वाघा-अटारी सीमा पर जलेंगी मोमबत्तियां
भारत और पाकिस्तान के लोगों को शांति और दोस्ती का संदेश देने के लिए दशकों से अटारी-वाघा सीमा पर मोमबत्तियां जलाने वाली संस्थाएं हिन्द-पाक दोस्ती मंच, फोकलोर रिसर्च एकादमी तथा साऊथ एशिया फ्री मीडिया एसोसिएशन (साफमा) द्वारा इस बार भी 14 अगस्त की रात को सीमा पर मोमबत्तियां जलाने का फैसला किया गया है। पाकिस्तान की तरफ मोमबत्तियां जलाने का कार्यक्रम साफमा द्वारा किया जाएगा। इससे पहले लाहौर में साफमा के ऑडिटोरियम में ‘शांति को एक मौका और दो’ विषय पर भारत-पाक संबंधों को लेकर 4 से 6 बजे तक सैमीनार होगा। इसमें मुख्य वक्त पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद मुहम्मद कसूरी, राशिद रहमान (पत्रकार), मुजीज़द रहमान सामी (पत्रकार), डॉ. अमर जान महासचिव खल्क पार्टी, हुमा ज़मान खान फिक्र-ओ-अमन संगठन के नेता और साफमा के महासचिव इम्तियाज़ आलम होंगे। साफमा के ऑडिटोरियम में ही शाम 6.30 बजे से 8.30 बजे तक मानवाधिकारों पर एक कॉन्फ्रैंस होगी। इस का विषय ‘मानवाधिकारों की स्थिति और विवादों का समाधान’ होगा। यह सेमिनार पीपुल्स राइट्स एनफोर्समेंट मूवमेंट (प्रेम) द्वारा करवाया जाएगा। इसके बाद रात 11 बजे से 12.30 बजे तक पाकिस्तान की तरफ वाघा सीमा पर मोमबत्तियां जलाई जाएंगी। यह जानकारी साफमा के महासचिव इम्तियाज़ आलम ने दी है।
इस बीच सीमा पर भारत की तरफ मोमबत्तियां जलाने वाले संगठनों हिन्द-पाक दोस्ती मंच तथा फोकलोर रिसर्च अकादमी अमृतसर ने भी यह फैसला किया है कि वह भी 14 अगस्त को भारत की तरफ अटारी-वाघा सीमा पर रात 12 बजे मोमबत्तियां जलाने का प्रबंध करेंगे। इससे पहले अमृतसर के विरसा विहार में सुबह 11 बजे से 2.30 बजे तक ‘भारत-पाकिस्तान संबंध : मुश्किलें और संभावनाएं’ विषय पर एक सेमिनार होगा। इस कार्य के लिए उक्त संगठनों के नेता सतनाम सिंह माणक और रमेश यादव पूरी तरह सक्रिय हैं।
हिन्द-पाक दोस्ती मंच के महासचिव सतनाम सिंह माणक ने दोहराया कि भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में हुए समझौते से छेड़छाड़ न की जाए। समझौते को उसी तरह लागू रहने देना चाहिए, क्योंकि पानी का युद्ध परमाणु युद्ध बन सकता है, जो दोनों देशों के लिए खतरनाक सिद्ध होगा।
हिन्द-पाक दोस्ती के लिए तीन दशकों से यत्नशील संगठनों हिन्द-पाक दोस्ती मंच, साफमा और फोकलोर रिसर्च अकादमी द्वारा समान विचारधारा वाले संगठनों के साथ मिलकर हर साल 14 और 15 अगस्त की रात को अटारी-वाघा सीमा पर हिन्द-पाक दोस्ती मेले की तैयारियों को लेकर विरसा विहार अमृतसर में हुई बैठक में मुख्य रूप से शामिल होते हुए श्री माणक ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के 95 प्रतिशत लोग दोस्ती चाहते हैं, लेकिन सरकारों द्वारा बनाए गए संगठन इसके खिलाफ हैं। लेखकों, बुद्धिजीवियों, किसान नेताओं और शांति प्रिय लोगों के विचार सुनने के बाद श्री माणक ने कहा कि 30 साल पहले वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर