सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026

युवाओं के परिश्रम की सुरक्षा के लिए एक उचित पहलकदमी

मेरे सभी प्रिय युवा साथियों, जब कोई प्रश्न-पत्र लीक होता है, फर्जी अभ्यर्थी परीक्षा में बैठते हैं, साइबर माध्यमों से परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित की जाती है या संगठित गिरोह पूरी व्यवस्था से छेड़छाड़ करते हैं, तब नुकसान केवल एक परीक्षा का नहीं होता, बल्कि युवाओं के विश्वास, प्रशासनिक व्यवस्था की साख और समान अवसर की भावना को भी गहरी चोट पहुंचती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ  अनफेयर मीन्स) अधिनियम-2024 लागू किया। यह देश का पहला समर्पित कानून है जिसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता की रक्षा करना तथा परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
कानून का व्यापक दायरा : यह अधिनियम उन सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है, जिनके माध्यम से केंद्र सरकार की विभिन्न सेवाओं, संस्थानों और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए चयन किया जाता है। इनमें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी), कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए), रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबीज़), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (आईबीपीएस) तथा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य परीक्षा संस्थान शामिल हैं। इस कानून की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि पहली बार परीक्षा अपराधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया। अब प्रश्न-पत्र लीक करना, प्रश्न-पत्र या उत्तर कुंजी उपलब्ध कराना, फर्जी अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठाना, कंप्यूटर नेटवर्क या डिजिटल प्रणाली से छेड़छाड़ करना, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से नकल कराना, गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग करना तथा आर्थिक लाभ के उद्देश्य से परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करना स्पष्ट रूप से दंडनीय अपराध हैं।
2026 के संशोधन किसी भी प्रभावी कानून की वास्तविक शक्ति केवल उसके निर्माण में नहीं, बल्कि समय के साथ बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को सशक्त बनाने में निहित होती है। अब जब प्रश्न-पत्र लीक करने वाले गिरोह अब डिजिटल प्लेटफॉर्म, एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों, साइबर नेटवर्क और वित्तीय लेन-देन के आधुनिक तरीकों का उपयोग करने लगे थे तो ऐसे में यह आवश्यक था कि कानून भी इन नई चुनौतियों के अनुरूप और अधिक सक्षम बनाया जाए। इसी उद्देश्य से वर्ष 2026 में अधिनियम में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। इन का मुख्य उद्देश्य दंड बढ़ाना मात्र नहीं, बल्कि जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना था। संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यकता के अनुसार विशेष जांच दल (स्पेशल टास्क फोर्स) गठित करने का अधिकार प्रदान किया गया। संशोधनों में डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के वैज्ञानिक विश्लेषण पर विशेष बल दिया गया। साइबर फारेंसिक, डेटा विश्लेषण, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल संचार से जुड़े प्रमाणों के प्रभावी उपयोग से जांच एजेंसियों की क्षमता को और मज़बूत बनाने का प्रयास किया गया। साथ ही विभिन्न राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सूचना के त्वरित आदान-प्रदान की व्यवस्था को भी सुदृढ़ किया गया। न्यायिक प्रक्रिया को गति देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। 
युवा सशक्तिकरण  विकसित भारत की नींव : प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पिछले बारह वर्षों के दौरान युवाओं को केवल रोज़गार तलाशने वाला वर्ग नहीं, बल्कि भारत के विकास का सबसे बड़ा भागीदार माना गया है। इसी दृष्टि से शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार, उद्यमिता और आत्म-निर्भरता को केंद्र में रखकर अनेक नीतिगत निर्णय लिए गए। नई शिक्षा नीति-2020 ने शिक्षा को अधिक व्यावहारिक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने का मार्ग प्रशस्त किया, जबकि कौशल भारत मिशन, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया, अटल इनोवेशन मिशन, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और डिजिटल इंडिया, विद्या लक्ष्मी जैसी पहलों ने युवाओं के लिए सीखने, नवाचार करने और स्वरोज़गार के नए अवसर तैयार किए।
हरियाणा में पारदर्शी भर्ती व्यवस्था : राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए सशक्त कानूनी व्यवस्था लागू होने के साथ-साथ हरियाणा ने भी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और मेरिट को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में अनेक सुधार किए हैं। राज्य सरकार का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि सरकारी सेवा का अवसर केवल प्रतिभा, योग्यता और परिश्रम के आधार पर मिलना चाहिए। इसी सोच के अनुरूप भर्ती प्रक्रियाओं में तकनीक का व्यापक उपयोग, डिजिटल प्रणाली, समयबद्ध चयन प्रक्रिया और पारदर्शी व्यवस्थाओं को निरंतर मज़बूत किया गया है। भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप को कम करने, निष्पक्षता बढ़ाने तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रशासनिक सुधार लागू किए गए हैं। आज प्रदेश में ‘बिना खर्ची-बिना पर्ची’ के सिद्धांत पर पूरी पारदर्शिता और मेरिट के आधार पर 1.80 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की जा चुकी हैं। साझी प्रवेश परीक्षा (सीईटी) के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया को सरल, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया गया है।
जब प्रत्येक अभ्यर्थी यह विश्वास लेकर परीक्षा कक्ष में प्रवेश करेगा कि उसकी सफलता का निर्णय केवल उसकी योग्यता, क्षमता और परिश्रम करेगा, तभी वास्तविक अर्थों में समान अवसर वाली व्यवस्था स्थापित होगी। यही विश्वास सक्षम और पारदर्शी शासन की पहचान है, यही विकसित हरियाणा की शक्ति है और यही विकसित भारत की मज़बूत नींव भी। ऐसी निष्पक्ष और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था न केवल युवाओं के सपनों की रक्षा करेगी, बल्कि आने वाले भारत को अधिक सक्षम, अधिक प्रतिस्पर्धी और अधिक न्यायपूर्ण राष्ठ्र बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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