अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव फिर खतरनाक मोड़ पर
पाकिस्तान ने सोमवार की देर रात अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर जो हवाई हमला किया, उसके बारे में अफगानिस्तान के उप सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि पाकिस्तान ने राजधानी काबुल में नशाखोरों का इलाज करने वाले एक अस्पताल को निशाना बनाया। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट में, हमदुल्लाह फितरत ने कहा हमले में अस्पताल का बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया। मरने वालों की संख्या 400 हो गई है, जबकि 250 लोग घायल हुए हैं। बचाव कर्मी इमारत में लगी आग पर काबू पाने और पीड़ितों के शवों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के विशेष दूत रिचर्ड बेनेट ने अस्पताल पर हुए हमले में आम नागरिकों की मौत पर चिंता व्यक्त की। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन ने भी हमले की निंदा करते हुए कहा कि अस्पतालों जैसे सार्वजनिक स्थानों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। काबुल में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि निवासियों ने शहर के ऊपर लगातार हवाई गतिविधियों की सूचना दी है। पाकिस्तानी सेना ने हाल के हफ्तों में कई बार काबुल पर हमले किए हैं, जिससे भारी संख्या में आम नागरिक हताहत हुए हैं।
पाकिस्तान ने पहले अस्पताल को निशाना बनाये जाने से इन्कार किया था और कहा था कि किसी भी नागरिक स्थल को निशाना नहीं बनाया गया। देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस हमले में 400 से अधिक लोग मारे गए हैं। अफगानिस्तानी स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता शराफत जमान ने भी बताया कि अस्पताल का एक पूरा हिस्सा नष्ट हो गया है। अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने भी वीडियो पोस्ट किया। स्थानीय टेलीविजन स्टेशनों ने एक इमारत के मलबे में दमकलकर्मियों को आग बुझाने के लिए संघर्ष करते हुए फुटेज प्रसारित किया। यह कथित हमला अफगान अधिकारियों द्वारा दोनों पक्षों के बीच उनकी साझा सीमा पर गोलीबारी की घोषणा के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें अफगानिस्तान में चार लोग मारे गए। दोनों पड़ोसी देशों के बीच वर्षों में सबसे भीषण संघर्ष तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है।
दूसरी तरफ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मुशर्रफ जैदी ने आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि काबुल में किसी भी अस्पताल को निशाना नहीं बनाया गया था। किन्तु एक पोस्ट में, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि हमलों में ‘काबुल और नंगरहार में अफगान तालिबान और अफगानिस्तान स्थित पाकिस्तानी आतंकवादियों के सैन्य प्रतिष्ठानों और आतंकवादी समर्थन के बुनियादी ढांचे, जिसमें तकनीकी उपकरण और गोला-बारूद भंडार शामिल हैं, को सटीक रूप से निशाना बनाया गया था।’ मंत्रालय ने कहा कि इन सुविधाओं का इस्तेमाल निर्दोष पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ किया जा रहा था। पाकिस्तान का लक्ष्यीकरण ‘सटीक और सावधानीपूर्वक किया गया था ताकि कोई भी अप्रत्यक्ष नुकसान न हो।’
हमले के बाद यहां स्थित एक बड़े कमर्शियल मार्केट में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते करीब 150 से ज्यादा दुकानें जलकर खाक हो गईं और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। यह हमला रिहायशी और व्यावसायिक इलाके के करीब हुआ, जिससे लोगों में डर और गुस्सा दोनों देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर इस घटना के खौफनाक वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें जलकर राख हुआ बाजार साफ दिखाई दे रहा है।
बख्तावर न्यूज एजेंसी के हवाले से मेयर मौलवी अब्दुल्ला मुस्तफा ने बताया कि रविवार सुबह करीब 4 बजे शहर की ओर कई गोले दागे गए। ये गोले एक बाजार में गिर गए, जिसके बाद वहां भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते कई दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों को काफी मेहनत करनी पड़ी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर दोनों देश आपस में क्यों लड़ रहे हैं। खुद को मुसलमानों का लीडर बताने वाला मुल्क पाकिस्तान आखिर मासूमों की जान क्यों ले रहा है? आइये जानते हैं पूरी डिटेल-
इस संघर्ष के पीछे मुख्य कारण पाकिस्तान का यह आरोप है कि अफगान तालिबान पाकिस्तान के आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) को सुरक्षित ठिकाने दे रहा है। टीटीपी को पाकिस्तानी तालिबान भी कहा जाता है। पाकिस्तान का कहना है कि यह संगठन अफगानिस्तान की जमीन से काम कर रहा है, जबकि अफगान तालिबान बार-बार इस आरोप से इन्कार करता रहा है। अक्तूबर 2025 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एक हवाई हमला भी किया था। पाकिस्तान की सेना ने कहा था कि यह हमला पाकिस्तान में आतंकवाद से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच सबसे घातक टकराव हुआ, जो 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से सबसे बड़ा माना गया। उसी महीने कतर और तुर्की की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच अस्थायी शांति समझौता कराया गया था लेकिन सऊदी अरब की मध्यस्थता में चल रही बाद की बातचीत 2025 के अंत तक टूट गई।
इसके बाद से सीमा पर हिंसा की कई घटनाएं सामने आईं। 16 फरवरी को एक आत्मघाती हमलावर ने सीमा सुरक्षा चौकी पर हमला किया, जिसमें 11 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी और एक बच्चे की मौत हो गई। 22 फरवरी को पाकिस्तान ने पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी अफगानिस्तान में हवाई हमले किए। इन हमलों में आतंकी शिविरों को निशाना बनाया गया। वहीं अफगान अधिकारियों का कहना था कि इन हमलों में कम से कम 18 लोग, जिनमें आम नागरिक भी शामिल थे, मारे गए। इसके बाद अफगानिस्तान ने बदले की चेतावनी दी और दोनों देशों के बीच ताजा संघर्ष शुरू हो गया। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) अपने गठन के समय से ही खुद को अफगान तालिबान का विस्तार बताता रहा है। यह पाकिस्तान का सबसे बड़ा उग्रवादी संगठन है और अमरीकी विदेश विभाग ने इसे विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया हुआ है। टीटीपी का गठन 2001 में अफगानिस्तान पर अमरीकी हमले के बाद की स्थिति से जुड़ा हुआ है।



