Court:दुर्घटना मामलों में अपीलीय अदालतों को साक्ष्यों का सावधानीपूर्वक पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए: न्यायालय
नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत आने वाले दुर्घटना मामलों में मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरणों द्वारा दिए गए निष्कर्षों और मुआवजे में बदलाव करने से पहले अपीलीय अदालतों को साक्ष्यों का सावधानीपूर्वक पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए और स्पष्ट कारण बताने चाहिए।
ये टिप्पणियां उच्चतम न्यायालय ने एक फैसले में कीं, जिसमें उसने सड़क दुर्घटना मामले में पूर्व प्रबंधक को दिए गए मुआवजे को 35.61 लाख रुपये से बढ़ाकर 97.73 लाख रुपये कर दिया। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा,''इस विषय पर चर्चा समाप्त करने से पहले, हम यह दोहराना उचित समझते हैं कि जब कोई अपीलीय न्यायालय मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा विधिवत दर्ज किए गए तथ्यों के निष्कर्षों में हस्तक्षेप करता है, विशेष रूप से दिव्यांगता के आकलन और आय क्षमता के नुकसान जैसे मुद्दों पर, तो उसके लिए साक्ष्यों का गहन पुनर्मूल्यांकन करना और न्यायाधिकरण द्वारा निकाले गए निष्कर्षों से भिन्न होने के लिए ठोस, स्पष्ट और विश्वसनीय कारण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।'
निर्णय लिखने वाले न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत कार्यवाही में अपीलीय न्यायालयों पर ऐसा दायित्व अधिक है,''जो मोटर दुर्घटनाओं के पीड़ितों और उनके परिवारों को शीघ्र राहत और उचित मुआवजा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अधिनियमित एक लाभकारी और कल्याणकारी कानून है।' पीठ ने कहा कि वैधानिक ढांचा सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने और सड़क दुर्घटनाओं के कारण पीड़ित लोगों को राहत और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाया गया है। फैसले में कहा गया है,''मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण के तर्कसंगत निर्णय में कोई भी हस्तक्षेप, इसलिए, अधिनियम की भावना और उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए और ठोस न्यायिक तर्क द्वारा समर्थित होना चाहिए।' इस मामले में, अपीलकर्ता आर हाले चेन्नई में एक लॉजिस्टिक्स फर्म में प्रबंधक के रूप में काम कर रहे थे, जब पांच मई, 2016 को उनकी मोटरसाइकिल से आमने-सामने टक्कर हो गई।