द्वारा हिन्द-पाक दोस्ती के लिए शुरू किए गए समारोहों में पहले पाकिस्तान की ओर से भी शांति प्रिय लोग शामिल होते थे, परन्तु बाद में उनको वीज़े नहीं दिए गए, जिस कारण वे निराश हो गए। उन्होंने कहा कि अब भी वे पाकिस्तान की तरफ वाघा सीमा पर मोमबत्तियां जलाकर शांति का संदेश दे रहे हैं और भारत की तरफ भी भारत-पाकिस्तान की अटारी सीमा पर मोमबत्तियां जाल कर 1947 के विभाजन के दौरान मारे गए लाखों लोगों को श्रद्धांजलि दी जा रही है। उन्होंने भारत-पाक व्यापार शुरू करने और करतारपुर साहिब गलियारो को पुन: खोलने की मांग दोहराई और सीमा पार से आ रहे नशीले पदार्थों, हथियारों की तस्करी तथा देश विरोधी गतिविधियों की निंदा की और सरकारों से ऐसी गतिविधियों को बंद करवाने की मांग की।
इस मौके पर खास तौर पर मौजूद फोकलोर रिसर्च अकादमी के चेयरमैन और प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष सुरजीत जज ने अलग-अलग देशों के बीच चल रही जंग पर चिंता जताई और कहा कि यह रूझान पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है। उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान संबंधों का मुद्दा आज सिर्फ वोट का मुद्दा बन कर रह गया है, जिसे सरकारें छोड़ना नहीं चाहतीं। उन्होंने पंजाब की राजनीतिक पार्टियों से अपील की कि वे अपने चुनावी घोषणा-पत्रों में हिन्द-पाक दोस्ती की मांग को शामिल करें और इसे जन आन्दोलन बनाएं। रमेश यादव ने जानकारी देते हुए बाताय कि 14 अगस्त को सुबह 10.30 बजे विरसा विहार अमृतसर में सेमिनार करवाया जाएगा और आधी रात को अटारी सीमा पर मोमबत्तियां जलाकर विभाजन के दौरान हुई हिंसा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
इस बीच विरसा विहार के अध्यक्ष शिरोमणि नाटककार केवल धालीवाल ने हिन्द-पाक के रिश्तों को मज़बूत करने के लिए जन आन्दोलन चलाने पर ज़ोर दिया। किरती किसान यूनियन के रमिन्दर सिंह छज्जलविड्डी, कौमी किसान सभा के गुरजिन्दर सिंह बघियाड़ी, पंजाब किसान यूनियन रुलदू के बलबीर सिंह मुधल, डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट के अश्विनी अवस्थी, ऑल इंडिया किसान सभा के लखबीर सिंह निजामपुरा आदि ने संबोधित करते हुए दोनों देशों की मौजूदा स्थिति के लिए दोनों देशों की सरकारों को ज़िम्मेदार बताया तथा पूर्वी और पश्चिमी पंजाब के लोगों के बीच दोस्ती की डोर को मज़बूत करने के लिए की जा रही कोशिशों में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। समागम के अंत में करमजीत कौर जस्सल ने आए हुए मेहमानों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर ज्ञानी गरमदीप सिंह, बलजिन्दर सिंह पंधेर, साफमा की ओर से राजिन्दर सिंह रूबी, मनिन्दर सिंह मोगा, सुरजीत सिंह गोपीपुर, डॉ. प्रभजोत कौर, कमलजीत गिल, जगरूप सिंह, हरजीत सिंह सरकारिया और मनजीत सिंह मौजूद थे।
अंतिका
—़फैज़ अहमद ़फैज़—
दिल ना-उम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है,
लम्बी है गम की शाम, मगर शाम ही तो है।



