भारत की व्यापारिक परिपक्वता
नि:संदेह अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों और घोषणाओं ने दुनिया भर को असमंजस में डाल रखा है। अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने उनके द्वारा अलग-अलग देशों पर आयात टैक्स (टैरिफ) लगाने संबंधी किए गए मनमाने फैसलों को रद्द कर दिया है। चाहे ट्रम्प प्रशासन ने यह दावा किया है कि उसने इन नये टैक्सों के साथ अमरीका के लिए अरबों-खरबों डॉलर इकट्ठे किए हैं परन्तु अमरीका के लाखों ही छोटे व्यापारियों में इस आयात टैक्सों ने डर और असुरक्षा पैदा कर दी है। आने वाले समय में उनके लिए यह घाटे का सौदा साबित हो सकता है। एक भारतीय मूल के वकील नील कत्याल ने जो बराक ओबामा के राष्ट्रपति होते हुए उसका कार्यकारी सालिस्टर जनरल रह चुका है, ने छोटे व्यापारियों द्वारा ट्रम्प की ओर से लगाए टैरिफ संबंधी केस की पैरवी की थी, जिसकी इस मामले में जीत हुई है।
उसने स्पष्ट रूप में बताया कि उसने अमरीकी छोटे कारोबारियों की ओर से अदालत में यह कहा था कि राष्ट्रपति ़गैर-कानूनी तरीके से काम कर रहा है। इस फैसले के बाद ट्रम्प ने सुप्रीम कोर्ट बारे कई सख्त टिप्पणियां की थीं और कहा था कि वह इस फैसले संबंधी कोई नया रास्ता अपनाने से नहीं हिचकचाएंगे। उसने बौखलाकर और जल्दबाज़ी में टैऱिफों संबंधी अपने नये फैसले भी सुना दिये। अमरीका के ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत उसने पहले 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत अस्थाई कर लगाने का ऐलान किया और फिर 24 घंटों बाद ही उसने एक अंतर्राष्ट्रीय टैक्स की दर बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी। भारत को भी इस संबंध में अजीब स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। भारत अमरीका को वस्तुएं निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश है। वर्ष 2023-24 में इसके द्वारा लगभग 86 अरब डॉलर का निर्यात किया गया था। दोनों देशों में होने वाले व्यापारिक समझौते संबंधी प्रारूप को आगामी दिनों में अंतिम रूप दिया जाने वाला था, जिसे पैदा हुई नई स्थिति के कारण स्थगित कर दिया गया है।
वैसे विगत समय में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्र में बहुत ठोस उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके द्वारा विश्व भर के बड़े देशों के साथ व्यापार समझौते किए गए हैं जिनसे भारत की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मज़बूत हो रही स्थिति का पता चलता है। देश ने कनाडा के साथ आपसी व्यापार के समझौते का नवीनीकरण किया है, न्यूज़ीलैंड के साथ किया गया समझौता भी आगामी महीनों में लागू हो सकता है। ब्रिटेन के साथ इसने पहले ही अपनी व्यापारिक भागीदारी कायम कर ली है। भारत की इस क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धि यूरोपीय संघ के साथ किए जा रहे आपसी समझौते संबंधी है। इसमें 27 देश शामिल हैं। इसके भी सार्थक परिणाम आगामी वर्ष के आरम्भ में मिलने की उम्मीद की जा रही है। अलग-अलग देशों से खुला व्यापार या प्राथमिक धाराओं संबंधी आपसी आदान-प्रदान सफल हो रहा है। जापान तथा आसियान देशों के साथ भी पूर्व के समझौतों का नई प्राथमिकताओं के आधार पर नवीनीकरण किया जा रहा है।
बहुत-से अरब देशों ने भी भारत के साथ व्यापार में अपनी दिलचस्पी दिखाई है, जिसे भारत की बड़ी उपलब्धि माना जा सकता है। हम महसूस करते हैं कि अमरीकी राष्ट्रपति की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधी अस्थिरता वाली नीतियों से अमरीका जैसी महाशक्ति को बड़ा नुकसान होने की सम्भावना है। इसी कारण ही आज अमरीकियों के बड़े हिस्से में ट्रम्प की नीतियों संबंधी असंतोष पैदा हो रहा है, जो इस देश के लिए नुकसानदायक सिद्ध हो सकता है। दूसरी तरफ भारत इन स्थितियों का समुचित ढंग से सामना करने का यत्न करता दिखाई दे रहा है।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

