भाजपा की प्रभावशाली जीत
पांच राज्यों के हुए चुनावों के परिणाम सामने आ गये हैं, इनमें से जो बड़ी बातें उभर कर सामने आई हैं, उनमें भाजपा को मिली शानदार जीत शामिल है, जिसके गठबंधन ने असम में एक बार फिर बड़ी जीत दर्ज करवाकर तीसरी बार सत्ता पर कब्ज़ा किया है। यहां उसका मुख्य मुकाबला कांग्रेस के गठबंधन के साथ था, जिसको एक बार फिर करारी हार मिली है। कांग्रेस का मुख्यमंत्री का चेहरा गौरव गोगोई अपनी ही सीट से हार गये हैं। राज्य की 126 सीटों पर 9 अप्रैल को चुनाव हुए थे। लोगों ने बड़े उत्साह से इसमें भाग लिया था। इसी कारण लगभग 86 प्रतिशत मतदान हुआ था। भाजपा ने अपने 90 उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे। दूसरी तरफ कांग्रेस के 99 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे। इस बार कांग्रेस इस राज्य में ताकत हथियाने के लिए बड़े दावे ज़रूर करती रही थी। परन्तु आने वाले समय में पार्टी को ऐसी निराशा में से निकलने के लिए बड़े यत्न करने की ज़रूरत होगी और पार्टी के समूचे ढांचे का नवीनीकरण करना पड़ेगा।
पिछले लम्बे समय से पश्चिम बंगाल में होने वाले चुनाव की भी बड़ी चर्चा चलती रही है। यहां पिछले 15 वर्ष से तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने प्रशासन संभाला हुआ था। इस राज्य में कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों का लम्बे समय तक प्रशासन रहा है। वर्ष 1967 के बाद 34 वर्ष तक मार्क्सवादी पार्टी के नेतृत्व में वामपंथी मोर्चा का शासन रहा है। ज्योति बसु जैसे प्रभावशाली नेता लम्बे समय तक यहां मुख्यमंत्री बने रहे थे। लम्बे समय की पारी के बाद चली सत्ता विरोधी लहर में ममता बनर्जी ने अपनी नई बनाई पार्टी के बलबूते पर जीत प्राप्त की थी। वह विगत 15 वर्ष से प्रदेश की सत्ता पर काबिज़ रहीं। वर्ष 2021 के चुनाव में इसके मुकाबले में भाजपा को बड़ी सफलता अवश्य मिली थी, परन्तु इस बार भाजपा के पक्ष में चली लहर ने जहां ममता बनर्जी को पटखनी दी है, वहीं वामपंथी पार्टियां तथा कांग्रेस भी यहां पूरी तरह हाशिये पर आ गई है। यदि प्रदेश की पिछली राजनीति पर दृष्टिपात किया जाए तो आगामी समय में यहां भाजपा का प्रभाव जल्द खत्म होने वाला प्रतीत नहीं होता। केरल में परिणाम कांग्रेस के लिए राहत वाले अवश्य हैं। यहां उसके नेतृत्व वाले यूनाइटेड डैमोक्रेटिक फ्रंट को सफलता मिली है। इस प्रदेश के परिणाम से वामपंथी पार्टियों का आखिरी किला भी ढह गया है। सबसे अधिक आश्चर्यजनक परिणाम तमिलनाडु के रहे हैं, जिनमें दशकों से प्रशासन चला रही पार्टियां डी.एम.के. तथा अन्ना डी.एम.के. को बड़ी हार का मुंह देखना पड़ा है। यहां तक कि डी.एम.के. के प्रभावशाली मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन भी चुनाव हार गए हैं।
इनके स्थान पर फिल्म अभिनेता विजय की दो वर्ष पहले बनी पार्टी तामिलगा वेत्री कड़गम को भारी समर्थन मिला है। केन्द्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में पिछली बार भाजपा के नेतृत्व वाले एन.डी.ए. की सरकार थी। चुनाव परिणाम में इस बार भी इस गठबंधन को ही भारी समर्थन मिला है। देश भर में भाजपा के बेहद बढ़ रहे प्रभाव ने अन्य पार्टियों को पुन: गम्भीरता से आत्म-मंथन करने के लिए मजबूर कर दिया है। नि:संदेह भाजपा की बड़ी जीत ने उसकी ज़िम्मेदारियों में और वृद्धि कर दी है। अब उससे और भी ज़्यादा उम्मीद रखी जाएगी कि वह देश के संविधान की भावना को पूरी तरह कायम रखे। सभी समुदायों में आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए यत्नशील रहे और देश की एकता एवं अखंडता के लिए अपनी वचनबद्धता की अच्छी तरह पहरेदारी करे।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

