खतरनाक मोड़ पर

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ओर से ईरान द्वारा होर्मुज़ जल मार्ग की नाकाबंदी के संबंध में दी गई अंतिम धमकी का समय बीता जा रहा है। अमरीका के समय अनुसार मंगलवार सायं 8 बजे तक का समय है। भारत में यह समय बुधवार सुबह 5.30 बजे समाप्त हो रहा है। इससे पहले विश्व के कई देशों ने दोनों पक्षों में समझौता करवाने के यत्न किए हैं परन्तु इस संबंध में कोई बात सफल नहीं होती दिखाई नहीं दे रही। यह युद्ध 28 फरवरी से जारी है। इसके चलते हुए 39 दिन हो चुके हैं। इन दिनों में जहां अमरीका और इज़रायल द्वारा ईरान और लेबनान पर भारी बमबारी की जाती रही है, वहीं ईरान ने भी अब तक खाड़ी देशों की ओर असंख्यक मिसाइलें द़ागी हैं। खाड़ी देशों में अमरीका के सैन्य अड्डे हैं। विगत दिवस समझौते के लिए कई तरह के प्रस्ताव आए हैं।
मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की ने 45 दिन तक युद्ध बंद करने और होर्मुज़ मार्ग को फिर से खोलने का प्रस्ताव पेश किया था। दूसरा प्रस्ताव सिर्फ पाकिस्तान की ओर से आया था जिसमें एकबारगी युद्ध बंद करने के  बाद 15 से 20 दिन में शांति समझौते की रूप-रेखा तैयार करने के लिए कहा गया था, परन्तु अमरीका और ईरान को ये दोनों समझौते पसंद नहीं आए। अब ईरान ने अपनी ओर से 10 नुक्तों का एक नया प्रस्ताव ट्रम्प को भेजा है, जिसके संबंध में ट्रम्प ने कहा है कि यह प्रस्ताव सीमा तक तो ठीक है परन्तु इतना अच्छा नहीं है, कि इसे स्वीकार कर लिया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के मूलभूत ढांचे सहित ऊर्जा केन्द्रों पर हमले की चेतावनी संबंधी यह आखिरी समय है। इसे और नहीं बढ़ाया जाएगा। अमरीका यह चाहता है कि जहां होर्मुज़ को खोला जाए, वहीं ईरान का यूरेनियम भंडार भी वहां से बाहर भेज दिया जाए। ईरान ने अपनी शर्तों में युद्ध को स्थायी रूप में खत्म करने का प्रस्ताव पेश किया, जिससे इस पूरे क्षेत्र में आपसी दुश्मनी खत्म हो सके। युद्ध से हुए क्षतिग्रस्त क्षेत्रों का पुनर्निर्माण किया जाए और ईरान पर लगे अन्तर्राष्ट्रीय प्रतिबन्ध हटाये जाएं।
नि:संदेह अब तक इस युद्ध में ईरान के वरिष्ठ कौमी नेता और जरनैल मारे जा चुके हैं। हज़ारों ही लोग इस युद्ध की बलि चढ़ चुके हैं, परन्तु इसके बावजूद स्थिति यहां तक पहुंच चुकी है कि अब दोनों पक्षों की ओर से वापिस मुड़ना बेहद कठिन प्रतीत होने लगा है। इसके साथ ही अमरीकी राष्ट्रपति की धमकियां भी बढ़ती जा रही हैं तथा ईरान पर अमरीका और इज़रायल की ओर से बमबारी भी लगातार जारी है। जैसे-जैसे दी गई धमकी का समय निकट आ रहा है, वैसे-वैसे ही विश्व भर में इसके प्रति चिंता बढ़ती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एनटोनियो गुटारेस ने होर्मुज़ मार्ग को न खोलने पर ईरान के बिजली प्रबन्धों, पुलों और अन्य मूलभूत ढांचे पर हमले की धमकी को अन्तर्राष्ट्रीय नियमों के विरुद्ध बताया है। इसमें फ्रांस ने भी शामिल होते हुए कहा है कि नागरिक ढांचे और ऊर्जा ढांचे को तबाह करना युद्ध के नियमों और अन्तर्राष्ट्रीय कानून के विरुद्ध है।
अब ईरान के राष्ट्रपति ने यह भी धमकी दी है कि अपने देश के इन केन्द्रों को बचाने के लिए करोड़ों ईरानी अपना बलिदान देने के लिए तैयार हैं और वे इन महत्त्वपूर्ण स्थानों पर मानवीय कड़ी बना कर शहीद होने के लिए तैयार होंगे। जिस तरह का माहौल तैयार हो चुका है, यदि तत्काल अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इस युद्ध को रोकने का प्रबन्ध नहीं होता तो इससे मध्य पूर्व में ही नहीं, अपितु विश्व भर में विनाश पैदा होने की सम्भावना है। इस समय संयुक्त राष्ट्र सहित यूरोपीयन यूनियन, रूस, चीन और भारत जैसे देशों को शीघ्र हस्तक्षेप देने की ज़रूरत है ताकि इस आशंकित विनाश को रोका जा सके।

—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

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