कांग्रेस आलाकमान ने अनुशासनहीनता के विरुद्ध लिया कड़ा फैसला

हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग करने वाले पांचों विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। हरियाणा कांग्रेस कमेटी, राज्य अनुशासन समिति, विधायक दल और राष्ट्रीय अनुशासन समिति की सिफारिशों के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खरगे ने इन विधायकों के निलंबन पर मोहर लगा दी है। जिन पांच विधायकों को निलंबित किया गया है, उनमें नारायणगढ़ की विधायक श्रीमति शैली चौधरी, सढ़ोरा की विधायक श्रीमति रेनू बाला, फिरोजपुर झिरका के विधायक मोहम्मद इलियास, हथीन के विधायक मोहम्मद इसरायल और रतिया के विधायक सरदार जरनैल सिंह शामिल हैं।
विधायकों को निलंबित किए जाने की जानकारी हरियाणा कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने दी। बताया जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी अब इन पांचों विधायकों की विधानसभा सदस्यता खत्म करने के लिए स्पीकर के सामने याचिका दायर कर सकती है। विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि पांचों विधायकों को निलंबित करके कांग्रेस आलाकमान ने अनुशासन को प्राथमिकता दी है। पिछले महीने 16 मार्च को इन पांचों विधायकों पर राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कर्मवीर बौद्ध के खिलाफ मतदान करने का आरोप है। हालांकि कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर मामूली अंतर से जीत हासिल करने में कामयाब हो गए थे। निलंबित किए गए इन पांचों विधायकों को अब न तो पार्टी संगठन की बैठकों में बुलाया जाएगा और न ही इनके पास पार्टी की कोई जिम्मेदारी रहेगी। वैसे पांचों विधायक लगातार भाजपा नेताओं के संपर्क में हैं।
विधायकों के अपने-अपने तर्क
निलंबित किए गए कांग्रेस विधायक मोहम्मद इलियास कई बार विधायक और मंत्री रह चुके हैं और उनका कहना है कि मतदान के दिन वह बीमार थे और उन्हें नहीं पता कि क्रॉस वोटिंग जैसा कुछ हुआ है। निलंबित किए गए दूसरे कांग्रेस विधायक मोहम्मद इसरायल पहले ही कह चुके हैं कि उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में कर्मवीर बौद्ध पसंद नहीं थे। उनका यह भी कहना था कि मैंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान किया। पार्टी ने निलंबन के बारे सोच-विचार कर ही निर्णय लिया गया होगा। आगे मुझे क्या करना है, इस बारे अपने समर्थकों के साथ बैठकर फैसला लिया जाएगा। वहीं शैली चौधरी और रतिया के विधायक जरनैल सिंह उन विधायकों में शामिल हैं जिन्होंने कई बार मुख्यमंत्री व भाजपा नेता नायब सिंह सैनी की सार्वजनिक रूप से तारीफ की थी जबकि कांग्रेस विधायक रेनू बाला क्रॉस वोटिंग के आरोपों को पूरी तरह नकार चुकी हैं। निलंबित किए गए कांग्रेस विधायक जरनैल सिंह का कहना था कि उन्हें पार्टी ने जो नोटिस दिया था, उसका लिखित जवाब उन्होंने अनुशासन कमेटी को दे दिया था, लेकिन निलंबन से पहले मुझे अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया नहीं गया और यह कार्यवाही पूरी तरह से एकतरफा है। निलंबित किए गए पांच विधायकों में से दो विधायक शैली चौधरी और रेनू बाला को कांग्रेस महासचिव कुमारी शैलजा का समर्थक माना जाता है और बाकी तीन विधायकों की गिनती नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थकों के तौर पर होती रही है। पांचों विधायक निलंबित किए जाने के बावजूद विधानसभा में कांग्रेस पार्टी का व्हिप मानने के लिए बाध्य होंगे जबकि राज्यसभा के चुनाव में पार्टी व्हिप लागू नहीं होता। अब इन पांचों विधायकों के पास अपना निर्दलीय रुख बनाए रखने या कांग्रेस में वापसी की कोशिश करने का विकल्प बना रहेगा। हालांकि इनमें से ज्यादातर विधायक लगातार भाजपा के संपर्क में पहले से ही हैं लेकिन अगर वे भाजपा अथवा किसी अन्य दल में शामिल होते हैं तो उन पर दल-बदल कानून लागू होगा।
कांग्रेस आलाकमान का कड़ा संदेश
