हसीना की वापसी
दो वर्ष पहले बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना वाजिद देश में सख्त गड़बड़ वाले हालात पैदा होने के बाद देश छोड़ कर भारत आ गई थीं। पिछले दो वर्ष में बांग्लादेश में बड़ी उथल-पुथल हुई है। शेख हसीना के शासन के समय में वहां की कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी अधिक मज़बूत हुई थी। इस कारण ही हसीना के भारत आने के बाद बड़ी संख्या में हिन्दुओं को वहां निशाना बनाया गया। उनके कारोबार तबाह कर दिए गए और उनके मन में दहशत पैदा की गई। हसीना ने बांग्लादेश में लम्बी अवधि तक शासन किया, जहां इस समय के दौरान उन्होंने भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखे, वहीं पाकिस्तान और चीन से भी एक दूरी बना कर रखी थी, परन्तु उनके भारत में शरण लेने के बाद आज वहां बहुत कुछ बदल चुका है।
बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी 1971 में इस नए देश के अस्तित्व में आने से लेकर आवामी लीग से राजनीति में लगातार मुकाबले में रही है। वहां आज पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया के बेटे तारिक रहमान प्रधानमंत्री बन गए हैं। हसीना के भारत में शरण लेने के बाद एक बार फिर से दोनों पड़ोसी देशों के संबंधों में बड़ी खटास आ गई थी। इसी समय में तारिक रहमान ने पाकिस्तान और चीन के साथ अपनी निकटता भी बना ली थी। बांग्लादेश नैशनलिस्ट पार्टी की जब भी सरकार आती रही, उसका भारत के साथ लगातार टकराव बना रहा। चाहे नई सरकार के अस्तित्व में आने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तारिक को नई ज़िम्मेदारी सम्भालने पर शुभकामनाएं दी थीं, उससे पहले भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर भी ़खालिदा के निधन पर वहां गए थे और वहां नई सरकार बनने पर लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह पर ढाका गए थे। आगामी महीने भारत में ‘ब्रिक्स’ देशों का सम्मेलन हो रहा है। उसके लिए भारत की ओर से तारिक रहमान को निमंत्रण दिया गया है। तारिक रहमान इसी वर्ष फरवरी में प्रधानमंत्री बने थे, परन्तु दोनों देशों में दो वर्ष पहले हसीना के मामले पर पैदा हुआ तनाव अभी भी बरकरार है। शेख हसीना ने दिल्ली में विदेशी पत्रकारों की प्रैस क्लब में जो बातें की हैं, नि:संदेह वह निडरता भरपूर और स्पष्ट हैं। हसीना ने कहा कि चाहे मैं जेल में जाऊं या मेरी हत्या कर दी जाए, फिर भी मैं बांग्लादेश वापिस जाऊंगी। उन्होंने कहा कि आज वहां जिस तरह के हालात बने हुए हैं, उसे देख कर हमेशा बड़ा दु:ख होता रहा है। देश की सुरक्षा, इसके विकास, इसकी खुशहाली और शांति के लिए उनका अपने देश में जाकर योगदान डालना बेहद ज़रूरी है और उन्होंने यह भी स्पष्ट रूप में कहा कि वहां आवामी लीग से प्रतिबन्ध हटाया जाना चाहिए। राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाना चाहिए और बड़ी संख्या में दर्ज किए गए झूठे मामले वापस होने चाहिएं।
हसीना के बेटे सजीब वाज़िद जोए ने कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को छोड़ कर बांग्लादेश दूसरा पाकिस्तान बनता जा रहा है, जो आगामी समय में दक्षिण एशिया के इस क्षेत्र के लिए बेहद घातक सिद्ध होगा। हसीना और वाज़िद ने अपनी ज़िन्दगी में बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं। उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान को वर्ष 1971 में बांग्लादेश को आज़ाद करवाने का संस्थापक माना जाता रहा है। उस समय के पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) पर सैन्य तानाशाह यहिया खान ने लोगों दबाने के लिए बहुत अत्याचार किए और लाखों ही बांग्लादेशियों को मार दिया गया था। हसीना को सबसे बड़ा झटका तब लगा था, जब बांग्लादेश बनने के कुछ वर्ष बाद ही उनके पिता सहित पूरे परिवार की कुछ सैनिकों द्वारा हत्या कर दी गई थी। हसीना और उसकी बहन के उस समय देश से बाहर होने के कारण वह बच गए थे। उसके बाद उनका अपने नए देश में बेहद घटनाओं से भरपूर जीवन शुरू हुआ, जिसने उनके व्यक्तित्व को और भी मज़बूत बना दिया। लम्बी अवधि तक अपने शासनकाल में उन्होंने भारत के साथ लगातार दोस्ती और सहयोग का हाथ बढ़ाए रखा और अपने देश में इस्लामिक आतंकवादी तत्वों को सख्ती से दबाने का यत्न किया था।
पिछले दो वर्षों से हसीना के भारत में रहने के कारण दोनों देशों के आपसी संबंध तनावपूर्ण बने रहे हैं। बांग्लादेश की सरकार ने हसीना को उनके हवाले करने के लिए भी भारत पर दबाव बनाया था, परन्तु भारत ने हसीना को अपने देश में शरण देने में किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं दिखाई। अब हसीना के साहसिक बयान के बाद एक बार फिर दोनों देशों के संबंधों में और तनाव आ सकता है, जिसके लिए आगामी समय में भारत को बेहद सुचेत होकर दक्षिण एशिया संबंधी अपनी नीतियों पर लगातार विचार करने की ज़रूरत होगी, क्योंकि इस समय पैदा हुई स्थिति बेहद नाज़ुक कही जा सकती है, जिसमें संतुलन बना कर रखना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
—बरजिन्दर सिंह हमदर्द

