चुनौतियां ही चुनौतियां
पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र जारी है। एक तरह से यह सरकार का अंतिम सत्र ही माना जा रहा है, क्योंकि चुनाव की उम्मीद कुछ महीने में ही की जा रही है, इस कारण प्रदेश का राजनीतिक माहौल भी पूरी तरह गर्माया हुआ है। यह सत्र बहुत संक्षिप्त है, जिसमें प्रदेश को दरपेश मामलों पर ज्यादा विस्तार में चर्चा होना सम्भव नहीं है। क्योंकि विगत दिवस में कुछ मामलों को लेकर सख्त बहसबाज़ी के बाद मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस द्वारा ज्यादातर सदन से वॉक आऊट भी किया जाता रहा है। वैसे अवैध खनन के जारी रहने और अमन-कानून की गम्भीर स्थिति संबंधी कुछ मुद्दे कांग्रेस और अन्य विपक्षी विधायकों ने ज़रूर उठाए हैं परन्तु उन पर इस माहौल में कोई गहन चर्चा होना बेहद मुश्किल ही था। इसलिए इस संबंध में बातें आधी-अधूरी ही होती रही हैं।
सरकार द्वारा कुछ क्षेत्रों में अपनी उपलब्धियों का ज़िक्र ज़रूर किया गया है जिसका संबंध आम लोगों से था। जहां तक स्वास्थ्य सुविधाओं का संबंध है, इनके लिए अभी भी बहुत कुछ किए जाने की ज़रूरत है, परन्तु लोगों के लिए 10 लाख की स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर चर्चा होती रही है। यदि सरकार की यह योजना पूरी तरह लागू हो सके तो यह इस क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि ज़रूर मानी जाएगी। इसी तरह नहरों के पानी को भी ज़मीनों के आखिरी भाग तक पहुंचाने के कार्य को भी सफल माना जा सकता है। इससे जहां भूमिगत पानी की बचत होने की संभावना है, वहीं किसानों के लिए भी यह योजना लाभदायक सिद्ध हो सकती है। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने यह दावा किया है कि पंजाब स्कूल शिक्षा के पक्ष से केरल को पछाड़ कर देश का अग्रणी प्रदेश बना है। पिछली कांग्रेस सरकार ने भी स्कूल शिक्षा से संबंधित कुछ कामों में अच्छे सुधार किए थे, परन्तु बहुत कुछ करना फिर भी शेष था। इस बात को ही आगे बढ़ाते हुए शिक्षा मंत्री ने यह दावा किया है कि ‘आप’ की सरकार बनने से पहले स्कूलों के 4 लाख से अधिक विद्यार्थी दरियों पर बैठने के लिए मज़बूर थे और 4000 स्कूलों में चार-दीवारी तक नहीं थी। इसके साथ ही 3200 स्कूलों में इस्तेमाल करने योग्य शौचालय नहीं थे। उन्होंने यह दावा भी किया है कि स्कूलों के मूलभूत ढांचे के सुधार के लिए अब तक 3638 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और इस काम के लिए विश्व बैंक से 1000 करोड़ रुपये और प्राप्त किए जा रहे हैं। इसी तरह उन्होंने इस क्षेत्र में किए गए अन्य सुधारों का भी ज़िक्र किया है।
हम यह महसूस करते हैं कि सरकारी स्कूलों की प्रत्येक पक्ष से स्थिति बेहतर होने से लोगों का इन स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का रूझान ज़रूर बढ़ेगा, जिससे यह स्कूल निजी स्कूलों का मुकाबला करने में समर्थ हो सकते हैं। इस दिशा में लगातार बढ़ाए जाते कदम सरकार की ठोस उपलब्धि माने जा सकते हैं। आज सरकार के सामने अनेकानेक चुनौतियां खड़ी हैं। आर्थिक पक्ष से प्रदेश कमज़ोर हुआ दिखाई देता है। आगामी समय में सरकार को इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए भी अधिक तैयारी करने की ज़रूरत होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

