समझौते से राहत
विगत 40 दिन से अमरीका-इज़रायल और ईरान के बीच चले आ रहे युद्ध ने विश्व भर के देशों को बड़ी परेशानी में डाल दिया था। लगातार बमबारी के कारण ईरान के मूलभूत ढांचे का भारी नुकसान हुआ था। इससे हज़ारों जानें भी चली गईं, इसकी प्रतिक्रिया स्वरूप ईरान ने इज़रायल पर मिसाइलों और ड्रोनों से लगातार हमले करने के अलावा खाड़ी देशों को भी इस लिए निशाना बनाए रखा था, क्योंकि वहां के कई देशों में अमरीकी सैन्य अड्डे स्थापित थे। इज़रायल ने लेबनान में हिज़्बुल्लाह गोरिल्लों पर लगातार हमले किए और एक तरह से लेबनान के एक हिस्से को तबाह कर दिया था। ईरान में लगभग 47 वर्ष पहले इस्लामिक क्रांति आने के बाद वहां शरीयत के कड़े कानूनों को लागू करने का यत्न किया गया था।
इसके साथ ही इस इस्लामिक शासन ने इज़रायल का अस्तित्व मिटाने की भी धमकी दी थी, जिसके लिए वह विगत लम्बी अवधि से लेबनान में सक्रिय कट्टरपंथी संगठन हिज़्बुल्लाह, गाज़ा पट्टी में इज़रायल के विरुद्ध संघर्षशील रहे हमास संगठन को लगातार सहायता भी देता रहा है, जिस कारण किसी न किसी रूप से इज़रायल की कई अरब देशों, ईरान, लेबनान, हिज़्बुल्लाह और यमन के हूतियों के साथ सख्त लड़ाई भी चलती रही है जिसने पिछले दशकों में अनेक चरण पार किए थे, परन्तु इस लड़ाई की भी शुरुआत गाज़ा पट्टी में सत्ता पर काबिज संगठन हमास द्वारा 7 अक्तूबर, 2023 को इज़रायल पर हमला करने से हुई थी, जिससे दोनों तरफ से किए हमलों में लाखों ही फिलिस्तीनी जो पहले ही दशकों से शरणार्थियों के रूप में रह रहे थे, को गाज़ा पट्टी में अनेकानेक समस्याओं से भी गुज़रना पड़ा और अब तक यहां 60000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे भी जा चुके हैं। ईरान के साथ इज़रायल-अमरीका का लगातार तनाव चलता रहा है। अमरीका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु शक्ति नहीं बनने देना चाहता था, ताकि पश्चिम एशिया में अरब देशों के लिए वह लगातार ़खतरा न बना रहे।
इस दौरान अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इज़रायल ने 28 फरवरी को ईरान पर बमबारी शुरू कर दी। जहां तक डोनाल्ड ट्रम्प का संबंध है, लगभग सवा वर्ष पहले उन्होंने अमरीका के राष्ट्रपति का पद ग्रहण करते ही अनेक मोर्चों पर ऐसे बड़े विवादित फैसले लिए, जिससे विश्व भर के देश बेहद परेशान हो गए। एक तरह से उनसे नाराज़ और निराश हो गए। अमरीका में भी डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लागू की गई नीतियों के कारण उनकी व्यापक स्तर पर आलोचना शुरू होनी शुरू हो गई थी। पश्चिम एशिया में उनकी ओर से किए गए इस युद्ध से भी उनके संबंध में आज अमरीका सहित विश्व भर में रोष दिखाई देता है। युद्ध में जहां ईरान के वरिष्ठ नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के साथ अन्य वरिष्ठ नेता और जरनैल मारे जा चुके हैं, वहीं ईरान के साथ-साथ खाड़ी देशों का भी भारी नुकसान हो चुका है। ईरान की ओर से प्रतिक्रिया स्वरूप होर्मुज़ समुद्री मार्ग पर कब्ज़ा करने के बाद विश्व भर के देशों के समक्ष तेल और गैस की सप्लाई को लेकर एक बड़ी चुनौती भी आ खड़ी हुई थी। डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान पर बड़े हमले की धमकी के बाद और दोनों देशों में बातचीत करवाने के लिए कुछ देशों द्वारा शुरू की गई सक्रियता के कारण, जहां ईरान द्वारा होर्मुज़ समुद्री जल मार्ग पुन: खोलने की घोषणा की गई है, वहीं दो सप्ताह के लिए युद्ध-विराम की घोषणा करके फिर से वार्ता शुरू करने पर भी सहमति बनी है। इससे विश्व भर में एक बड़ी राहत महसूस की गई है। जिस तरह का अब माहौल बना दिखाई देता है, उससे आने वाले समय में यह अनुमान लगाया जा सकता है, कि जहां इस युद्ध के खत्म होने की सम्भावना बन गई है, वहीं वर्षों से ईरान और इज़रायल सहित खाड़ी के अन्य देशों के बीच चले आ रहे टकराव का भी कोई अच्छा और स्थायी हल भी निकलेगा और यह भी कि बड़े अन्तर्राष्ट्रीय देशों और अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं के यत्नों से फिलिस्तीनियों को एक अलग देश मिलने की सम्भावना भी बन सकेगी। स्थायी रूप से दशकों से जारी इस दु:खद संघर्ष का हल निकलेगा तो यह विश्व के लिए बहुत अच्छी घटना होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

