अक्तूबर और फरवरी से मार्च महीने में लगाए जा सकते हैं।  पीएयू और बागवानी विभाग के अलावा राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से प्रमाणित नर्सरियों से ही पौधे खरीदने चाहिएं। बीमारियां दूर भगाने और सेहत के लिए उपभोक्ताओं को हर्बल पौधे जैसे आंवला, तुलसी, ब्राह्मी, पुदीना, अश्वगंधा, बिल आदि भी लगाने चाहिएं। इस महीने गमलों में लगे पुराने पौधों को निकाल कर गमलों में रूढ़ी खाद और मिट्टी भरकर नए पौधे लगा देने चाहिएं। हल्की बारिश में पौधों को आंगन में रख देना चाहिए। इससे पौधों का विकास होगा। हर्बल पौधे पीएयू और आईएआरआई की नर्सरियों से मिल जाएंगे। निजी क्षेत्र में भी कई नर्सरियां हर्बल पौधे बेचती हैं।
 

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