गुलदाउदी के पौधे लगाने का यही है उचित समय
गुलदाउदी महत्वपूर्ण फूलों की एक किस्म है। इसे लगाने का यह उचित समय है। इसकी रुटिड कइंग्स पार्कों और घरों के गमलों में आजकल आसानी से लगाई जा सकती हैं। इनके फूलों की बहार अक्तूबर से दिसम्बर तक रहती है। दिसम्बर में गुलदाउदी के फूलों की प्रदर्शनियां और प्रतियोगिताएं विभिन्न संस्थाओं द्वारा आयोजित करवाई जाती हैं। इनमें भाग लेकर इनाम जीते जा सकते हैं। युवक-युवतियां घर बैठे व्यापारिक रूप में गुलदाउदी लगा सकते हैं। गुलदाउदी के फूलों से भरा एक गमला 200-300 रुपये तक बिक जाता है। गुलदाउदी स्टैंडर्ड और स्परे, दो किस्में होती हैं। दोनों की अलग-अलग रंगों की किस्में मिल जाती हैं। स्परे किस्म के गुलदाउदी फूलों का इस्तेमाल बुक्के, हार, लड़ियां, कट्ट फ्लावर तथा फ्लावर प्रबंधन आदि में किया जाता है। गुलदाउदी के अच्छी किस्म के फूल पैदा करने के लिए तकनीकी जानकारी होना ज़रूरी है, जो बागवानी विभाग, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय और इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीच्यूट के विशेषज्ञों से प्राप्त की जा सकती है। फूलों की अच्छी पैदावार लेने के लिए समय-समय पर गुड़ाई, खाद डालना और कीट नाशकों का छिड़काव आदि ज़रूरी हैं।
इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीच्यूट द्वारा गुलदाउदी की कई किस्में जैसे पूसा सोना, पूसा अरुणोदय, पूसा केसरी, पूसा आदित्य, पूसा चित्राक्षा आदि विकसित की गई हैं। गुलदाउदी के अगेते फूल लेने के लिए पूसा सोना किस्म लगानी चाहिए, जो 20 दिन पहले अक्तूबर के अंतिम सप्ताह से फूल देने शुरू कर देती है। यह किस्म गमलों में लगाने के लिए बहुत अनुकूल है। इसका फैलाव अच्छा (50-55 सैं.मी.) होता है। फूलों का रंग पीला और पौधे बौने (लगभग 25 सैं.मी.) होते हैं। पूसा अरुणोदय किस्म के पौधों की लंबाई मध्यम (50-55 सैं.मी.) तक है। इस किस्म का फैलाव भी अच्छा होता है। फूलों का घेरा 7-8 सैं.मी. और आकार दोहरा होता है। इस किस्म के फूल गुलाबी रंग के होते हैं। पूसा केसरी किस्म के पौधे अच्छे फैलाव वाले, लंबे (65-70 सैं.मी.) होते हैं। इस किस्म के फूलों का आकार 9-10 सैंटीमीटर तक होता है। इस किस्म के फूल कट्ट फ्लावर और गमला-प्रदर्शनी, दोनों उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। पूसा आदित्य किस्म का पौधा झाड़ीदार होता है। इसकी शाखाएं 30-35 सैंटीमीटर तक होती हैं। पौधे की ऊंचाई 55 से 60 सैंटीमीटर और फैलाव 45 से 60 सैंटीमीटर तक होता है। पूसा चित्राक्षा किस्म का पौधा भी झाड़ीदार होता है। यह लंबा (60 से 65 सैंटीमीटर) होता है और फैलाव भी बढ़िया है। यह स्परे किस्म की श्रेणी में आता है। यह गमलों और बगीचों में प्रदर्शनी के लिए अनुकूल है। व्यापारिक बाग लगाने के लिए इन किस्मों के पौधे व्यापारिक कंपनियों से भी मिल जाते हैं। उत्पादक इन पौधों को खुद तैयार करने में सफल रहे हैं। पौधे तैयार करने के लिए आईएआरआई के विशेषज्ञों से दिशा-निर्देश लिए जा सकते हैं।
गुलदाउदी को तैयार करने के लिए 5 से 6 घंटे धूप उपलब्ध होनी चाहिए। पौधों में बारिश का पानी ज़्यादा देर तक नहीं रुकना चाहिए। ज़्यादा और अच्छी गुणवत्ता के फूल लेने के लिए सरसों का छिलका या बोन मील 15-20 दिन के अंतराल में डालने की ज़रूरत है। पौधे के सूखे पत्तों को तोड़ देना चाहिए, क्योंकि इनसे फफूंद रोग लग जाते हैं। फफूंद रोगों से बचने के लिए बाविस्टन या बाज़ार में आई नई दवाइयों का स्प्रे किया जा सकता है।
सीज़न के अंत में मुरझाए हुए फूल तोड़ देने चाहिएं। फिर नई बन रहीं अन्य कलियां जल्दी खिल जाएंगी। प्रस्फुटन अवस्था में फूलों को पानी नहीं लगना चाहिए, नहीं तो यह जल्दी खराब हो जाते हैं। कीड़े-मकौड़ों से बचाव के लिए 2 मिलीलीटर नीम का तेल प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करना चाहिए। गुलदाउदी छोटे फार्म और निजी उत्पादक लगाते हैं। आईसीएआर-आईएआरआई के निदेशक और कुलपति डॉ. सी.एच. श्रीनिवासा राव कहते हैं कि आईएआरआई द्वारा विकसित गुलदाउदी की किस्में इस फूल की बढ़ रही मांग को पूरा कर सकती हैं। इन किस्मों की गुणवत्ता और पैदावार फायदेमंद है।
गमलों में गुलदाउदी तैयार करने के लिए बागवानी विभाग के पूर्व उप-निदेशक (सेवानिवृत्त) डॉ. स्वर्ण सिंह मान कहते हैं कि सबसे पहले मिट्टी का मिश्रण तैयार किया जाए, जिसमें एक हिस्सा खेत की मिट्टी, एक हिस्सा अच्छी तरह सड़ी हुई रूड़ी की खाद या केंचुआ खाद एक हिस्सा पत्तों की खाद डालनी चाहिए। गमले का आकार 10-12 इंच हो सकता है। एक घन मीटर मिट्टी के मिश्रण में दो किलो किसान खाद (कैन), सिंगल सुपरफॉस्फेट (एसएसपी) और म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) 2:2:1 के अनुपात में डालने चाहिएं। जब तक फूलों की बहार खत्म नहीं हो जाती, रूट स्कज़र् को तोड़ते रहना चाहिए, नहीं तो फूलों का रंग-रूप अच्छा नहीं होगा। फूलों के आकार और नम्बर के आधार पर गुलदाउदी को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है।



