आज सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है विश्व शांति 

प्रत्येक वर्ष 23 फरवरी को विश्व शांति और समझ दिवस रोटरी इंटरनेशनल की स्थापना की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष रोटरी इंटरनेशनल अपना 121वां स्थापना दिवस मना रहा है। यह दिवस इस विचार को रेखांकित करता है कि शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि यह तो हमारी आपसी समझ, साझा प्रयासों और समावेशी विकास का परिणाम है। आज के दौर में बढ़ते संघर्ष, युद्ध और तनाव के बीच विश्व शांति मानवता की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। वास्तव में शांति से ही विकास, शिक्षा और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। आपसी समझ और सहिष्णुता किन्हीं भी समाजों को मज़बूत व सुदृढ़ बनाती है। यह एक कटु सत्य है कि बिना शांति के न तो सुरक्षा संभव है और न ही किसी देश और समाज की स्थायी प्रगति। इसलिए विश्व शांति केवल एक आदर्श नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व के लिए अनिवार्य शर्त है।
बहुत कम लोग जानते हैं कि रोटरी नाम के पीछे भी एक रोचक कारण है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार शुरुआत में इसे शांति दिवस नहीं कहा जाता था। इसका नाम रोटरी इसलिए पड़ा क्योंकि इसके सदस्य अपनी बैठकें हर बार अलग-अलग सदस्यों के कार्यालयों में घुमाकर (रोटेशन के आधार पर) किया करते थे और यही रोटेशन आगे चलकर दुनिया भर में सेवा और शांति का प्रतीक बन गई। एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब दुनिया संघर्षों में उलझी हुई थी, तब रोटरी के सदस्यों ने लंदन में एक सम्मेलन आयोजित किया था। इसी सम्मेलन की बौद्धिक नींव पर आगे चलकर यूनेस्को की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। बहुत कम लोग जानते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी शांति संस्थाओं में से एक की अवधारणा एक क्लब बैठक से प्रेरित थी।
इस दिवस का मूल संदेश यह है कि शांति केवल ‘युद्ध का न होना’ नहीं है। रोटरी की अवधारणा में शांति का अर्थ लोगों की स्वच्छ पानी तक पहुंच, साक्षरता दर में वृद्धि तथा स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के विकास से भी जुड़ा है। दूसरे शब्दों में कहें तो सेवा ही शांति का सबसे बड़ा माध्यम है। जब हम भूख, बीमारी (जैसे पोलियो) और अज्ञानता के खिलाफ संघर्ष करते हैं, तो वास्तव में हम शांति की नींव रख रहे होते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 23 फरवरी, 1905 को पॉल पी. हैरिस ने शिकागो (अमेरिका) में रोटरी इंटरनेशनल शुरुआत की थी। पेशे से वह एक वकील थे और उन्होंने अपने तीन मित्रों के साथ मिलकर पहले रोटरी क्लब की बैठक आयोजित की। उनका उद्देश्य एक ऐसा मंच तैयार करना थाए जहां विभिन्न पृष्ठभूमि के पेशेवर लोग मिलकर विचार साझा कर सकें और समाज के लिए सार्थक कार्य कर सकें। समय के साथ यह एक वैश्विक आंदोलन बन गया और स्थापना दिवस को ही ‘विश्व शांति और समझ दिवस’ के रूप में मान्यता मिली। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आज रोटरी के 200 से अधिक देशों में लगभग 46,000 से अधिक क्लब सक्रिय हैं।
रोटरी इंटरनेशनल एक वैश्विक सेवा संगठन है, जिसका मुख्य उद्देश्य मानवता की सेवा करना, समाज में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना तथा विश्व में शांति और सद्भाव स्थापित करना है। इसके सदस्य विभिन्न व्यवसायों और पेशों से जुड़े लोग होते हैं, जो स्वेच्छा से समाज सेवा में योगदान देते हैं। यह संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल संरक्षण, रोग उन्मूलन (विशेषकर पोलियो उन्मूलन अभियान) और सामुदायिक विकास जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित करता है। आज इसके विश्व भर में लाखों सदस्य हैंए जो ‘स्वार्थ से ऊपर सेवा’ के आदर्श वाक्य के साथ मानव कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं।
आज के दौर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, भौतिकवादी सोच, राजनीतिक और सामाजिक तनाव तथा डिजिटल माध्यमों पर फैलती नकारात्मकता ने लोगों के बीच दूरी बढ़ा दी है। कई बार देश संसाधनों और प्रभुत्व की होड़ में संघर्ष की राह चुन लेते हैं। सहयोग, सेवा-भावना और आपसी सद्भाव धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ते दिखाई देते हैं। एक समय था जब समाज में भाईचारा, सहयोग और मानवता की भावना अधिक प्रबल थी जबकि आज व्यक्तिगत स्वार्थ और असहिष्णुता कई बार इन मूल्यों पर भारी पड़ती नज़र आती है। हालांकि, यह पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। आज भी दुनिया में अनेक लोग और संस्थाएं शांति, सेवा और मानवता के लिए समर्पित होकर कार्य कर रही हैं।
आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने व्यक्तिगत स्तर से छोटे-छोटे प्रयास शुरू करें। दूसरों के प्रति सम्मान, सहानुभूति, सहयोग और संवाद को बढ़ावा दें। यही छोटे कदम बड़े परिवर्तन का आधार बनते हैं। इस दिवस का मुख्य फोकस शांति और सद्भावना को प्रोत्साहित करना, संस्कृतियों और समुदायों के बीच समझ बढ़ाना, संघर्ष की रोकथाम तथा वैश्विक सहयोग और मानवीय एकता को मज़बूत करना है। सरल शब्दों में कहें तो यह दिवस पूरे विश्व में शांति, सद्भाव और पारस्परिक समझ को सुदृढ़ करने का संदेश देता है। (एजेंसी)

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