मानव आबादी और वनस्पति के लिए नया खतरा है हीटवेव

भारत में अप्रैल महीने में ही भीषण गर्मी पड़ रही है और अभी तो मई महीना आना बाकी है, ऐसे में लोगों की हालत खराब हो रही है। दिन के समय और खासकर दोपहर में अत्यधिक गर्मी होती है। गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में दोपहर के समय तापमान लगभग 40 डिग्री तक पहुंच रहा है। जानकारों के अनुसार भारत में गर्मी की समस्या लगातार गम्भीर होती जा रही है। शाम होते ही गर्मी खत्म हो जाती है, ऐसा अब नहीं रहा। देश के अधिकांश राज्यों में सूर्यास्त के बाद भी भीषण गर्मी से राहत नहीं मिलती।
मौसम विभाग ने भी बताया है कि भारत में दिन की तुलना में रात का औसत तापमान अधिक तेजी से बढ़ रहा है। महाराष्ट्र और तेलंगाना को छोड़कर देश के अधिकांश राज्यों में रात का औसत तापमान दिन से अधिक दर्ज किया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में रात के तापमान में बड़े पैमाने पर वृद्धि हुई है लेकिन इस पर प्रशासन और आम जनता द्वारा अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वर्तमान में कई क्षेत्रों में तापमान 45 डिग्री तक पहुंच चुका है।
संभावना जताई गई है कि मई महीने तक कई शहरों का तापमान औसतन 4 से 8 डिग्री तक बढ़ सकता है। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और झारखंड जैसे राज्यों में हीटवेव अलर्ट जारी किया गया है। अमरावती, वर्धा, नागपुर, दिल्ली जैसे शहरों में दो ही दिनों में तापमान 3 से 4 डिग्री बढ़ गया, जिससे लोगों को असहनीय गर्मी का सामना करना पड़ा। उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 44 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम में 43 डिग्री तापमान रहा। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी के कारण स्कूलों में 11 दिनों की छुट्टी घोषित कर दी गई है। मध्य प्रदेश के कई ज़िलों में स्कूलों का समय बदलकर सुबह कर दिया गया है और अवधि भी कम कर दी गई है।
चिंताजनक बात यह है कि दुनिया के 50 सबसे गर्म स्थानों में से 20 शहर भारत के हैं। औसत तापमान के आधार पर चीन के युन्नान प्रांत का जिंगहोंग शहर 37 डिग्री के साथ पहले स्थान पर है, जबकि ओडिशा का बलांगीर 36 डिग्री के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद वियतनाम का सोन ला तीसरे स्थान पर है। चौथे और पांचवें स्थान पर क्रमश: महाराष्ट्र का चंद्रपुर और छत्तीसगढ़ का रायपुर हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र का गडचांदूर, छत्तीसगढ़ का महासमुंद, बिहार का सासाराम, छत्तीसगढ़ का भिलाई, तेलंगाना का कोठापेट और छत्तीसगढ़ का बिलासपुर भी इस सूची में शामिल हैं।
मौसम विभाग ने बढ़ती हुई गर्म रातों को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। जब रात का तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री अधिक होता है, तो उसे गर्म रात की श्रेणी में रखा जाता है। 6.4 डिग्री से अधिक होने पर अत्यधिक गर्म रात मानी जाती है। हीटवेव की स्थिति में यह आम बात हो जाती है। आमतौर पर जब दिन का तापमान 40 डिग्री से ऊपर होता है, तो रात का तापमान भी बढ़ जाता है।
1980 से 2020 के बीच के अध्ययन के अनुसार भारत में रात का तापमान लगातार बढ़ा है। हर दशक में औसतन 8 दिनों की वृद्धि गर्म रातों में दर्ज की गई है। विशेष रूप से पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और तटीय राज्यों में यह वृद्धि अधिक देखी गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में 2012 से 2022 के बीच हर गर्मी में औसतन 15 गर्म रातें बढ़ी हैं। बेंग्लुरु में 11, भोपाल और जयपुर में 7.7 तथा दिल्ली में 6 रातों की वृद्धि दर्ज की गई है।
इस वर्ष अल नीनो प्रभाव के कारण तापमान में और वृद्धि की संभावना है। मौसम विभाग का मानना है कि 2026 का सर्दी का मौसम सामान्य रहा है, लेकिन गर्मी अधिक तीव्र रहने की संभावना है। मुख्य कारणों में जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ता शहरीकरण शामिल हैं। ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता उत्सर्जन दिन के साथ-साथ रात में भी वातावरण को गर्म बनाए रखता है। शहरों में अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव के कारण स्थिति और गम्भीर हो जाती है। कंक्रीट और कांच की संरचनाएं दिन में गर्मी सोखकर रात में छोड़ती हैं। ऊंची इमारतों के कारण गर्म हवा ऊपर नहीं उठ पाती और नीचे ही फंसी रहती है। एयर कंडीशनर के बढ़ते उपयोग से भी शहरी तापमान बढ़ रहा है, क्योंकि एसी से निकली गर्म और नम हवा बाहर वातावरण को और गर्म करती है। दिन और रात दोनों समय बढ़ते तापमान के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। हृदय रोग का खतरा बढ़ रहा है, डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ रही है, लू लगने का खतरा रात में भी बढ़ गया है, नींद में बाधा आ रही है, शरीर रात में ठंडा नहीं हो पाता।
विशेष रूप से बुजुर्ग, बच्चे और हृदय या श्वास संबंधी रोगों से पीड़ित लोग अधिक प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा बेचैनी, थकान, त्वचा में जलन और आंखों में जलन जैसी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। चिंताजनक बात यह है कि हीटवेव से निपटने के लिए अधिकांश योजनाएं केवल दिन के समय को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं, जबकि रात के बढ़ते तापमान के लिए कोई ठोस योजना नहीं है। साथ ही, शहरी क्षेत्रों में हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) की कमी और ऊंची इमारतों की बढ़ती संख्या भी इस समस्या को और बढ़ा रही है। स्पष्ट है कि बढ़ती गर्मी अब केवल दिन की समस्या नहीं रही, बल्कि रातें भी उतनी ही खतरनाक होती जा रही हैं और यही आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती है।
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