भारतीय टेनिस की नई उम्मीद हैं दक्षिणेश्वर सुरेश
लिएंडर पेस, महेश भूपति, रोहन बोपन्ना व सानिया मिज़र्ा के रिटायर होने के बाद भारतीय टेनिस में सूनापन आ गया था कि कोई खिलाड़ी इतना प्रतिभावान नज़र नहीं आ रहा था कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सके लेकिन अब स्थितियां बदलती हुई नज़र आ रही हैं। दक्षिणेश्वर सुरेश के रूप में उम्मीद की एक नई किरण दिखायी दे रही है, जिनकी वजह से भारतीय टेनिस प्रेमी फिर से सपने देख सकते हैं, ऑस्ट्रलियन ओपन, फ्रेंच ओपन, विंबलडन व यूएस ओपन में एक भारतीय को हाथ में ग्रैंड स्लैम ट्राफी उठाये हुए। वैसे पिछले आठ माह सुरेश के लिए भी किसी सपने से कम न थे।
सुरेश नार्थ कैरोलिना की वेक फारेस्ट यूनिवर्सिटी में कम्युनिकेशंस के अंतिम वर्ष के छात्र हैं। वर्तमान में इस 25 वर्षीय युवक की टूर पर रैंकिंग 470 है, लेकिन पिछले आठ माह के दौरान उन्होंने सात ऐसे खिलाड़ियों को पराजित किया है जो रैंकिंग में टॉप 170 के अंदर हैं। उनकी सबसे बड़ी जीत इस साल फरवरी के पहले सप्ताह में आयी जब उन्होंने द नीदरलैंड्स के विश्व नंबर 88 जेस्पर डी जोंग को डेविस कप क्वालीफायर्स राउंड 1 में पराजित किया। सुरेश का सर्विस गेम बहुत प्रभावी है और उनके शक्तिशाली ग्राउंड स्ट्रोक्स ने भी सबका ध्यान आकर्षित किया लेकिन अभी तो सुरेश के तरकश से और तीर निकलने शेष थे।
बेंग्लुरु में द नीदरलैंड्स के खिलाफ खेले गये डेविस कप में मुकाबला 2-2 की बराबरी पर था और निर्णायक पांचवें मैच में सुरेश के सामने गाय डेन ओडेन थे। सुरेश ने अपनी तेज़ रफ्तार सर्विस से कमाल किया, 15 ऐस लगाये, भारत को 3-2 से जीत दिलायी और अब सितम्बर 18-20 को भारत डेविस कप क्वालीफायर्स के दूसरे राउंड में दक्षिण कोरिया के सामने होगा। दूसरे राउंड की मेज़बानी दक्षिण कोरिया ही करेगा। डेविस कप में 14 टीमें हैं। सात मुकाबले खेले जायेंगे और जो उनका विजेता होगा, वह ग्रैंड फिनाले में मेज़बान इटली के सामने होगा। पराजित टीमों को अगले वर्ष का क्वालीफायर्स राउंड 1 खेलना होगा।
सुरेश की सर्विस क्या है- थंडरबोल्ट है, जो वर्षों के निरंतर अभ्यास से उनका ट्रेड मार्क बन गई है। वह अपनी सर्विस की रोज़ाना प्रैक्टिस करते हैं और ट्रेनिंग में 50-100 सर्विस करते हैं। सभी लम्बे कद के खिलाड़ी अच्छी सर्विस नहीं करते हैं, लेकिन 6 फीट 6 इंच के सुरेश के पास गज़ब की सर्विस है। मदुरै में जन्मे सुरेश की सर्विस में उनके कद की बहुत बड़ी भूमिका है; क्योंकि पूरा स्ट्रेच करने पर गेंद का कांटेक्ट पॉइंट बहुत ऊंचा हो जाता है और प्रतिद्वंदी को ऐसा प्रतीत होता है जैसे गेंद आसमान से दनदनाती हुई आ रही हो। चूंकि ऊंचाई से तीव्र ढलान वाला कोण बनता है इसलिए रैकेट से हिट होने के बाद गेंद में अधिक गति आ जाती है। सुरेश बताते हैं, ‘मैं अपने कद का अच्छा इस्तेमाल करता हूं और मैं अपनी स्ट्रेंथ पर कार्य करता हूं। मैं रोज़ाना ट्रेनिंग के दौरान लगभग 100 सर्विस करता हूं। बात हमेशा ही निरंतरता की है।’ गौरतलब है कि जनवरी 2026 में बेंग्लुरु ओपन एटीपी 125 चैलेंजर में क्रोएशिया के डूजे अजकोविच के खिलाफ खेलते हुए सुरेश ने 20 ऐस लगाये थे। अपने इस सर्विस गेम को खेलते हुए उन्हें बहुत आनंद आया था।
सुरेश बताते हैं, ‘जब भी गेम में महत्वपूर्ण पल आते हैं तो मैं अपनी सर्विस पर ध्यान देते हुए खुद से कहता हूं कि ट्रेनिंग के दौरान तो मैं यह लाखों बार कर चुका हूं, तो मुझे एक और गेंद को ही तो हिट करना है। सर्विस का अर्थ नियमित प्रैक्टिस करने से है। इसलिए अपनी सर्विस पर मैं विश्वास करता हूं।’ हालांकि बेंग्लुरु में खेली गईं तीनों प्रतियोगिताओं- वर्ल्ड टेनिस लीग, बेंग्लुरु ओपन व डेविस कप में स्पीडगन उपलब्ध नहीं थी, लेकिन सुरेश के रैकेट से गेंद को तेज़ी से उड़ते हुए देखा जा सकता था। उनकी फ्लैट, शक्तिशाली सर्विस प्रतिद्वंदियों को बैकफुट पर धकेल रही थी, जिससे सुरेश को पॉइंट्स बनाने के लिए खुली जगह मिल जाती थी। अगर पहली सर्विस काम न आ रही हो तो सुरेश के पास दूसरी शक्तिशाली किक सर्विस भी है जो कोर्ट पर तेज़ी से जम्प करती है। इसलिए यह आश्चर्य नहीं है कि द नीदरलैंड्स के खिलाफ डेविस कप में जो उन्होंने तीन सिंगल्स मैच खेले उनमें उन्होंने 33 ऐस लगाये और डबल फाल्ट सिर्फ 6 थीं।
भारत के नॉन-प्लेयिंग कप्तान रोहित राजपाल सुरेश की सर्विस को ‘ईश्वर का ईनाम’ बताते हुए कहते हैं, ‘सुरेश की सर्विस में सुंदर व्हिप है, जिसे हासिल करना कठिन है अगर आपका स्टांस ढीला न हो और स्विंग भी न हो। उनका सर्विस मोशन भी सुंदर है, जिसकी वजह से उन्हें अच्छी स्पीड भी मिल जाती है। यह सब ऊपर वाले की मेहर है। हर ऊंचे कद का खिलाड़ी अच्छी सर्विस नहीं कर पाता है।’ सर्विस के अतिरिक्त सुरेश का नेट पर भी खेल अच्छा है, जोकि कॉलेज टेनिस में डबल्स खेलने से पैना हुआ है। बहरहाल, मई में अपनी डिग्री मुकम्मल करने के बाद टूर पर सुरेश की असल परीक्षा आरंभ होगी। लेकिन प्रबल संभावना यही है कि वह खरे उतरेंगे और अपने व भारतीयों के सपनों को साकार करेंगे। -इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर




