नशे के विरुद्ध जंग
पंजाब सरकार द्वारा पिछले काफी समय से नशों विरुद्ध एक तरह की जंग छिड़ी हुई है। इस संबंधी पुलिस विभाग को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं और उसको पूरी तरह से सुचेत रहने के लिए भी कहा गया है। यदि पिछले समय में नशों विरुद्ध उठाए गये कदमों और किए गए केसों का विवरण देखा जाए तो इस बात की पुष्टि होती है कि सरकार नशों के चलन को कंट्रोल करने के लिए गम्भीरता से यत्न कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में इस दिशा में सैकड़ों नहीं, बल्कि हज़ारों ही केस दर्ज किए गए हैं और हज़ारों नशा तस्करों को अदालत द्वारा सज़ाएं दी जा चुकी हैं। पिछले वर्षों में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सबस्टेंस (एन.डी.पी.एस.) कानून तहत केस किए जा रहे हैं और दोषियों को सख्त सज़ाएं दिलाने की गिणती में भी वृद्धि हो रही है।
पिछले वर्षों के मिले आंकड़े हैरान करने वाले हैं। इस समय दौरान 28,273 मामले दर्ज किए गए और इनमें से 23,846 दोषियों को सज़ाएं दी गई हैं। इस तरह सज़ाएं होने की गिणती 80 प्रतिशत से भी बढ़ जाती है। यह छोटी उपलब्धि नहीं है, परन्तु दूसरी तरफ जहां पुलिस द्वारा लगातार हैरोइन की खेप पकड़ने के समाचार मिल रहे हैं, वहीं बड़े यत्नों के बावजूद अभी तक भी सीमापार (ड्रोनों द्वारा) अलग-अलग तरह के घातक नशे इधर पहुंचाने का सिलसिला जारी है, जिनको आगे देशभर में भेजा जाता है। यहां तक कि अब सरकार ने प्रदेश में नशों संबंधी सर्वेक्षण करवाने की योजना भी बनाई है, जिसको 3 माह में पूरा किया जाएगा। इसमें हज़ारों कर्मचारियों की मदद ली जा रही है, इसलिए 250 करोड़ रुपये का फंड भी आरक्षित रख लिया गया है, परन्तु इसके बावजूद अलग-अलग ज़िलों में लगातार नशों के कारण नौजवानों की मौतें होने के समाचार मिल रहे हैं। इस चलन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव तो प्रत्यक्ष हैं, परन्तु आज बहुत से परिवारों में इस कारण तनाव और अलगाव बढ़ने लगे हैं। इस संबंधी थानों और अन्य सामाजिक संगठनों को लगातार शिकायतें मिलती रहती हैं, जिनमें अभिभावक, पत्नियों और अन्य पारिवारिक सदस्यों की अपने परिवार के नशेड़ियों संबंधी शिकायतें शामिल होती हैं। आज अनेकानेक परिवारों में होते लड़ाई झगड़ों का बड़ा कारण भी नशों का चलन है। चाहे इसके लिए प्रशासन द्वारा काऊंसलिंग करने वाले विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। नशा मुक्त केन्द्रों को और चुस्त-दुरुस्त बनाया जा रहा है। कानून की सख्ती भी इस्तेमाल की जा रही है और लोगों को जागरूक करने के लिए प्रशासन के अतिरिक्त अलग-अलग संस्थाओं द्वारा भी यत्न शुरू किए गए हैं, परन्तु इन सब कुछ के बावजूद लगातार मिल रहे समाचारों के अनुसार अभी बहुत कुछ ऐसा किए जाने की ज़रूरत है, जो इस चलन से उठे संताप में से भारी संख्या में प्रभावित परिवारों तथा लोगों को निकाल सकने के समर्थ हो सके।
अनेकानेक मिल रहे समाचारों में से दो का यहां ज़िक्र करना चाहेंगे। पहला यह कि मानसा ज़िले के एक गांव में एक युवक की मौत के बाद गांव की सरपंच सक्रिय हुई है। उसने कड़ा कदम उठाते हुए गांव के ही दोषी परिवार को वहां से निकालने का फैसला किया है। पुलिस द्वारा इस परिवार के सदस्यों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। इसी संबंध में मिली एक सूचना के अनुसार इस परिवार पर पहले भी 40 मामले दर्ज हो चुके हैं। गांवों में नशों के बढ़ते चलन को देखते हुए प्रक्रियास्वरूप हज़ारों गांवों ने स्वयं को नशामुक्त होने की घोषणा भी की है और सरकार की मदद से गांवों में पहरेदार भी नियुक्त किए गए हैं। दूसरी एक और बड़ी ही दर्दनाक घटना सामने आई है। पिछले दिनों ज़िला कपूरथला के एक गांव में एक बेहद दुखी मां ने यह आरोप लगाया कि नशा उसके घर से मात्र कुछ कदमों पर ही मिल रहा है और प्रतिदिन क्षेत्र में बेचा जा रहा है। इस मां के साथ बेहद दर्द देने वाला दुखांत घटित हुआ है, जिसने नशे की लत के कारण अपने 4 बेटे गंवा दिए हैं और पांचवां इसी कारण चारपाई पर पड़ा अपने अंत का इंतज़ार कर रहा है। इसी गांव की कुछ अन्य महिलाओं ने भी अपने बेटे गंवाने संबंधी बताया है। यह भी कि ऐसी घटनाओं ने सामाजिक घटनाक्रम को बदल कर रख दिया है। ज़्यादातर महिलाएं इसी कारण अपने परिवार छोड़ गई हैं।
इस संबंधी संबंधित पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस लगातार इन प्रभावित लोगों के सम्पर्क में रह कर उनकी मदद करने का यत्न कर रही है। इसी कारण कई व्यक्तियों के खिलाफ मामले भी दर्ज किए गए हैं और उन्हें अदालतों से सज़ाएं दिलाने के भी यत्न किए जा रहे हैं। हम प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदमों की प्रशंसा करते हैं, परन्तु इसके साथ ही समूचे समाज को भी सचेत तथा दृढ़ होने की ज़रूरत होगी, जो इसे रोकने के लिए प्रशासन की पूरी मदद करे। बढ़ते इस दुखांत के साथ-साथ इस पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन तथा सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार दृढ़ता भरे कड़े कदम उठाए जाने आवश्यक हैं, जो इन नकारात्मक रूझान को कम करके एक स्वस्थ समाज का सृजन करने के समर्थ हो सकें।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

