‘गिल्ला पीहण’ था महिला आरक्षण विधेयक

लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक का पारित न होना काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। अंग्रेज़ी भाषा के समाचार पत्र ‘द हिन्दू’ द्वारा इसे गलत-मलत की की सच्ची मौत कहना इसकी धारणाओं पर मुहर लगाता है। पंजाबी भाषा में इसे ‘गिल्ला पीहण’ कहा जा सकता है। यदि गहनता से देखें तो यह संशोधन विधेयक का देहांत सिर्फ इस विधेयक तक ही सीमित नहीं, केन्द्र की वर्तमान सरकार के लिए खतरे की घंटी भी है।
 सरकार के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा चल रही कार्यवाही में हस्तक्षेप करके विधेयक का समर्थन करने के लिए मिन्नत करना और इसमें विफल रह जाना इसकी पुष्टि करता है।
इस असमंजस की जड़ें उस जल्दबाज़ी में थीं, जो सत्तारूढ़ के क्रियान्वयनों में से स्पष्ट दिखाई देती थीं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसका विफलता का भंडा चाहे कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी तथा डीएमके जैसी अन्य पार्टियों पर फोड़ें, परन्तु उनके पास इस बड़ी सच्चाई का कोई उत्तर नहीं था कि सही महिला आरक्षण विधेयक तो लगभग तीन वर्ष पहले (2023) पारित हो चुका है, जो आज तक लागू नहीं किया गया, लेकिन क्यों?
यह बात भी नोट करने वाली है कि इस शोर-शराबे में सत्तारूढ़ पक्ष की तरफ से इस विधेयक का समर्थन करने वालों में कोई बड़ा महिला चेहरा नहीं था जबकि विपक्ष के रूप में अपनी दलील देने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा थीं। उन्होंने बेझिझक होकर कहा कि महिलाओं के अधिकारों संबंधी पढ़ी-लिखी तथा सचेत महिलाओं को सिर्फ बातों से मूर्ख नहीं बनाया जा सकता। 2023 में पारित किए गए विधेयक को 16 अप्रैल की आधी रात को नोटिफिकेशन जारी करके लागू करने के पीछे भी देश की आधी आबादी को भ्रमजाल का शिकार बनाना था। सरकार भली-भांति जानती थी कि यदि वोटिंग के दौरान यह विधेयक खारिज हो जाता या पारित नहीं होता तो 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक भी मिट्टी हो जाना था।  
इस विधेयक के खारिज होने संबंधी विपक्षी पार्टियों के सचेत होने का एक और कारण वर्तमान सरकार द्वारा बनाई जा रही परिसीमन की योजना भी थी। यही कारण था कि विपक्षी पार्टियों ने कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी को इसका जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार किया हुआ था। ‘द हिन्दू’ समाचार पत्र का इस पूरी प्रक्रिया को सच्ची तथा स्थायी मौत कहना बनात है।
—अंतिका—
(सस्सी हशम विच्चों)
नाज़क पैर मलूक सस्सी दे 
मेहंदी नाल शिंगारे,
बालू रेत तपे विच्च थल दे
ज्यों जौं भुन्नण भठियारे, 
सूरज भज्ज वड़िया विच्च बद्दलीं
डरदा लिशक ना मारे, 
हाशम वेख यकीन सस्सी दा 
सिदकों मूल न हारे।  
ई-मेल : sandhugulzar@yahoo.com

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