नशा तस्करी की गम्भीर समस्या

देश में नशे और नशीले पदार्थों की तस्करी एवं आवक ने एक बार फिर केन्द्र और राज्यों की सरकारों को स्तब्ध किया है। नशीले पदार्थों की यह तस्करी अधिकतर पड़ोसी देश पाकिस्तान के माध्यम से सीमा-पार से ड्रोनों के ज़रिये की जाती है। नशे को लेकर किये गये एक व्यापक सर्वेक्षण के अनुसार पाकिस्तान एक प्रकार से नशीले पदार्थों के भण्डारण का केन्द्र बन गया है जहां से इन पदार्थों का बहुत बड़ा भाग भारत के पंजाब प्रांत में ड्रोनों के ज़रिये खपाया जाता है। भारत से फिर यह सामान तस्करी के ज़रिये कई अन्य देशों में भेजा जाता है जहां इसकी बड़ी मांग होती है। पाकिस्तान से भारत में पंजाब सीमा के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी यूं तो दशकों पूर्व से की जाती आ रही है। कभी नावों के माध्यम से, कभी सुरंगों के ज़रिये पाकिस्तानी पंजाब के सीमा-पार से भारतीय पंजाब में अफीम और हेरोइन की तस्करी की जाती रही है। तथापि, आजकल नावों का कार्य ड्रोनों से लिया जाने लगा है। ड्रोनों के ज़रिये पाकिस्तानी सीमा-पार से भारतीय पंजाब में अफीम, हेरोइन के साथ हथियारों की खेप भेजना जैसे आम बात हो गई है। 
वैसे तो नशे के लिए अफीम, चरस, कोकीन आदि अनेकानेक द्रव्यों एवं पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है किन्तु वर्तमान में हेरोइन सर्वोत्तम नशीला पदार्थ बन गया है। हाल ही में एक और बड़ा खतरनाक नशीला पदार्थ आईस भी बड़ी चर्चा में आया है। विगत कई वर्षों से हेरोइन की तस्करी और इसके सेवन की मात्रा में निरन्तर वृद्धि हुई है। इसका बड़ा प्रमाण इस एक तथ्य से मिल जाता है कि इन दिनों सीमाओं पर विशेष सुरक्षा चौकसी होने के बावजूद तस्करी से बरामद होने वाली खेपों की संख्या और मात्रा बढ़ गई है। इसके लिए तस्करों द्वारा अत्याधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जाने लगा है। सीमा सुरक्षा बलों की निरन्तर चौकसी और सतर्कता के बावजूद ऐसी घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। पिछले पांच वर्षों में पंजाब सीमा पर ड्रोन तस्करी की घटनाएं बढ़ कर तीन से 304 प्रति वर्ष तक हो गई हैं। नशीले पदार्थों की तस्करी के संबंध में स्थितियों की गम्भीरता को पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा की गई इस एक कठोर टिप्पणी से बेहतर समझा जा सकता है कि नशे का यह सम्पूर्ण कारोबार महज़ एक आपराधिक कार्य मात्र नहीं रह गया, अपितु राष्ट्र और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गया है।
यूं तो नशे के सेवन और नशीले पदार्थों की तस्करी की अलामत देश के कई राज्यों में है। गुजरात, महाराष्ट्र, हिमाचल, चंडीगढ़, राजधानी दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान भी इस रोग से ग्रस्त हो चुके हैं किन्तु पंजाब इस पथ पर अग्रणी चल रहा प्रतीत होता है। प्रदेश के युवाओं में नशे की समस्या एक गम्भीर संकट के रूप में उभर रही है। पंजाब सरकार की पुनर्वास योजनाओं के तहत प्रदेश का पुलिस तंत्र युवाओं को इस महारोग से बचाने के लिए भरसक यत्न कर रहा है किन्तु यह समस्या एक ऐसे बिगड़ैल घोड़े के समान हो गई है कि जिसकी नाक में आसानी से नकेल नहीं डाली जा सकती।
अभी हाल में अमृतसर के थाना लोपोके क्षेत्र में सीमा पार से आई लगभग 180 करोड़ रुपये की 19 किलो हेरोइन के साथ महिला सहित तीन तस्करों को हिरासत में लिया गया। नशा तस्करी में यह भी एक नई प्रवृत्ति सामने आई है कि अवयस्क बालकों को थोड़े से लालच के वशीभूत इस गैर-कानूनी कार्य में शामिल किया जा रहा है। महिलाओं एवं बच्चों की शमूलियत से इस अवैध क्रिया-कलाप को एक नया मोड़ मिला है। पिछले कुछ समय में पंजाब में पुलिस ने नशा तस्करी से जुड़े कई अवयस्कों और महिलाओं को भी हिरासत में लिया है। प्रदेश सरकार ने अपने ऑपरेशन प्रहार के दौरान लगभग 4000 तस्करों-गैंगस्टरों को गिरफ्तार भी किया है।
नि:संदेह इतने बड़े स्तर पर तस्करों की गिरफ्तारी, इतनी बड़ी मात्रा में हेरोइन की खेपों की बरामदगी से तस्करी पर काबू पाये जाने की सम्भावना बनती है, किन्तु इतनी बड़ी बरामदगी और बड़े स्तर पर युवाओं और अव्यवस्कों की शमूलियत से इस कारोबार की भीषणता भी जाहिर होती है। पंजाब सरकार के प्रहार-अभियानों और प्रदेश के पुलिस तंत्र की सक्रियता से बेशक प्रदेश के लोगों के मन में आशा और विश्वास की एक लकीर उपजते दिखाई देती है, किन्तु हम समझते हैं कि लक्ष्य एवं उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम किया जाना भी बहुत ज़रूरी है। पुलिस तंत्र की सक्रियता कागज़ों में भी हो, किन्तु धरातल पर उसे दिखाई भी अवश्य देना चाहिए। कानून के हाथ लम्बे होते हैं, किन्तु ये हाथ अपराधियों और तस्करों के गिरेबान तक पहुंचने भी तो चाहिएं। कुछ भी हो अथवा कुछ भी किया जाए, देश और पंजाब को नशीले पदार्थों की तस्करी की इस लाअनत से मुक्ति अवश्यमेव मिलनी चाहिए।

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