जानलेवा चाइना डोर का खुलेआम हो रहा इस्तेमाल
वर्तमान में ज्वलंत मुद्दों की सूची बहुत लंबी है, जिनके नतीजे बहुत दुखद और निराशाजनक ही नहीं, बल्कि इन मुद्दों का समाधान और अंत भी रहस्यमयी है। अब तक कोई भी सरकार इन मुद्दों को ईमानदारी से निपटाने में नाकाम रही है और ये मुद्दे हमेशा सरकारों और प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बने रहते हैं। ये मुद्दे हैं—नशा खासकर चिट्टा, अवैद खनन, गैंगस्टरवाद, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, अवैध हथियार, अवैध कब्ज़े, जबरन वसूली, प्रवास, प्रदूषित पर्यावरण और गरीबी आदि हैं, जो अक्सर समय की सरकारों और प्रशासन को परेशान करते रहते हैं। सरकारें और प्रशासन चाह कर भी इन्हें खत्म नहीं कर सके, जिसका मुख्य कारण इंसान का स्वार्थी और लालची स्वभाव है। अगर नशा आज हर गांव तक पहुंच गया है, तो इसका मुख्य कारण प्रशासनिक लापरवाही है। सीमा के पास नशे की बरामदगी से स्पष्ट है कि नशा पड़ोसी देशों से आ रहा है।
भारी मात्रा में पकड़े जाने के बावजूद गांवों और शहरों में नशा खुलेआम बिक रहा है। नशा पकड़े जाने के जितने समाचार आते हैं, उससे कहीं अधिक नशे से मरने वालों के होते हैं।
अब चाइना डोर के बारे में बात की जा रही है। पतंग उड़ाने के लिए इसका इस्तेमाल शरेआम हो रहा है। बसंत पंचमी के अवसर पर इसका उपयोग और अधिक होता है। क्या पतंग उड़ाने ते लिए चाइना डोर का इस्तेमाल सही है? अगर सही है, तो इसे रोकने के लिए बयानबाज़ी क्यों की जा रही है? प्रत्येक वर्ष बसंत पंचमी से पहले सरकार और प्रशासन चाइना डोर पर पाबंदी लगाने को लेकर बड़े-बड़े दावे करते है, चेतावनी देते हैं, जिन्हें पढ़कर और सुनकर लगता है कि अब चाइना डोर बिल्कुल नहीं दिखेगी, लेकिन हर साल लोहड़ी और बसंत से पहले ही गलियों, मोहल्लों, सड़कों और पेड़ों पर चाइना डोर के जाल देखे जा सकते हैं। अब तक चाइना डोर अनेक इंसानों और पक्षियों को अपनी लपेट में ले चुकी है, जिनमें से कई अपनी जान गंवा चुके हैं या गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। क्या चाइना डोर का कहर नशे के कहर से कम है, यह तो पीड़ित या उनके परिवार वाले ही बता सकते हैं। सरकार और प्रशासन की पाबंदी के बावजूद चाइना डोर कैसे बिक रहा है? पाबंदी के बावजूद यह कहां से आती है? प्रशासन और सरकार इसकी बिक्री रोकने में नाकाम क्यों रहते हैं या फिर कथित मिलीभगत से बिक रही है।
यदि नशे और हथियार तस्करी के ज़रिए सीमा पार से आते बताए जाते हैं, तो क्या चाइना डोर भी इसी तरह सीमा पार से आती है? क्या चाइना डोर भी हथियार और नशे की तरह पड़ोसी देशों द्वारा ड्रोन या दूसरे तरीकों से भेजा जाती है? अगर जवाब हां है, तो फिर नशे और हथियारों की तरह चाइना डोर की खेप कभी सीमा पर क्यों नहीं पकड़ी गई? चाइना डोर का असली सच यह है कि इसे नशे और हथियारों की तरह चोरी-छिपे नहीं खरीदी या बेची जाती, बल्कि यह आसानी से मिल जाती है। इससे होने वाली जनहानि के समाचार सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। पाबंदीशुदा चाइना डोर जहां सरकार और प्रशासन की नाकामी को उजागर करता है, वहीं यह समाज के उन कथित ठेकेदारों और आम लोगों पर भी सवाल खड़े करती है जो ड्रग्स और दूसरे मुद्दों पर सरकार और प्रशासन को घेरते हैं। चाइना डोर से कई घरों के चिराग बुझ चुके हैं, लेकिन फिर भी बहुत-से लोग अपने बच्चों को यह घातक डोर खरीदने की अनुमति दे देते हैं। चाइना डोर सिर्फ किसी इंसान, पक्षी या जानवर का गला ही नहीं काटती, कभी-कभी बिजली के तारों को छूने पर करंट आने से पतंग उड़ाने वाले की मौके पर ही मौत हो जाती है। क्या हम सरकार और प्रशासन को कोसकर अपनी ज़िम्मेदारी से तो नहीं भाग रहे? सरकार और प्रशासन को चाइना डोर का इस्तेमाल रोकने के लिए जहां सख्त कदम उठाने चाहिए, वहीं आम जन को भी इस डोर का इस्तेमाल रोकने के लिए आगे आना होगा। इस चाइना डोर की वजह से हमारे मनोरंजन के लिए पतंग उड़ाने का त्योहार एक श्राप बनता जा रहा है। आओ, सभी मिलकर यह प्रण करें कि हम किसी भी कीमत पर चाइना डोर का इस्तेमाल नहीं करेंगे और न ही दूसरों को करने देंगे। जिस दिन इस जानलेवा डोर को खरीदना बंद कर दिया जाएगा, उसी दिन इसका इस्तेमाल भी बंद हो जाएगी। इस प्रकार इंसानों, जानवरों और पक्षियों की कीमती जान बचाई जा सकती है।
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