‘वोट बचाओ-देश बचाओ’
‘इंडिया’ गठबंधन द्वारा दिल्ली में ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ के नाम पर आयोजित महारैली की अब तक खूब चर्चा बनी रही है। चाहे इसलिए 10 लाख लोग इकट्ठे करने की बात तो दिखाई नहीं दी परन्तु इसको प्रभावशाली रैली ज़रूर कहा जा सकता है। चाहे इसलिए राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस अग्रणी दिखाई दी परन्तु इस रैली में समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा और शिवसेना (यू.बी.टी.) के अलावा वामपंथी पार्टियों की भी भागीदारी थी। पिछले लम्बे समय से राहुल गांधी ‘वोट चोरी’ की बात करते आ रहे हैं। आज भी वह इसको ही मुख्य मुद्दा बना रहे हैं, परन्तु इस संबंधी कुछ सोचने वाली बात पर ध्यान देना ज़रूरी है। एक तो वह आज तक लिखित रूप में लगातार लगाए जा रहे इन आरोपों के बारे में चुनाव आयोग को ठोस सबूत पेश करने में असमर्थ रहे हैं। न ही उन्होंने कोई पुख्ता सबूतों सहित सुप्रीम कोर्ट के पास पहुंच की है। सिर्फ शोर-शराबे के साथ शोर तो बढ़ सकता है परन्तु गम्भीर ठोस परिणाम नहीं निकाले जा सकते।
इसी तरह राहुल और उनके साथी कभी ई.वी.एम. (इलैक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) मशीनों पर अविश्वास प्रकट करते हैं, कभी वी.वी. पैट की पर्चियों के मिलान के बारे में बयान देते हैं और कभी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर किन्तु-परन्तु करते हैं और अब वह एस.आई.आर. को लेकर बड़े स्तर पर ‘वोट चोरी’ के विरुद्ध लामबंदी कर रहे हैं। जहां तक ई.वी.एम. का संबंध है, पिछले दिनों चार राज्यों में विधान परिषद् के चुनावों के परिणाम सामने आए हैं। यह चुनाव वोट पर्चियों द्वारा करवाए गए थे परन्तु इन चुनावों में नागपुर (महाराष्ट्र) की एक सीट के अलावा कांग्रेस को बहुत कुछ हासिल नहीं हुआ। बहुत सारे राज्यों में समय-समय पर चुनाव होते रहते हैं। जिन चुनावों में परिणाम कांग्रेस के पक्ष में आते हैं, उनमें बल्ले-बल्ले तथा जिनमें वह हार जाती है, वहीं उसकी ओर से ऐसे आरोप लगाने शुरू कर दिए जाते हैं। जहां तक मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण में भारी संख्या में वोट कट जाने के मामले सामने आए हैं, उनमें मुसलमानों से कहीं अधिक हिन्दुओं के नाम भी शामिल हैं। कांग्रेस की बौखलाहट इस रैली में उसके नेताओं द्वारा दिए गए भाषणों से ही मिल जाती है। राहुल गांधी ने सीधा आरोप लगाया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कई राज्यों में ई.वी.एम. और मतदाता सूचियों में हेराफेरी करके व्यापक स्तर पर ‘वोट चोरी’ किए गए हैं। उन्होंने इसे देशद्रोह कहा है। यहीं बस नहीं, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सीधे ‘वोट चोरी’ के गम्भीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सीधा आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार सहित महाराष्ट्र, बिहार तथा उत्तर प्रदेश की सरकारें ‘वोट चोरी’ करके बनाई गई हैं।
नि:संदेह देश में लगभग 13 करोड़ वोटों का कट जाना बेहद आपत्तिजनक है और इसके साथ ही चुनाव आयोग द्वारा अपने कार्य में पारदर्शिता की कमी दिखाई देती है। इस संबंध में आज सैकड़ों याचिकाएं अदालतों में सुनवाई अधीन हैं। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण संबंधी सर्वोच्च न्यायलय में कई मामले चल रहे हैं। सर्वोच्च न्यायलय ने इस समूची प्रक्रिया में सुधार करने के साथ-साथ लोगों को अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करवाने के लिए प्रत्येक तरह की सुविधा और अधिक से अधिक समय देने के निर्देश दिए हैं तथा ‘वोट चोरी’ संबंधी कोई ठोस प्रमाण भी पेश करने के लिए कहा है। चुनाव आयोग द्वारा जो बड़ी त्रुटियां सामने आई हैं, उसके लिए आज वह सर्वोच्च न्यायालय के कटघरे में खड़ा दिखाई देता है। चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, उसके मुख्य अधिकारी या अन्य अधिकारियों को बड़ी रैलियों, जलसे या जुलूस निकाल कर नहीं बदला जा सकता। इसलिए तथ्यों पर आधारित विचारों तथा कार्रवाइयों का ही प्रभाव पड़ सकता है। बौखलाहट भरी कार्रवाइयां इसका समाधान नहीं हैं।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

