अमित शाह बोले- धर्म के आधार पर आरक्षण कभी नहीं देंगे
नई दिल्ली, 17 अप्रैल - अमित शाह ने कहा 'भारतीय संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद इंडी अलायंस के दलों ने केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए देश में मुस्लिम आरक्षण की मांग की है। इस देश में यदि ओबीसी समाज की कोई सबसे बड़ी विरोधी पार्टी है, तो वह कांग्रेस है। इन्होंने चौधरी चरण सिंह और सीताराम केसरी जैसे नेताओं की मांगों को कभी पूरा नहीं किया। इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने हमेशा पिछड़ों के हितों को दबाया है।
उन्होंने बताया '1950 के दशक में काका कालेलकर आयोग के सुझावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। 1980 में जब इंदिरा जी सत्ता में आईं, तब मंडल आयोग के सुझावों को नकार दिया गया। 1990 में जब वीपी सिंह की सरकार आई, तब जाकर मंडल आयोग लागू हो सका।'
शाह ने कहा 'विपक्ष के तत्कालीन नेता नेहरू जी ने तो मंडल आयोग के विरोध में सदन में सबसे लंबा भाषण दिया था। कांग्रेस ने हमेशा जातिगत जनगणना का भी विरोध किया, लेकिन अब जब वे चुनाव हार रहे हैं, तो अचानक ओबीसी के हितैषी बनने का ढोंग कर रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने एक अति पिछड़े समाज के व्यक्ति को देश का प्रधानमंत्री बनाया है। मोदी सरकार में आज 27 मंत्री ओबीसी समुदाय से हैं, जो कुल मंत्रिमंडल का लगभग 40 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री मोदी ने ही ओबीसी आयोग को संवैधानिक मान्यता दी और राज्यों को ओबीसी सूची संशोधित करने का अधिकार पुनः प्रदान किया। मोदी सरकार ने अब तक 16 नई जातियों को ओबीसी श्रेणी में शामिल कर उन्हें न्याय दिलाया है।

