चढ़ावा चोरी का छल

अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावे में चोरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। करोड़ों रुपया लुट गया। अधिकारी तमाशा देखते रहे। विपक्ष लगातार हमलावर हो रहा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ने एस.आई.टी. का गठन करने में देर नहीं लगाई। एस.आई.टी. की आरंभिक रिपोर्ट और इसकी शिकायत के प्रभावाधीन आठ लोगों पर केस दायर हुआ है। चंपत सहित किसी भी ट्रस्टी का नाम आरंभिक रिपोर्ट में नहीं है। मामला श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज हुआ। इसमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडे, सुभाष चन्द्र श्रीवास्तव और रामशंकर मिश्रा को नामज़द किया गया। इनमें अधिकांश चढ़ावा गिनती और दान प्रबन्धन से जुड़े रहे हैं। टिन्नू ट्रस्ट के महासचिव चंपत दास का पूर्व ड्राइवर रहा है। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू दान-पात्रों की देखभाल और उन्हें बेसमैंट तक पहुंचाने का काम करता था। उस पर करोड़ों के गबन का आरोप है। उसने ज़िले में कई सम्पत्तियां बनाईं। लवकुश मिश्रा चढ़ावा, नकदी गिनने वाली टीम का सदस्य था। उसके घर से 12 लाख रुपये मिले। अनुकल्प मिश्रा का गणना कक्ष में नकदी गिनने का काम था। उस पर आरोप है कि गिनती के दौरान रुपये निकालकर बाथरूम में छिपाये। मनीष यादव को दान-पात्रों से निकली नकदी गिनने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी। पुलिस के अनुसार उसके घर से 36 लाख रुपये बरामद हुए। करुणेश पांडेय को दान को कक्ष तक पहुंचाने का दायित्व दिया गया। आरोप है कि दान चुराकर सम्पत्ति खड़ी की। अविनाश शुक्ला को दान की गणना का काम दिया गया। उसने भी दान चुराकर सम्पत्ति बनाई। सुभाष श्रीवास्तव कैश काऊटिग स्टाफ का प्रभारी था। उसने निगरानी में आंखें बंद रखी। रामशंकर मिश्रा दान पात्रों की निगरानी करता था उस पर आरोप लगा कि दान व्यवस्था में रहते हुए गबन और हेरा-फेरी का।
इन सभी का और अन्य वे लोग जिनके नाम सामने आने शेष हैं। राम नाम की लूट की जगह, राम नाम पर श्रद्धापूर्वक साधारण जन द्वारा चढ़ाये गये चढ़ावे की राशि लूटने में विश्वास रहा। ऐसे लोगों के नाम सामने आ रहे हैं जिन्होंने राम के नाम पर करोड़ों रुपये की चांदी और सोना भेंट किया था। जो अब उपलब्ध नहीं है। लोग इस व्यापक तालमेल, चोरी की घटना से क्षुब्ध हैं।
आर.एस.एस. के प्रियांक खड़गे ने रजिस्ट्रेशन को लेकर एक ऐसा मुद्दा खड़ा किया जिसका जवाब उनके पास नहीं है। फिर राम मंदिर के दान-पात्र में चोरी जिसे प्रधानमंत्री के करीबी नृपेन्द्र मिश्रा डकैती कह रहे हैं। यह चोरी का मामला करोड़ों हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा है। 
इस बात पर भी आश्चर्य प्रकट किया जा रहा है कि संघ प्रमुख मोहन भागवत चुप क्यों हैं? यह कोई साधारण चोरी नहीं है। भगवान राम के घर में लूट मचाई गई है। संघ के लोग गर्व से कहा करते थे कि राम मंदिर निर्माण के लिए उन्होंने बड़ी कुर्बानी दी है। उसके स्वयं सेवकों ने लाठियां खाई हैं। जान जोखिम में डाली है। राम जी जो टैंट में बसते हैं, उनके लिए भव्य मंदिर बनवाया। मंदिर के नाम पर भारतीय जनता पार्टी को वोट मिले हैं। वह हर व्यक्ति दोषी माना गया जिसने राम मंदिर निर्माण के लिए कुछ नहीं किया।
विश्वास बहाली के लिए कानून को सख्ती से काम करना चाहिए। चंदा चोरी से जुड़े लोगों से हर तरह से रिकवरी, बनती सज़ा तुरंत मिलनी चाहिए। साथ ही भारत के अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में भी चढ़ावा के उपयोग पर आडिट बैठा देना चाहिए। जनता का मेहनत से कमाया धन जनता को मंदिरों में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा पर खर्च हो सके। ऐसा नियम लाना चाहिए।

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