नमक सत्याग्रह ने बदल दी थी देश की तकदीर और तदबीर
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देश और दुनिया के इतिहास में 6 अप्रैल, 1930 का दिन बेहद खास है। आज ही के दिन महात्मा गांधी ने दांडी पहुंच कर समुद्र तट पर अंग्रेज़ों द्वारा बनाया नमक कानून को तोड़ा था। इसी कारण यह दिन इतिहास में अमर हो गया। स्वतंत्रता आंदोलन के कारण दांडी गांव का नाम विश्व मानचित्र में अंकित हुआ है। महात्मा गांधी ने यहां नमक सत्याग्रह कर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक एवं संग्रहालय का निर्माण कराकर गांधी जी की याद को अमर किया है। नमक सत्याग्रह महात्मा गांधी द्वारा चलाये गये प्रमुख आंदोलनों में से एक था।
भारत में अंग्रेज़ों के शासनकाल में नमक उत्पादन और विक्रय के ऊपर भारी मात्रा में कर लगा दिया था। नमक जीवन की ज़रूरी चीज होने के कारण भारतवासियों को इस कानून से मुक्त करने और अपना अधिकार दिलवाने हेतु सविनय अवज्ञा का कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कानून भंग करने के बाद सत्याग्रहियों ने अंग्रेज़ों की लाठियां खाई थी, परन्तु पीछे नहीं मुड़े थे। इस आंदोलन में कई नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। यह आंदोलन पूरे एक साल चला और 1931 को गांधी-इर्विन समझौते के साथ खत्म हो गया। भारतीय स्वाधीनता संग्राम का इतिहास इस बात का साक्षी है कि 1920 से 1946 तक आज़ादी की निर्णायक लड़ाई महात्मा गांधी के नेतृत्व में लड़ी गई। आज़ादी के आंदोलन में 1930 में 12 मार्च से 6 अप्रैल तक साबरमती से दांडी तक आयोजित गांधी के ऐतिहासिक नमक सत्याग्रह का अहम योगदान था जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा और इतिहास में इस सत्याग्रह का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गया।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 1930 में दांडी से अंग्रेज़ों के खिलाफ नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी। भारत के आधुनिक इतिहास का सबसे चर्चित गांव है दांडी। पिछले 91 बरस से दुनियाभर में उसकी एक ऐसी पहचान है, जो मिटना तो दूर कभी धूमिल भी नहीं पड़ी। विश्व प्रसिद्ध दांडी गांव गुजरात के शहर नवसारी से 16 किलोमीटर दूर स्थित है। अंग्रेज़ों द्वारा अधिक कर लगाने से उसकी कीमत कई गुना बढ़ गई थी। अंग्रेज़ी शासन के दौरान भारत की अधिकतर गरीब जनसंख्या के खाने का नमक ही एक सहारा बचा था। उस पर भी अधिक कर होने से वे उसे खरीद पाने में असमर्थ थे। गांधी जी ने नमक कानून के खिलाफ दांडी पदयात्रा में भारी संख्या में लोगों ने बापू का साथ दिया था। इस ऐतिहासिक मार्च को जीवंत करने के उद्देश्य से दांडी में राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक एवं संग्रहालय बनाया गया है। यहां प्रतिमाओं के अलावा गेस्ट हाउस भी है, जहां लोग ठहर सकते हैं।
दांडी में 110 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय नमक सत्याग्रह स्मारक तैयार किया गया है। यह स्मारक भारत में नमक बनाने और उसकी बिक्री पर ब्रिटिश सरकार की मनमानी कर वसूली के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन को गरिमामय तरीके से याद करता है। यह स्मारक 15 एकड़ भूमि पर बनाया गया है। स्मारक में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 18 फुट ऊंची प्रतिमा बनाई गई है। इसके अलावा यहां खारे पानी के कृत्रिम तालाब भी बनाए गए हैं। यहां नमक बनाने के लिए सोलर मेकिंग बिल्ंिडग वाले 14 जार भी रखे गए हैं। 80 दांडी यात्रियों की सिलिकॉन ब्रांज की मूर्तियां 42 मूर्तिकारों ने बनाई हैं जिनमें अलग-अलग देशों के नौ मूर्तिकार शामिल हैं। 24 भित्तिचित्र और सिलिकॉन कांस्य का ढांचा लगभग दो दर्जन कलाकारों ने तैयार किया था, जहां गांधी की पांच मीटर ऊंची एक प्रतिमा है, जिसके हाथ में छड़ी है। यद्यपि इस स्मारक के हर कोने में देखने योग्य कुछ न कुछ बहुत खास चीज है, लेकिन यहां का सबसे खास आकर्षण हैं गांधी जी के नेतृत्व में आए 80 सत्याग्रहियों की प्रतिमाएं।
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