SC ने पलटा हाईकोर्ट का फैसला; गुरुग्राम की 436 बीघा जमीन पर फिर ग्राम पंचायत का हक

नई दिल्ली, 3 अगस्त - सुप्रीम कोर्ट ने 19 साल बाद गुरुग्राम के वजीराबाद से सटी 436 बीघा 18 बिस्वा विवादित जमीन पर ग्राम पंचायत के मालिकाना हक को बहाल कर दिया। अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के 2007 के फैसले को रद्द करते हुए कहा कि यह जमीन 'शामिलात देह' यानी गांव की साझा जमीन है और इस पर ग्राम पंचायत का ही अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजस्व रिकॉर्ड में पट्टियों के नाम दर्ज होने से जमीन का मूल स्वरूप नहीं बदल जाता।
 
गांव की साझा जमीन की अहमियत पर दिए गए अहम फैसले में जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा, 'जमीन को 'नया सोना' माना जाता है, खासकर तब जब ऐसी ज़मीन गुरुग्राम जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी इलाकों के आसपास हो।' पीठ की ओर से 85 पन्नों का फैसला लिखते हुए जस्टिस संजय कुमार ने कहा कि विवादित जमीन हरियाणा कॉमन लैंड्स (रेगुलेशन) एक्ट, 1961 के तहत 'शामिलात देह' यानी गांव की साझा जमीन थी। हाई कोर्ट ने इसे निजी जमीन मानने में गलती की, क्योंकि उसने केवल राजस्व रिकॉर्ड में गांव की विभिन्न पट्टियों (मालिक समूहों) के नाम दर्ज होने को आधार बना लिया।

 
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