निराशाजनक सत्र


पंजाब का दो दिवसीय विधानसभा सत्र बेहद संक्षिप्त था। जिस तरह कि उम्मीद की जा रही थी। इसमें नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास किया गया है। इस कानून संबंधी देश भर में बड़े स्तर पर चर्चा चल रही है। अब तक अलग-अलग पार्टियों ने अपने-अपने विचार विस्तृत रूप में पेश किए हैं। आगामी समय में भी देश भर में इस संबंध में आंदोलन चलते रहने और चर्चा छिड़ी रहने की उम्मीद की जा रही है। पंजाब सरकार अपने शासन के तीन वर्ष पूरे करने जा रही है। इस समय ज़रूरत राज्य को दरपेश मुख्य चुनौतियों को जानने और इनको दूर करने की है। इसके समक्ष मौजूदा समय अनेकों समस्याएं हैं, उनको दूर करने के लिए सक्रिय होने की ज़रूरत है। रह गई त्रुटियों को किस तरह पूरा किया जाना है, इस मामले पर गम्भीर विचार-विमर्श करने की ज़रूरत है। सत्र के इतने कम समय में सामने खड़ी इतनी गम्भीर समस्याओं पर सरसरी दृष्टि डाली जानी भी मुश्किल है। इस सत्र में विपक्ष ने अपना दायित्व अवश्य निभाया है, उसने सरकार की इस बात की कड़ी आलोचना की है कि जिन मुद्दों को आधार बनाकर सरकार अस्तित्व में आई थी, जिनका प्रचार करके कांग्रेस ने लोगों को वोट देने के लिए प्रेरित किया था, वह बातें सत्र से शून्य रही हैं। लोगों द्वारा कांग्रेस के वायदों पर फूल चढ़ाए गए थे, क्योंकि वह पूर्व सरकार की कारगुज़ारी से खुश नहीं थे। उनको कैप्टन अमरेन्द्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर राज्य के लिए कुछ ठोस कर सकने की उम्मीद थी परन्तु इस पक्ष से आज राज्य के लोग नाराज़ और निराश प्रतीत होते हैं। उनके साथ किए गए वायदे वफा नहीं हुए। किसानों की पूर्ण ऋण माफी के प्रति अब तक सरकार ने जो कुछ भी किया है, उससे वह संतुष्ट नहीं हैं। विकास कार्य बेहद धीमी गति से चल रहे हैं। उनका अपने लक्ष्य पर पहुंचना इसलिए मुश्किल प्रतीत होता है क्योंकि आज सरकार बड़े आर्थिक संकट का सामना कर रही है। यहां तक कि कुछ सरकारी विभागों के कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं दिए जा रहे। जो वायदे चुनावों के समय किए गए थे, वह वफा होते दिखाई नहीं दे रहे। भ्रष्टाचार के जिन मामलों पर पूर्व सरकार बदनाम हुई थी, वह मामले आज भी ज्यों के त्यों खड़े दिखाई दे रहे हैं। हालात यह हैं कि आज प्रत्येक स्तर पर कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता भी मायूस दिखाई देते हैं। सोचने वाली बात यह होनी चाहिए कि सरकार इन मामलों को किस तरह सम्बोधित हो। पंजाब को बन रहे इस संकट से किस तरह निकाला जा सके और कैसे प्रत्येक स्तर पर लोगों की इन अधूरे कार्यों को पूर्ण करने के लिए भागीदारी सुनिश्चित बनाई जा सके। पानी के हो रहे गम्भीर संकट के लिए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने आगामी दिनों में सभी पार्टियों की एक बैठक भी बुलाई है, और तेज़ी से कम हो रहे इस प्राकृतिक स्रोत के प्रबंधन के लिए पंजाब जल नियम और विकास अथारिटी के गठन का भी ऐलान किया है। आज प्रत्येक के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है कि राज्य में भूमि निचले जल का स्तर बेहद कम हो रहा है। इस संबंध में तत्काल कोई बड़ा प्रयास करने की आवश्यकता है। हम दरियाओं की इस धरती पर पैदा हो रहे जल संकट के लिए भी तत्कालीन सरकारों और समय के राजनीतिज्ञों को ज़िम्मेदार समझते हैं, जिन्होंने अपनी वोट राजनीति की खातिर राज्य के इस अनमोल खजाने को व्यर्थ ही गंवा दिया है। हमें इस संबंध में संदेह है कि हुए इस बड़े नुक्सान की पूर्ति की जा सकेगी। इसके अलावा अनेक अन्य गम्भीर मामले आज बड़े ध्यान की मांग करते हैं, जिनको ठोस योजनाबंदी के बिना मुकम्मल नहीं किया जा सकता। दो दिवसीय सत्र की यह कार्यवाही निराशा पैदा करने वाली ही साबित हुई है, जिसने फिलहाल सरकार की छवि को और धुंधला ही किया है। 

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द