बहुत ज़रूरी है युद्ध रोकना
अमरीका और इज़रायल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी को हमला किया गया था। इससे पहले दोनों पक्षों के बीच मामले को हल करने के लिए बातचीत भी होती रही थी। अमरीका किसी भी सूरत में ईरान को एटमी शक्ति नहीं बनने देना चाहता। इसलिए वह ईरान के यूरेनियम के भंडारों को अमरीका के हवाले करने पर ज़ोर दे रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर जहाज़ों के आवागमन रोके जाने के साथ दुनिया भर के लिए एक बड़ा संकट पैदा हो गया है। पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों द्वारा किए गये यत्नों के बाद दोनों पक्षों की ओर से दो सप्ताह के लिए युद्धबंदी का ऐलान किया गया था। इस बीच इस्लामाबाद में अमरीका और ईरान के उच्च अधिकारियों की दो दिन तक बैठकें भी हुई थीं। अमरीका द्वारा इसमें उप-राष्ट्रपति जे.डी. वैंस भी शामिल हुए थे परन्तु यह बातचीत किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची।
उसके बाद ईरान ने होर्मुज रास्ता खोलने का ऐलान भी कर दिया था, जिसका अमरीकी राष्ट्रपति द्वारा स्वागत भी किया गया था। इसी दौरान लेबनान में इज़रायल द्वारा हिज़बुल्ला संगठनों के ठिकानों पर लगातार बमबारी भी की जाती रही थी। अमरीका के दखल पर वह भी रोक दी गई थी। होर्मुज जलडमरू को बंद करने के बाद अमरीका ने ईरान की बंदरगाहों की नाकाबंदी कर ली थी, जिसको वह खत्म नहीं कर रहा। डोनाल्ड ट्रम्प के एक ब्यान के अनुसार अमरीका यह नाकाबंदी तभी हटाएगा, जब स्थायी शांति समझौता हो जाएगा। अब एक बार फिर होर्मुज की ईरान द्वारा की गई नाकाबंदी ने हालात और भी पेचीदा कर दिए हैं। दोनों पक्षों की दूसरी बार बातचीत मंगलवार 21 अप्रैल को इस्लामाबाद में होनी निर्धारित हुई थी, परन्तु इस संबंध में ईरानी अधिकारियों द्वारा इन्कार करने के बाद हालात और भी गम्भीर हो गए हैं। आगामी बुधवार को दोनों पक्षों के युद्ध-विराम की अवधि भी खत्म हो रही है। डोनाल्ड ट्रम्प की धमकियां और भी तेज़ ही गई हैं। ईरान द्वारा होर्मुज की नाकाबंदी उसे इसलिए बहुत महंगी पड़ सकती है, क्योंकि यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का जल मार्ग है। इसका प्रभाव विश्व भर के देशों पर पड़ रहा है। खाड़ी के देशों ने पहले ही तेल तथा गैस का उत्पादन कम कर दिया है, जिससे तेल की कीमतें आसमान पर चढ़ गई हैं और गैस की आपूर्ति भी कम होने का खतरा बन गया है। इसके साथ ही आवश्यक एल्यूमीनियम, सल्फर, निक्कल तथा तांबा आदि धातुओं के उत्पादन पर भी व्यापक असर पड़ेगा। विगत दिवस होर्मुज की नाकाबंदी के दौरान ईरान ने भारत के भी दो जहाज़ों को पीछे लौटने के लिए मजबूर कर दिया था। भारत के लगभग एक दर्जन जहाज़ अभी भी विवाद के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य पार नहीं कर सके।
अमरीका ने चाहे यह कहा है कि ज़रूरतमंद देश एक और महीने के लिए रूस से तेल खरीद सकते हैं जिसका भारत को सख्त नोटिस लेना चाहिए और अमरीकी राष्ट्रपति को यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि वह रूस के साथ आपसी व्यापार में अमरीका के निर्देशों को नहीं मानेगा। इसके साथ ही भारत को तेल तथा गैस की प्राप्ति के लिए और प्रयास भी तेज़ करने की ज़रूरत होगी, ताकि वह इन बेहद ज़रूरी वस्तुओं की कमी महसूस न करे। आगामी दिनों में अस्थायी समझौते की तारीख समाप्त हो रही है, जिस कारण एक बार फिर दुनिया भर में बेचैनी पैदा हो गई है। ऐसे समय में बड़े अंतर्राष्ट्रीय गठबंधनों को पूरी सक्रियता दिखा कर इस भयावह सम्भावित युद्ध को रोकने के लिए फिर से बड़े कदम उठाने चाहिएं।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