पांच विधायकों के निलंबन से प्रदेश में कई गुटों में बंटे कांग्रेसी नेताओं को आलाकमान ने एक कड़ा संदेश देने का काम किया है जिससे कांग्रेस नेताओं को बता दिया गया है कि गुटबाजी, खींचातान और अनुशासनहीनता बरतने वालों पर नरमी नहीं बरती जाएगी। इस निलंबन से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने हरियाणा कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में किसी भी नेता की नहीं चलने दी और एक साथ पांच विधायकों का निलंबन कर बता दिया कि अनुशासनहीनता पर पार्टी आलाकमान सख्त फैसला लेने से संकोच नहीं करेगी, इसके लिए चाहे उन्हें राजनीतिक तौर पर कितना भी बड़ा नुकसान क्यों न झेलना पड़े। राज्यसभा चुनाव के लिए जब कांग्रेस उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध के नाम की घोषणा की गई थी तब तक कांग्रेस के ज्यादातर विधायक उन्हें जानते तक नहीं थे। यह भी साफ था कि उम्मीदवार का चयन कांग्रेस आलाकमान ने अपने स्तर पर किया था। पार्टी आलाकमान का फैसला मानते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष  राव नरेंद्र सिंह, नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने न सिर्फ नाराज विधायकों को एकजुट करने का काम किया, वहीं क्रॉस वोटिंग की आशंका को भांपते हुए हरियाणा कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुनाव एजेंट बनाया गया। इसके बावजूद पांच कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग व चार कांग्रेस विधायकों के वोट रद्द हो गए। जिन चार विधायकों के वोट रद्द हुए, उनके नाम आज तक न तो सार्वजनिक किए गए और न ही उनके खिलाफ कोई कार्यवाही की गई।
 हरियाणा में एक दशक से भी ज्यादा लंबे समय तक प्रदेश कांग्रेस के जिला स्तर के संगठन का गठन नहीं हो पाया था। मौजूदा अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह जिलाध्यक्षों की नियुक्तियां करवाने में कामयाब रहे हैं जबकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी और ब्लॉक अध्यक्षों की अभी तक घोषणा नहीं हो पाई। हरियाणा में कांग्रेस का एक बड़ा गुट नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा के साथ है। इसके अलावा कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला का अलग गुट है। पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह व उनके बेटे पूर्व सांसद बृजेंद्र सिंह का अपना एक अलग गुट है और पूर्व सिंचाई मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव का अपना अलग गुट है। गुटों में बटी कांग्रेस को पार्टी आलाकमान एकजुट तो नहीं कर पाया लेकिन एक संदेश देने की जरूर कोशिश की गई है कि अनुशासनहीनता को अब आगे से सहन नहीं किया जाएगा।
निकाय चुनावों में कांग्रेस- भाजपा आमने-सामने
इस बीच स्थानीय शहरी निकाय चुनावों में कांग्रेस और भाजपा एक बार फिर आमने-सामने होंगे। हरियाणा स्थानीय शहरी निकायों के चुनावों की घोषणा हो चुकी है। पंचकूला, अंबाला और सोनीपत में नगर निगमों के आम चुनाव होने जा रहे हैं और 10 मई को चुनाव होंगे। इसके अलावा कई नगर परिषदों और नगर पालिकाओं के भी चुनाव होने जा रहे हैं। इन चुनावों में कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर होने के आसार हैं। कांग्रेस ने तीनों स्थानों पर मेयर उम्मीदवारों के अलावा कुछ अध्यक्ष व पार्षद पदों पर भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। भाजपा निगम चुनाव हमेशा अपने सिंबल पर लड़ती रही है और कांग्रेस ने भी मेयर और पार्षद पद के चुनाव सिंबल पर लड़ने का निर्णय लिया है। इस समय तीनों नगर निगमों में मेयर पद पर भाजपा का कब्जा है। एक तरफ जहां भाजपा स्थानीय शहरी निकाय चुनाव में ट्रिपल इंजन सरकार का नारा देकर चुनाव में उतरेगी, वहीं गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस के सामने एकजुट होकर चुनाव लड़ना किसी चुनौती से कम नहीं है। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्त्ताओं का मनोबल कमजोर हुआ है। वैसे शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में इनेलो, जजपा व आप उम्मीदवार भी मैदान में होंगे, लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस व भाजपा में ही माना जा रहा है।

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