जनगणना 2026-27 तथा नागरिकों की ज़िम्मेदारी

किसी भी देश का विकास उसके नागरिकों की सही संख्या और उनके हालात पर निर्भर करता है। भारत में जनगणना 2026-27 सिर्फ एक प्रशासकीय अभ्यास नहीं, बल्कि यह एक ऐसा राष्ट्रीय मिशन है जो अगले दशक के लिए भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास की नींव रखेगा। वास्तव में जनगणना ही किसी देश के विकास का आधार मानी जाती है। यह सिर्फ लोगों की गिनती करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक ढांचे को समझने का एक वैज्ञानिक तरीका है। भारत जैसे बड़े और विभिन्नता भरपूर देश में जनगणना-2026 का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि इसके ज़रिए सरकार को प्रत्येक वर्ग के लोगों की वास्तविक स्थिति का पता चलता है और उसके अनुसार योजनाएं बनाई जा सकती हैं। 
आधुनिक समय में पहली बार जनगणना 1872 में शुरू हुई थी और 1881 से यह प्रत्येक 10 वर्ष बाद लगातार हो रही है। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार जनगणना करवाना केन्द्र सरकार की ज़िम्मेदारी है। इस बार की जनगणना इसलिए भी विशेष है, क्योंकि यह कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी के बाद तथा 10 वर्ष की बजाय 15 वर्ष बाद हो रही है। कोविड महामारी ने हमारे सामाजिक और आर्थिक ढांचे को पूरी तरह से बदल दिया है। इसलिए ये आंकड़े सिर्फ गिनती नहीं होंगे, बल्कि ये महामारी के बाद उभरे नए भारत की वास्तविक तस्वीर पेश करेंगे। जब हम इसे एक ‘राष्ट्रीय ज़रूरत’ कहते हैं, तो इसका वास्तविक अर्थ यह है कि देश के प्रत्येकत अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का स्तर और उपलब्धता, हर गांव में स्कूली शिक्षा का प्रबंध और हर शहर एवं गांव में पीने के पानी की सप्लाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के अतिरिक्त शेष सभी सुविधाएं इन्हीं आंकड़ों के आधार पर निर्भर करेंगी। इस प्रक्रिया का एक और गम्भीर पहलू देश की आर्थिक योजनाबंदी से जुड़ा हुआ है। देश की जीडीपी और मानवीय विकास दर सीधे जनगणना के नतीजों से जुड़ी होती हैं। सरकार को यह पता लगाने की ज़रूरत होती है कि किन क्षेत्रों में बेरोज़गारी दर ज़्यादा है, महिलाओं की साक्षरता दर कहां कम है और किन क्षेत्रों में प्रवास तेज़ी से हो रहा है।
इस बार की जनगणना विश्व की पहली पेपरलेस जनगणना है। इस प्रक्रिया का डिजिटल होना ही सबसे बड़ी विशेषता है। जनगणना के इतिहास में पहली बार है कि गिनती करने वाले कागज़ी फॉर्म की जगह मोबाइल एप्लीकेशन और टैबलेट का इस्तेमाल करके इस अभियान को सम्पन्न कर पाएंगे। इस बार इस्तेमाल की जाने वाली डिजिटल तकनीक, जैसे मोबाइल ऐप और स्व-गणना पोर्टल से न सिर्फ पारदर्शिता आएगी, बल्कि इकट्ठा किए गए डेटा के साथ छेड़छाड़ की गुंजाइश भी खत्म हो जाएगी। यह पहली बार होगा कि डेटा इकट्ठा करने और उसे विश्वेषण में लगने वाला समय आधे से भी कम रह जाएगा, जिससे सरकार तुरंत प्रभावी कदम उठा पाएगी। इसके अतिरिक्त इस बार देश की जनता को स्व-गणना की सुविधा भी दी गई है। स्व-गणना सुविधा का इस्तेमाल करके नागरिक निर्धारित पोर्टल पर अपनी तथा परिवार की जानकारी स्वयं भर सकते हैं। इससे समय बचेगा और आंकड़ों में गलती की सम्भावना भी कम होगी। यह जनगणना दो चरणों में होगी। पहले चरण में गिनती करने वाला अपने अधिकार क्षेत्र की इमारतों की पहचान करते हुए घरों का सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) करेगा और यह कार्य मई और जून 2026 में पूरा हो जाएगा, जबकि दूसरे चरण में प्रत्येक परिवार के प्रत्येक सदस्य के बारे में जानकारी इकट्ठा की जाएगी और यह चरण फरवरी-2027 में पूरा किया जाएगा। इसके साथ ही जाति आधारित सर्वे भी किया जाएगा। हमारे देश में 1931 के बाद पहली बार जाति आधारित सर्वे हो रहा है। इसलिए यह जनगणना और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
अक्सर देखा गया है कि कुछ कम जानकारी वाले लोग अपनी सम्पत्ति या पारिवारिक सदस्यों की संख्या बताने से आनाकानी हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे उनका टैक्स बढ़ सकता है या किसी सरकारी सुविधा में कटौती हो सकती है। यहां पढ़े-लिखे वर्ग और स्थानीय नेताओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि वे ही ऐसे लोगों को भरोसे में लेकर जागरूक कर सकते हैं। पंजाब जैसे राज्यों में, जहां कृषि और युवाओं का विदेश जाने का रुझान एक बड़ा मुद्दा है, वहीं सही जनगणना से यह साफ हो जाएगा कि हमारी कितनी मानवीय शक्ति विदेश जा रही है और हमें स्थानीय स्तर पर रोज़गार के कितने अवसर पैदा करने की ज़रूरत है।
कहा जा सकता है कि जनगणना 2026-27 राष्ट्र निर्माण के लिए एक ‘महा-सर्वेक्षण’ है। यह हमें असली आईना दिखाएगा कि हम एक राष्ट्र के रूप में कितने सफल हुए हैं और कहां हमें सुधारों की ज़रूरत है। यह हमारे बच्चों के भविष्य, हमारे बुज़ुर्गों के स्वास्थ्य की देखभाल और हमारे युवाओं के सपनों को हकीकत में बदलने का एक ज़रिया है। इसलिए प्रत्येक नागरिक की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि सही जानकारी देने को सुनिश्चित बनाया जाए।       -मो. 98140-44995

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