स्वच्छता मानव की पहली और बुनियादी ज़रूरत
आज विश्व हाथ स्वच्छता दिवस पर विशेष
विश्व हाथ स्वच्छता दिवस हर साल 5 मई को मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2009 में पहली बार इस दिन की शुरुआत की थी। उद्देश्य था, स्वास्थ्य सेवा में हाथ धोने की आदत को एक वैश्विक आंदोलन बनाना। यह महत्वपूर्ण दिवस केवल एक जन जाग्रति का अभियान या मिशन नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में स्वच्छता की बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने का एक वैश्विक प्रयास है। यह दिन हाथों की स्वच्छता के महत्व को समझाने और संक्रमण से बचाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु समर्पित है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि स्वच्छ हाथ संक्रमणों से बचाव की पहली कड़ी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार यह दिन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए ज्ञान और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देता है, जिससे संक्रमण निवारण और नियंत्रण में सुधार होता है। यह पहल साबुन और पानी से हाथ धोने या कुंजी क्षणों पर अल्कोहल-आधारित हाथ रगड़ का उपयोग करके सही हाथ स्वच्छता अभ्यास को बढ़ावा देती है, जो विश्वव्यापी स्वास्थ्य सेवा से जुड़े संक्रमणों को कम करने का लक्ष्य रखती है। विश्व हाथ स्वच्छता दिवस इस बात की भी याद दिलाता है कि हाथ धोने जैसा आसान काम संक्रमणों से बचाव का एक प्रभावी तरीका हो सकता है। यह न केवल महामारी के दौरान बल्कि मौसमी स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कि एलर्जी के दौरान भी अहम है। जैसे ही गर्मी आती है, हवा से फैलने वाली एलर्जी के कारण कई लोगों की आंखों में खुजली और पानी आने लगता है। लेकिन अधिकतर लोगों को यह एहसास नहीं होता कि गंदे हाथ आंखों के संक्रमण और एलर्जी को बढ़ा सकते हैं या यहां तक कि उन्हें पैदा भी कर सकते हैं।
हम अपने दैनिक जीवन में कई ऐसी सतहों को छूते हैं जिन पर अदृश्य रोगाणु, बैक्टीरिया व वायरस मौजूद होते हैं। जब हम गंदे हाथों से अपना चेहरा, आंखें या भोजन छूते हैं, तो ये रोगाणु हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और दस्त, निमोनिया और फ्लू जैसी बीमारियां पैदा करते हैं। साबुन और पानी से हाथ धोने मात्र से ही हम इन रोगाणुओं को नष्ट कर सकते हैं और बीमारियों को फैलने से रोक सकते हैं। यह हमारे स्वास्थ्य की रक्षा करने और जीवन बचाने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। हमारे हाथ दिनभर कई सतहों को छूते हैं दरवाजे के हैंडल, मोबाइल फोन, पैसे, की बोर्ड आदि। इन सतहों पर मौजूद कीटाणु आसानी से हाथों के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। गंदे हाथों से भोजन करना या चेहरे को छूना कई बीमारियों का कारण बन सकता है। यूनिसेफ के आंकड़े बताते हैं कि हर साल लगभग 5 लाख लोग डायरिया और सांस की बीमारियों से मरते हैं, जिन्हें हाथ धोने की आदत से रोका जा सकता था।
स्वछता मानव की पहली और बुनियादी ज़रुरत है। यह नागरिकों के मूलभूत अधिकारों से जुड़ी सर्वोच्च आवश्यकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह दिन बेहद अहम है, जहां स्वास्थ्य सेवा से जुड़े संक्रमण आम हैं। जानकारी के मुताबिक भारत में अस्पताल में भर्ती हर 8 में से 1 मरीज संक्रमण से प्रभावित होता है। इनमें से कई संक्रमण गंदे हाथों के जरिए फैलते हैं। यह दिन विशेष रूप से भारत जैसे देशों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां संक्रामक रोगों का बोझ अधिक है और स्वास्थ्य सेवा से जुड़े संक्रमण एक बड़ी चुनौती हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत में अस्पताल में भर्ती मरीजों में से 12 प्रतिशत तक स्वच्छता से जुड़े संक्रमण से पीड़ित हैं और इनमें से कई गंदे हाथों से फैलते हैं। इस अभियान में शिक्षा का बड़ा महत्त्व है। हाथ की स्वच्छता को बढ़ावा देने में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि बच्चे अच्छी स्वच्छता प्रथाओं के साथ बड़े हों, स्कूल अक्सर हाथ धुलाई को अपने पाठ्यक्रम में शामिल करते हैं। जब बच्चे छोटी उम्र से हाथ धुलाई का महत्व सीखते हैं, तो उनके जीवन भर इसका अभ्यास जारी रखने की अधिक संभावना होती है।

