ऐसे रहें बारिश के मौसम में स्वस्थ


सावन-भादों या फिर जुलाई-अगस्त के ये दो महीने खुशगवार बारिश की रिमझिम लेकर आते हैं। इस मौसम में किसान तो खुशी से झूमते ही हैं, युवा तन मन भी मस्ती में झूमने लगते हैं। पकवानों और पके आमों के खाने का मजा ही कुछ है बारिश की फुहारों के बीच।
घर से बाहर जाते समय रेनकोट या छाता अवश्य ही साथ लेकर चलना चाहिए ताकि अचानक ही उमड़ घुमड़ आए बादलों से बरसी चांदी सी बूंदें आपके स्वास्थ्य की दुश्मन न बन जाएं। बारिश के मौसम में अनेक कीटाणु एवं वायरस भी वातावरण में आ जाते हैं तथा जरा सा स्वास्थ्य नरम पाते ही ये टूट पड़ते हैं। जुकाम, बुखार, मलेरिया एवं वायरल तो जैसे घात ही लगाए बैठे रहते हैं। यही नहीं, अनेकों कीड़े मकोड़े भी जमीन में पानी भरने से बाहर निकल आते हैं अत: नंगे पैर जमीन पर चलने से अंधेरे में तो विशेष रूप से बचना ही चाहिए। बारिश के मौसम में बच्चे चार बूंद पड़ते ही नहाने निकल पड़ते हैं जो खतरे का सबब भी बन सकता है क्योंकि एक तो बच्चों का शरीर कोमल होता है, ऊपर से वातावरण में वायुमंडल में जमे धूल कण तथा गैसें उस पानी में घुल कर आती हैं जो त्वचा में संक्र मण कर सकती हैं। अत: नहाने का मन होने पर भी 10-15 मिनट की बारिश के बाद ही बाहर निकलने दें बच्चों को। यदि बारिश में आप भीग जाएं तो घर लौटते ही सबसे पहले साफ तौलिए से शरीर पोंछ कर तुरंत ही सूखे कपड़े पहनकर खाज, खारिश व फफूंद के आक्र मण से बचें।  चप्पल या जूते भी ऐसे पहनें जिनके तले सपाट या फिसलने वाले न हों। चमड़े के चप्पल जूते भीग कर खराब तो हो ही जाते हैं, इंफेक्शन का कारण भी बन जाते हैं अत: इस मौसम में प्लास्टिक, नायलोन या सिंथेटिक जूते-चप्पल इस्तेमाल किया जा सकते हैं मगर पहले देख लें कि आप की त्वचा इनसे रियेक्शन तो नहीं करती। कच्चे व कीटाणु रहित सलाद तथा ताजे फलों का सेवन धोकर करें। इन दिनों मौसमी फलों में आम, खीरा, नाशपाती, सेब, जामुन, आडू, अमरूद आदि का सेवन स्वास्थ्य के लिये लाभदायक होते हैं। बाजार से कटे हुए व सड़े गले फल कदापि न खाएं। भोजन में दलिया, खिचड़ी, सत्तू, चावल तथा चपाती ले सकते हैं परन्तु ठण्डे बासी भोजन में बैक्टीरिया हो सकता है, अत: ताजा ही खाएं। बहुत ज्यादा आम भी फोड़े फुंसी का कारण बनते हैं अत: आम के साथ पर्याप्त मात्रा में दूध लें या फिर मैंगो शेक के रूप में आम के गुणों का लाभ लें।
 बारिश के मौसम में त्वचा की रक्षा के लिए किसी अच्छी क्वालिटी की क्रीम प्रयोग करें। एंटीसेप्टिक या हर्बल क्रीम अच्छी रहती है। हां माश्चराइजर एवं ऑयली क्रीम से बचें क्योंकि इन दिनों वैसे ही त्वचा प्राय: नम एवं तैलीय रहती है, अत: इनसे त्वचा के रंध्र बंद होने से परेशानी हो सकती है। तो फिर आइये, बारिशों का मौसम है। अपने आपको स्वस्थ रखकर इस का पूरा लुत्फ उठाइए, झूमिए, नाचिये और गाइए।