भारत-बांग्लादेश संबंधों में क्या होगी जमात की भूमिका ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान को व्यक्तिगत संदेश भेजकर सही कदम उठाया है, जिसमें उन्होंने कहा कि ‘आपकी जीत बांग्लादेश के लोगों के आपके नेतृत्व पर दिखाए गए भरोसे और विश्वास का सुबूत है और देश को शांति, स्थिरता और खुशहाली के रास्ते पर आगे ले जाने के आपकी दृष्टि के लिए उनका जनादेश है।’ यह जनादेश की वैधता और दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने में बीएनपी की अगुवाई वाली सरकार के नए प्रधानमंत्री की भूमिका पर बांग्लादेशियों के भरोसे का एक तरह से समर्थन है।
यह साफ है कि इस समय भारत सरकार के पास नई बीएनपी सरकार के साथ पूरी तरह से आगे बढ़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है और प्रधानमंत्री रहमान सबसे अच्छा दांव हैं। लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि अभी तारिक रहमान के पास शेख हसीना को भारत से ढाका वापस भेजने के मुद्दे को न्यायाधिकरण और फिर अदलत के आदेश के मुताबिक और चुनाव प्रचार के दौरान बीएनपी के वादे के मुताबिक  ज़ोर-शोर से उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। बीएनपी के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात बहुत जोश में भरी जमात-ए-इस्लामी है, जो दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है और उसके गठबंधन में 77 सीटें हैं और जो प्रधानमंत्री तारिक के भारत के पक्ष में उठाए गए हर कदम का इस्तेमाल यह प्रचार करने के लिए करेगी कि तारिक शेख हसीना के रास्ते पर जा रहे हैं। भारत उन्हें बांग्लादेश के हितों के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए तारिक के हाथ बंधे हुए हैं। अगर वह भारत के प्रति दोस्ताना रवैया भी चाहते हैं, तो उन्हें अपनी बांग्लादेश वफादारी की परीक्षा पास करनी होगी क्योंकि जमात वहां की संसद और बाहर सड़कों पर, दोनों जगह उनकी गर्दन पर सवार है, जो बांग्लादेश की राजनीति में सरकारों की किस्मत तय करती है।
भारतीय विदेश मंत्रालय में अनुभवी राजनयिक हैं। इसलिए यह देखकर अच्छा लगा कि विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने मंगलवार को ही तारिक रहमान के शपथ ग्रहण के दिन जमात नेता शफीकुर रहमान से बहुत चुपचाप मुलाकात की। यह सबसे अहम मीटिंग थी क्योंकि भारत के विदेश सचिव उस आदमी को जानते थे जो भारत-बांग्लादेश रिश्तों का रास्ता तय करने में असली शक्ति का इस्तेमाल करेगा और इसलिए उसे प्रेम-प्यार करना होगा। यह पता नहीं है कि जमात नेता ने क्या प्रतिक्रिया दी, लेकिन भारत के अधिकारियों के लिए जमात के साथ यह बातचीत राजनयिक प्रक्रिया का हिस्सा होनी चाहिए अगर भारत सच में द्विपक्षीय रिश्तों में जल्दी सुधार चाहता है।
आखिर बांग्लादेश से लगी भारतीय सीमा पर सुरक्षा बनाए रखने के लिए जमात की भूमिका का इतना महत्व क्यों है? यह इस बात में अन्तर्निहित है कि 12 फरवरी को बांग्लादेश के सभी सीमावर्ती ज़िलों में हुए चुनावों में जमात ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, जिससे भारत के गृह मंत्रालय के अधिकारियों, खासकर पूर्वी इलाके के बीएसएफ  अधिकारियों में असंतोष पैदा हो गया है। बांग्लादेश के खुलना, राजसाही तथा रंगपुर जिलों, जो पश्चिम बंगाल से लगते हैं, में जमात ने जीत हासिल की है। जैसे खुलना में जमात को 36 में से 25 सीटें मिलीं। इन सीमावर्ती जिलों में बहुत सारे भारत-विरोधी तत्व सक्रिय हैं, जिनमें बागी भी शामिल हैं, जिन्हें बीएनपी-जमात शासन के दौरान जमात ने पनाह दी थी। शेख हसीना ने 2009 के बाद इसे रोक दिया। असल में बाद में जमात को काम करने की इजाज़त नहीं दी गई और उसके विदेशी फंड पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अब सीमावर्ती ज़िलों पर पूरा कब्ज़ा होने के कारण, जमात के असामाजिक तत्वों को खुली छूट मिलेगी जब तक कि उन्हें ऊपर से रोका न जाए। यह बीएनपी सरकार और जमात नेतृत्व, दोनों स्तरों पर किया गया है। भारत सरकार जमात के साथ करीबी तालमेल रखकर इसे बेहतर तरीके से ठीक कर सकती है।
बांग्लादेश में लगभग एक करोड़ अल्पसंख्यक हैं, जिनमें ज़्यादातर हिंदू हैं। दूसरे इस्लामिक देशों की तरह बांग्लादेश में हमेशा कट्टरपंथियों का एक समूह रहता है। जमात में कई समझदार लोग हैं, जो अल्पसंख्यकों के प्रति सद्भावना रखते हैं। साथ ही कुछ ऐसे समूह भी हैं जो कट्टर हिंदू विरोधी और भारत विरोधी हैं। बांग्लादेश के साथ रिश्ते सुधारना एक लंबा और मुश्किल सफर होगा। भारतीय अधिकारियों को बीएनपी नेता और बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक और विपक्षी जमात नेता शफीकुर रहमान दोनों से बातचीत करनी होगी। साथ ही, भारत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शेख हसीना के प्रत्यार्पण को छोड़कर दूसरे मामलों पर बातचीत रिश्ते सुधारने के लिए सही मायने में शुरू हो। खासकर, आर्थिक मुद्दों पर अब ध्यान देना चाहिए। हसीना मुद्दे में लंबा समय लगेगा और आर्थिक मदद से ठीक होने की प्रक्त्रिया शुरू करके भारत हसीना के प्रत्यार्पण के मुद्दे पर सही समाधान के लिए आधार बना सकता है। भारत को बीएनपी और जमात दोनों को यह तरीका अपनाने के लिए मनाना होगा। (संवाद)

#भारत-बांग्लादेश संबंधों में क्या होगी जमात की भूमिका ?