डिजिटल अरेस्ट जैसा ही है एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट का मकड़जाल !

भले ही डिजिटल अरेस्ट आज देश की बड़ी समस्या बन गयी हो या फिर अपराधियों की पहली पसंद, लेकिन अगर ध्यान दें तो इन दिनों एक और नये किस्म की अरेस्ट जैसी समस्या सामने आ रही है। जी हां, यह है एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट। इसमें कोई एस्ट्रोलॉजर किसी को धमकाता नहीं है, न जेल में डालने की धमकी देता है। इसके लिए वह लालच की हथकड़ी डालता है, किसी को विधायक बनवाने के सपने दिखाता है, किसी रमणी को यह भरोसा दिलाता है कि अगर वह एक कर्मकांड करा लेगी तो जिसे चाहे अपनी जुल्फों का गुलाम बना लेगी। किसी को मनचाही प्रेमिका के पाने का, किसी को सपने के राजकुमार को अपना बना लेने के ख्वाब दिखाता है और नतीजे में उसी तरह जम कर ठगी अंजाम दी जा रही है, जैसे डिजिटल अरेस्ट के दौरान डर से उगाही की जाती है। 
इस एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट का शिकार सबसे अधिक महिलाएं हो रही हैं। इसमें यह फर्क नहीं है कि वे गरीब घर की हैं या फिर मंत्री, अफसर या फेमस उद्योगपतियों की पत्नियां ही क्यों न हों। हाल में महाराष्ट्र का अशोक खरात मामला इसका ऐसा उदाहरण है, जो बताता है कि परिवार की सुरक्षा, तरक्की, ऊंचा पद, रोज़गार, कॅरियर और जल्दी-जल्दी धनवान बनने की चाह में एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट कहीं ज्यादा आसान हो गया है। डिजिटल अरेस्ट तथा एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट में अंतर क्या है? क्या दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं? दरअसल डिजिटल अरेस्ट मोबाइल या संचार माध्यम के उस उपकरण से होता है, जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से शिकार बन जाए। एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट भी इसका एक अंग ही है। अपराधी या अपराध करने वाला इसमें शिकार बनाने वाले को रिकॉर्ड कर लेता है और फिर उससे जबरन धन वसूली करता है या फिर शारीरिक शोषण। वैसे दोनों में ही ब्लैकमेल मिशन होता है। डिजिटल अरेस्ट लाइव होता है और एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट भविष्य की रणनीति का हिस्सा होता है।
एक बात यह भी है कि सरकार अथवा दूसरी एजेंसियां डिजिटल अरेस्ट के लिए तो सतर्कता अभियान चलाती हैं, शिकार के आंकड़े प्रस्तुत करती हैं, अपराधियों को पकड़ने के लिए अभियान चलाती हैं तथा पूरे देश में इसके लिए समय-समय पर रणनीति बनाई जाती है। लेकिन दुखद यह है कि एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट के लिए कोई भी कानून या अभियान जनता को अभियान के माध्यम से नहीं बताया जाता। कई अवसर ऐसे आते हैं, जिसमें यह एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट अल्पवयस्कों के लिए लागू होने वाले कानून की आड़ में शिकार को न्याय नहीं मिलने में आड़े आ जाता है। एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट की महिलाओं के शिकार होने के पीछे ज्योतिष विज्ञान के जानकार कहते हैं, ‘आज दुनिया में सर्वाधिक तीन बातें हैं, जिनसे भविष्यवक्ता या ज्योतिष के नाम पर ठगने वाले अपना काम कर रहे हैं। जब कोई महिला या अन्य अपनी समस्या को लेकर इन ठगों के पास जाती है, तो यह उसे सबसे पहले कालसर्प दोष, पितृ दोष तथा काला जादू में फंसाते हैं। इस पर भी अगर वह बच जाती है, तो यह उसे यह कहकर फंसाते हैं कि उसकी समस्या क्यों नहीं सुलझ रही?’ 
एस्ट्रोलॉजी अरेस्टर मौका देखकर महिला को इतना डरा देता है कि उसे लगता है कि इन्द्रपूजा नहीं करवाई तो उसके पिकर नाराज रहेंगे। वह सोचती है कि अगर वह अकेली साधना में रहेगी, तो उसके पति को होने वाली समस्याएं समाप्त हो जाएंगी या पति-पत्नी के संबंध मधुर हो जाएंगे। यहीं पर महिला के साथ वह सारे षड्यंत्र आरंभ हो जाते हैं जिससे उसका दैहिक शोषण आरंभ हो जाता है। देह शोषण एक ऐसी समस्या है, जिसमें चाहे वह पुरुष हो या स्त्री, जल्दी किसी से भी शेयर नहीं की जा सकती। इसी का लाभ यह एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट करने वाले लेते हैं। इसमें वे धन की उगाही तो करते ही हैं, साथ ही शारीरिक शोषण को सामूहिक दुष्कर्म तक बना डालते हैं। अशोक खरात तो एक उदाहरण मात्र है,असलियत में हजारों मामले सामने ही नहीं आ पाते और जो आ जाते हैं, उनमें सजा का प्रतिशत इतना कम है कि एस्ट्रोलॉजी अरेस्टरों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ऐसे लोग भले ही प्रवचन देने वाले गुरु हों, पर वह भी इसी तरह के आरोपों में जेल में हैं या सजा काट चुके हैं। 
आखिर सरकार क्या कर रही है इनके खिलाफ? इस पर कानून के जानकार मानते हैं कि डिजिटल अरेस्ट में हमें सबूत बहुत जल्दी मिल जाते हैं, सूत्र पकड़ने में अधिक मशक्कत नहीं होती, लेकिन एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट में हमें शारीरिक शोषण या आर्थिक शोषण सिद्ध करने में जबरदस्त मेहनत करनी पड़ती है। कई बार सबूतों का अभाव सजा से बचा लेता है। एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट में एक जो समानता देखी गई है, वह यह है कि इसमें भविष्यवक्ता या गुरु बनने वाला व्यक्ति राजनीतिक, प्रशासनिक स्तर पर मजबूत पकड़ रखता है और जब वह पकड़ा जाता है, तो उसके पीछे कई शक्तियां सक्रिय हो जाती हैं, जो उसे बचाने के साथ ही इस पर भी काम करती हैं कि शोषण के शिकार को डराया-धमकाया जा सके। आज स्थिति यह है कि धर्म के नाम पर पाखंड करने वाले, देवता प्रसन्न करने वाले, तंत्र क्रिया के तथाकथित महारथी हर वर्ग में पूजे जा रहे हैं और जिसे एलीट वर्ग कहा जाता है, उस वर्ग की महिलाएं या पीड़ित इनके पास जाकर अपनी इज्जत, पैसा, सम्मान तथा सामाजिक रुतबा गंवाकर समाज में कुचर्चित हो रही हैं। बस अंतर यह रह गया है कि चर्चा हो रही है और जो चर्चा सम्मान के साथ होनी चाहिए, वह एस्ट्रोलॉजी अरेस्ट का शिकार बताकर हो रही है। लगने लगा है कि अब जल्दी ही सरकार भी इस ओर ध्यान देगी और इसे भी डिजिटल क्राइम में उसी तरह शामिल करेगी, जिस तरह से डिजिटल अरेस्ट के खिलाफ काम कर रही है।
-इमेज रिफ्लेक्शन सेंटर

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